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बुजुर्गों के लिए सोशल मीडिया बना सहारा तो त्योहारों पर 'अपनों' से दूर होने का दर्द

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2022 11:54 PM IST
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Social media becomes a support for the elderly, then the pain of being away from 'loved ones' on festivals
हिसार- अमर उजाला कार्यालय में वानप्रस्थ संस्था के सदस्य संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए - संव - फोटो : Hisar
हिसार। जनसंख्या परिवर्तन के रुझान अगर यूं ही चलते रहे तो सन् 2050 तक देश में वृद्धों की संख्या बच्चों से कहीं अधिक हो जाएगी। बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा के लिए अनेक कानूनी प्रावधान तो किए गए हैं, लेकिन उन पर प्रभावी अमल के लिए अभी और कदम उठाने की जरूरत है। ये बातें वरिष्ठ नागरिकों की संस्था वानप्रस्थ के प्रधान डॉ. सुदामा अग्रवाल ने अमर उजाला के कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित संवाद कार्यक्रम में कहीं। संवाद का विषय वरिष्ठ नागरिक, समाज और मीडिया रहा। दूरदर्शन के पूर्व समाचार निदेशक अजीत सिंह ने गोष्ठी का संचालन किया।
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वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि सोशल मीडिया की वजह से अब वह अपने बच्चों से वीडियो कॉल कर दुख-सुख साझा कर सकते हैं। हालांकि इसके कारण कुछ नुकसान यह हुआ है कि विदेशों या दूसरे शहरों में रहने वाले बच्चे होली-दिवाली पर भी अभिभावकों से मिलने आने के बजाय वीडियो कॉल कर इतिश्री कर लेते हैं। वरिष्ठ नागरिक आजकल अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं।
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डॉ. सुदामा अग्रवाल ने कहा कि बेहतर रहन-सहन, खान-पान और चिकित्सा सुविधाओं के कारण देश में औसत आयु वर्तमान 68.6 वर्ष से बढ़कर 2050 तक 76.2 वर्ष हो जाएगी। बेहतर जिंदगी की चाह में दंपती कम बच्चे पैदा कर रहे हैं और वरिष्ठ नागरिक लंबी उम्र जी रहे हैं। इसके अलावा प्रो. सुनीता श्योकंद, प्रो. सुनीता जैन, वर्षा जैन, दयानंद बैनीवाल, कृष्ण नागपाल, पीसी चुघ, शशिकांत, इंद्र सिंह बामल, सूबे सिंह लाठर, एसपी चौधरी व सुरेश कुमार ने भी गोष्ठी में अपने विचार रखे। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष कमलेश भारतीय ने वृद्ध जीवन का उल्लेख करती दो लघुकथाएं प्रस्तुत कीं।
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बढ़ती उम्र को देखते हुए अस्पतालों में जिस तरह बच्चों की बीमारियों के लिए विशेष डॉक्टर होते हैं, उसी तरह वृद्धजनों की बीमारियों के लिए भी विशेष डॉक्टर व स्पेशल वार्ड होने चाहिए। वानप्रस्थ संस्था ने उपकरण बैंक स्थापित किया है जहां से उन मरीजों के लिए बेड, व्हील चेयर, वॉकर निशुल्क दिए जाते हैं, जिन्हें डॉक्टर यह कह कर घर भेज देते हैं कि अब इन्हें घर ले जाइए और सेवा कीजिए। - प्रो. सतीश कालरा
वानप्रस्थ ने कोरोनाकाल में अनाथ हुए 35 बच्चों को 12-12 हजार रुपये सहायता के तौर पर दिए गए। हमने पहली लहर में लोगों को मास्क, सैनिटाइजेशन मशीन उपलब्ध कराई। दूसरी लहर में ऑक्सीमीटर, फ्लोमीटर वितरित किए। दूसरी लहर में मौत अधिक होने पर कफन व श्मशान को लकड़ियां भी उपलब्ध कराई। - डॉ. जेके डांग
सुपर सीनियर नागरिकों के लिए सामाजिक मेलजोल के लिए काम करना चाहिए। 91 वर्षीय पिता एचपी सरदाना, जो अक्सर बीमार रहते थे, उन्हें हर दो महीने में अस्पताल में दाखिल करना पड़ता था। वानप्रस्थ में आने के बाद उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य में आश्चर्यजनक ढंग से सुधार हुआ है। - सुनीता मेहतानी
समाचार पत्रों व टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया तक का सबसे अधिक उपयोग वरिष्ठ नागरिक ही करते हैं, हालांकि मीडिया वरिष्ठ नागरिकों पर केंद्रित कार्यक्रम अक्सर नहीं दिखाता। व्हाट्सएप जैसे माध्यमों पर उन्होंने अपने पुराने मित्रों व हम विचार लोगों के समुदाय बना लिए हैं, जो उनके अकेलेपन को दूर करते हैं। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों की इच्छा शक्ति ही बुढ़ापे की असली ताकत है।

- डीपी ढुल, पूर्व मुख्य जनसंपर्क अधिकारी
जल संरक्षण के लिए हर घर और पार्क में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने चाहिए। वानप्रस्थ की पहल पर मॉडल टाउन के कुछ पार्कों में ऐसे सिस्टम लगाए गए हैं, जिनसे जलभराव की समस्या समाप्त हो गई है। इसके लिए समाज के लोगों को एकजुट होना चाहिए। - विजय प्रभाकरण
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