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राज्य मानवाधिकार आयोग की टिप्पणी : 40 छात्राओं के यौन उत्पीड़न पर शिक्षा विभाग बना गूंगा-बहरा
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हिसार। आदमपुर खंड के राजकीय स्कूल में 40 छात्राओं के यौन उत्पीड़न मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया है। शिक्षा विभाग को दो बार नोटिस भेजने के बाद भी यौन उत्पीड़न के मामले की रिपोर्ट नहीं भेजने पर आयोग ने अंतिम चेतावनी दी है। आयोग चेयरपर्सन जस्टिस एसके मित्तल की तरफ से जारी ऑर्डर में लिखा है कि इतने गंभीर विषय पर भी शिक्षा विभाग गूंगा-बहरा बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि विभाग में किस तरह के अधिकारी काम कर रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को राज्य मानव अधिकार आयोग के आदेशों की कोई परवाह नहीं है। आयोग ने प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी के संज्ञान में पूरा मामला लाते हुए सेकेंडरी एजूकेशन के डायरेक्टर, शिक्षा विभाग के एसीएस के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है। आयोग ने इस पूरे मामले पर रिपोर्ट देने के लिए 17 अगस्त तक का समय दिया है।
बता दें इससे पहले भी आयोग रिपोर्ट भेजने के लिए विभाग को दो बार तारीख दे चुका है। शिक्षा विभाग की लापरवाही वाली कार्यप्रणाली से नाराज होकर मानवाधिकार आयोग ने यह तल्ख टिप्पणी की है। आदमपुर खंड के एक राजकीय स्कूल की छात्राओं ने आरोप लगाया था कि स्कूल के टीचर उनको गलत जगहों पर टच करते हैं, उनको जबरदस्ती अश्लील वीडियो दिखाते हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद विभाग ने तुरंत प्रभाव से पूरे स्कूल स्टाफ का तबादला करके यहां पर महिला टीचर्स को नियुक्त किया था।
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यह था मामला
वर्ष 2019 में आदमपुर खंड के एक गांव के सरकारी स्कूल की छात्रा ने जहर पी लिया था। इस मामले की जांच करने के लिए बाल संरक्षण अधिकारी सुनीता यादव स्कूल में पहुंची थी। उनके सामने स्कूल की 40 छात्राओं ने स्कूल के तीन टीचर व एसएमसी प्रमुख के खिलाफ उनका यौन उत्पीड़न करने की बात बोली थी। सुनीता यादव की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ आदमपुर थाने में केस दर्ज हुआ था व तीन आरोपी अध्यापकों की गिरफ्तारी हुई थी। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
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उन्होंने कहा कि विभाग में किस तरह के अधिकारी काम कर रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को राज्य मानव अधिकार आयोग के आदेशों की कोई परवाह नहीं है। आयोग ने प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी के संज्ञान में पूरा मामला लाते हुए सेकेंडरी एजूकेशन के डायरेक्टर, शिक्षा विभाग के एसीएस के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है। आयोग ने इस पूरे मामले पर रिपोर्ट देने के लिए 17 अगस्त तक का समय दिया है।
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बता दें इससे पहले भी आयोग रिपोर्ट भेजने के लिए विभाग को दो बार तारीख दे चुका है। शिक्षा विभाग की लापरवाही वाली कार्यप्रणाली से नाराज होकर मानवाधिकार आयोग ने यह तल्ख टिप्पणी की है। आदमपुर खंड के एक राजकीय स्कूल की छात्राओं ने आरोप लगाया था कि स्कूल के टीचर उनको गलत जगहों पर टच करते हैं, उनको जबरदस्ती अश्लील वीडियो दिखाते हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद विभाग ने तुरंत प्रभाव से पूरे स्कूल स्टाफ का तबादला करके यहां पर महिला टीचर्स को नियुक्त किया था।
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यह था मामला
वर्ष 2019 में आदमपुर खंड के एक गांव के सरकारी स्कूल की छात्रा ने जहर पी लिया था। इस मामले की जांच करने के लिए बाल संरक्षण अधिकारी सुनीता यादव स्कूल में पहुंची थी। उनके सामने स्कूल की 40 छात्राओं ने स्कूल के तीन टीचर व एसएमसी प्रमुख के खिलाफ उनका यौन उत्पीड़न करने की बात बोली थी। सुनीता यादव की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ आदमपुर थाने में केस दर्ज हुआ था व तीन आरोपी अध्यापकों की गिरफ्तारी हुई थी। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है।