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Hisar News: स्वच्छता परीक्षा 2024 में लिए टीम ने नागरिक व जिंदल अस्पताल का सर्वे किया

Sun, 04 Aug 2024 04:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Sun, 04 Aug 2024 04:37 AM IST
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Survey conducted for cleanliness exam in 2024
हिसार। स्वच्छता परीक्षा 2024 के लिए टीम स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए पहुंची टीम ने शनिवार को अस्पतालों का सर्वे किया। तीन सदस्यीय टीम ने नागरिक अस्पताल, जिंदल अस्पताल में जाकर निरीक्षण किया। दोनों अस्पताल ही अधिक कचरा उत्पादक की कैटेगरी में आते हैं। ऐसे उत्पादकों को अपने कचरे का निस्तारण स्वयं करना होता है। टीम ने इन दोनों अस्पताल में पहुंचकर सफाई व्यवस्था जांची। सूखे हुए गीले कचरे को अलग-अलग करना के कार्य का अवलोकन किया। कचरा निपटान की प्रक्रिया देखी। शुक्रवार को भी टीम ने दो संस्थानों का निरीक्षण किया था। टीम के पास दिल्ली स्थित मुख्यालय से ऑनलाइन ही लोकेशन आ रही है। मौके पर ऑनलाइन ही रिपोर्ट भेज रहे हैं। इस साल के सर्वेक्षण के तहत पहली बार टीम शहर में आई है। टीम अभी दो दिन शहर में रहेगी। मार्च 2024 तक दो और टीम सर्वेक्षण के लिए पहुंचेगी।
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नगर निगम की स्वच्छता के मामले में हालत अच्छी नहीं है। 2023 में राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में नगर निगम 79 पायदान नीचे खिसका कर 194वें (एक लाख से ज्यादा की आबादी वाले वर्ग में) और राज्य स्तर पर 7वें (नगर निगम की कैटेगरी में) पायदान पर रहा। वाटर प्लस के दर्जे की रैंकिंग में कोई सुधार नहीं हुआ।
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वर्ष 2023 के स्वच्छता सर्वेक्षण में अलग-अलग कैटेगरी के मिलाकर कुल 9500 अंक थे। जिसमें रिसाइकिल, रिड्यूज व रियूज पर जोर दिया गया था। कुल अंक 9500 में सर्विस लेवल प्रोग्रेस के लिए 4830, सर्टिफिकेशन के लिए 2500 और सिटीजन वॉइस के लिए 2170 अंक निर्धारित किए गए थे। सर्वेक्षण में नगर निगम को 45.94 प्रतिशत अंक ही मिले थे। कुल 9500 में से निगम को 4365.14 अंक मिले। शहर की सफाई व्यवस्था पर हर माह करीब पौने तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें निगम के कर्मचारियों का वेतन भी शामिल है।
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कहां कितने नंबर मिले थे...
घरों से कचरे का उठान-82 प्रतिशत
मौके पर ही कचरे का वर्गीकरण-6 प्रतिशत
कचरे का निष्पादन-37 प्रतिशत
कचरा स्थलों का सुधार-56 प्रतिशत
रिहायशी एरिया में सफाई-80 प्रतिशत
बाजारों में सफाई-80 प्रतिशत
जल स्रोत की सफाई-60 प्रतिशत
सार्वजनिक शौचालयों की सफाई-80 प्रतिशत

पिछली बार कारणों से पिछड़ा था, इस बार भी नहीं सुधार
- स्वच्छता सर्वेक्षण में मुख्य फोकस पुनर्चक्रण, दोबारा से उपयोग व घटाने पर था, लेकिन निगम ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं कर सका।
- कचरे का निष्पादन इस सर्वेक्षण का मुख्य बिंदु है और निगम आज तक ठोस कचरा निष्पादन प्लांट नहीं लगा सका है।
- घरों से गीले व सूखे कचरे का अलग-अलग एकत्रित करने पर काफी जोर दिया जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था बनाने में अभी तक नाकाम साबित हुआ है।
- शहर में कचरा स्थलों पर व्यवस्था भी नहीं बन सकी है। हालात यह है कि इन जगहों पर कचरा फैला रहता है।
- निगम पुराने कचरे का भी पूरी तरह से निष्पादन करने में पूरी तरह सफल नहीं हो सका
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