फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Special on World Pulses Day: Protein in food, pulses are the main source of nitrogen in the earth

विश्व दाल दिवस पर विशेष : भोजन में प्रोटीन, धरती में नाइट्रोजन का प्रमुख स्रोत हैं दालें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Feb 2023 11:52 PM IST
विज्ञापन
Special on World Pulses Day: Protein in food, pulses are the main source of nitrogen in the earth
हिसार। भोजन में प्रोटीन के प्रमुख स्रोत दालें खेत के लिए नाइट्रोजन भी बनाती हैं। इसलिए खेत को भी स्वस्थ रखने में इनका प्रमुख योगदान है। यद्यपि सिंचित क्षेत्रफल बढ़ने के कारण दलहनी फसलों की बिजाई का क्षेत्रफल घटने लगा था, लेकिन नई वैरायटी आने के बाद दो साल से फिर इनकी बिजाई को लेकर किसान जागरूक हुए हैं। अब प्रदेश में करीब पौने दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में दलहनी फसलों की बिजाई हो रही है।
विज्ञापन

दो साल में दो गुना हुआ क्षेत्रफल
वैसे तो दालों के महत्व को रेखांकित करने के लिए वर्ष 2019 से हर साल 10 फरवरी को विश्व दाल दिवस मनाया जाता है। हालांकि हरियाणा प्रांत कभी दलहन के मामले में देश में विशेष पहचान रखता था। यहां के किसान मसूर, चना, मूंग, उड़द व अरहर की खेती करते थे। वर्ष 1960 में प्रदेश में करीब 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में दलहन के फसल की बिजाई होती थी। परंतु सिंचाई सुविधा बढ़ने व गेहूं-धान का बिजाई क्षेत्रफल बढ़ने के कारण दलहनी फसलों का क्षेत्रफल एक लाख हेक्टेयर से भी कम रह गया था। वर्ष 2019 में तो केवल 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही दलहनी फसलों की बिजाई की गई थी। परंतु अब क्षेत्रफल फिर से बढ़ने लगा है। वर्ष 2020-21 में प्रदेश में एक लाख 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में दलहनी फसलों की बिजाई की गई थी। इसके सापेक्ष एक लाख 49 हजार मीट्रिक टन दालों का उत्पादन हुआ था।
विज्ञापन


मूंग की फसल पर बढ़ा किसानों का भरोसा
एचएयू के दलहन फसलों के विशेषज्ञ डॉ. राजेश यादव बताते हैं कि हिसार के किसान मूंग की नई वैरायटी एमएच 421 व एमएच 1142 को खूब पसंद कर रहे हैं। एमएच 421 की सभी सीजन में बिजाई होती है। इसकी औसत उपज प्रति एकड़ करीब पांच क्विंटल (12-13 मन) है। इसके अलावा एमएच 1142 वेराइटी की बिजाई खरीफ सीजन में होती है। इसकी औसत उपज 15 मन प्रति एकड़ होती है। मूंग की फसल औसतन 60-65 दिन में तैयार हो जाती है। मूंग की इन दोनों प्रजातियों में पीला मोजैक रोग नहीं लगता। इसके अलावा हरियाणा चना-6 व 7 प्रजाति को भी किसान काफी पसंद कर रहे हैं। जिले में दलहन के कुल क्षेत्रफल का एक चौथाई हिस्सा अकेले मूंग का है।
विज्ञापन
विज्ञापन


25 प्रतिशत तक घटेगी यूरिया की डिमांड
डॉ. राजेश यादव बताते हैं कि दलहनी फसलों की जड़ में गांठें बनती हैं। ये पौधे प्रकृति से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में उसकी मात्रा बढ़ा देते हैं। इसलिए जिन खेतों में दलहनी फसल बाई जाती है, उसमें अगली फसल में 25 प्रतिशत तक यूरिया की डिमांड कम होती है। मूंग की एमएच 421 वैरायटी 60 दिन में तैयार होती है। किसान गेहूं की कटाई कर तत्काल इसकी बिजाई कर दें तो धान की बिजाई से पहले यह फसल कट जाएगी। इससे खेत को अगली फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन मिल जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed