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ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म, एक बार फिर से जर्जर भवनों में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल, मानसून में और बढ़ जाएगा खतरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jul 2022 10:48 PM IST
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Summer vacation ends, once again forced to read in dilapidated buildings, the threat will increase in monsoon
खुल गए स्कूल स्कूल का पहला दिन खुशी से झूमते बच्चे स्कूल में प्रवेश करते बच्चे। - फोटो : Hisar
हिसार। ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद शुक्रवार को स्कूलों में फिर से पढ़ाई का शोर सुनाई दिया। जिले में कई सरकारी स्कूलों की हालत जर्जर है। एक महीने का अवकाश खत्म हो गया लेकिन इन स्कूलों में न तो रंगरोगन हुआ और न ही मरम्मत। इसके अलावा कंडम घोषित किए भवनों की नीलामी करवाकर उनकों गिराने का काम भी नहीं हो पाया। ऐसे में छत से गिर रहे मलबे के खतरे के बीच विद्यार्थी और शिक्षक जान जोखिम में डाल पढ़ाई करने और कराने को मजबूर हैं।
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शिक्षा विभाग की ओर से कई बार इन कंडम स्कूलों की लिस्ट पीडब्ल्यूडी की बीएंडआर शाखा को भेजी जा चुकी है। विभाग का कहना है कि जर्जर स्कूल भवनों को कंडम घोषित करने व कंडम होने के बाद नीलामी कर इनको गिराने की प्रक्रिया काफी लंबी है। कई बार फाइल अलग-अलग विभागों को भेजी जाती है, इस कारण कंडम भवनों को गिराने में समय ज्यादा लग रहा है।
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फील्ड में उतरे डीईओ
जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कुलदीप सिहाग ने भी जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के कई स्कूलों का निरीक्षण किया। उन्होंने स्कूल मुखियाओं से विद्यार्थियों की कम उपस्थिति का कारण पूछा। स्कूल मुखियाओं ने बताया कि एक तो पहला दिन था दूसरा रविवार की छुट्टी होने के कारण ज्यादा विद्यार्थी स्कूलों में नहीं आए। उनका कहना था कि सोमवार को शत प्रतिशत उपस्थिती हो जाएगी। डीईओ ने सभी स्कूल मुखियाओं को स्कूलों का सुव्यवस्थित ढंग से संचालन करने के लिए प्रेरित किया। शुक्रवार को सुचारु रूप से मिड-डे-मील का भोजन तैयार किया गया व विद्यार्थियों को परोसा गया। उन्होंने स्कूलों के विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।
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बिजली कटों ने भी रुलाया
शुक्रवार को सुबह 8 बजे से दोपहर ढ़ाई बजे तक सरकारी स्कूलों में कक्षाएं लगी। इस दौरान कई बार बिजली कट लगे। बिजली कटों के कारण विद्यार्थियों को गर्मी में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ी।
स्कूलों में नहीं पहुंचीं किताबें
ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले शिक्षा विभाग ने कहा कि छुट्टियां पूरी होने तक सभी स्कूलों में पुस्तकें पहुंच जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। गौरतलब है कि जिले में करीब 1 लाख 12 हजार पुस्तकें शिक्षा विभाग के पास आनी है। जिनमें से कुछ अधिकतर पुस्तकें तो शिक्षा विभाग के पास आ गई हैं, लेकिन ये सभी विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाई हैं। शिक्षा विभाग द्वारा करीब दो महीने पहले पहली से आठवीं कक्षा की करीब 1 लाख 12 हजार पुस्तकों की डिमांड भेजी गई थी। इसमें सबसे ज्यादा 15007 पुस्तकें 6वीं कक्षा की शामिल हैं।
पाठ्यक्रम फोटोकॉपी करवाकर दिया था होमवर्क
सिरसा रोड टीटीसी में राजकीय विद्यालय में पुस्तकें नहीं पहुंची। ऐसे में शिक्षकों ने कक्षा वाइज पाठ्यक्रम की फोटोकॉपी करवाकर अलग-अलग सेट तैयार किए थे। इसी सेट से विद्यार्थियों को होमवर्क दिया गया था। शिक्षकों का कहना है कि बगैर पुस्तक पढ़ाने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को जब विद्यार्थी स्कूलों में पहुंचे तो शिक्षकों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद शिक्षकों ने होमवर्क चेक किया।

बारिश में खतरा अधिक
टीटीसी स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला के मुख्यापक महाबीर सिंह ने बताया कि हमारे स्कूल की बिल्डिंग काफी जर्जर हो चुकी है। बिल्डिंग का मलबा अपने आप गिर जाता है। स्कूल में 112 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। यह मामला कई बार जिला प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में लाया जा चुका है। शिक्षा विभाग व टीटीसी की विभागीय गाइडलाइन के कारण नए भवन निर्माण की प्रक्रिया सिरे नहीं चढ़ पा रही है। यही हाल राजकीय माध्यमिक विद्यालय का है। अब मानसून आ चुका है, ऐसे में खतरा अधिक बढ़ गया है।
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