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पशुओं पर हो रहा चेचक का अटैक, विशेषज्ञ बोले- न पनपने दें मच्छर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Oct 2021 12:03 AM IST
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Smallpox attack on animals, experts said - do not allow mosquitoes to breed
हिसार। मुंहखुर के बाद अब पशुओं पर चेचक ने अटैक करना शुरू कर दिया है। इस मामले को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। अधिकारी आंकड़े देने से भी कतरा रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार ने शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के पशु चिकित्सालयों के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इसमें स्पष्ट किया है कि वे संबंधित क्षेत्रों में सफाई के प्रति लोगों को जागरूक करें। अगर कोई बीमार पशु मिलता है तो उसकी चिकित्सा से जांच करवाएं। इसके अलावा संबंधित क्लीनिकों के अधिकारियों व कर्मचारियों को स्पष्ट किया है कि अगर कोई भी पशुओं में चेचक से ग्रस्त होने के केस मिलते हैं तो तुरंत मुख्यालय को सूचित करें।
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लुवास के वीपीएचई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी तक जितने भी केस आए हैं। उनमें सबसे बड़ा कारण मच्छर मिले। क्योंकि इस मौसम में मच्छर अधिक पनप रहे हैं। बड़ा कारण यह सामने निकलकर आया है कि यदि कोई पहले से बीमार पशु है और उसे मच्छर काट लेता है तो जैसे ही दूसरे पशुओं को वहीं मच्छर काटता है तो उसमें चेचक के लक्षण मिलने शुरू हो जाते हैं। इसलिए सफाई का विशेष ख्याल रखें। अधिकारियों ने बताया कि तीन माह पहले प्रदेश में पशुओं को चेचक से ग्रस्त होने के केस मिलने लगे थे, लेकिन उस दौरान इस महामारी की रफ्तार धीमी थी। सर्वाधिक गाय में चेचक का अटैक देखने को मिल रहा है।
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यह होता है पशुओं में चेचक
पशुओं में त्वचा संबंधित रोग है, जिसे अंग्रेजी में लंपी स्किन बीमारी के नाम से जाना जाता है। इस बीमारी में चेचक की तरह पशु के पूरे शरीर पर फफोले हो जाते हैं और लगातार बुखार रहता है। इलाज नहीं मिलने पर यह फफोले बड़े घाव का रूप ले लेते हैं। कुछ दिन बाद पशु की मौत हो जाती है। हालांकि विशेष बात है कि पशुपालक इस बीमारी से अनजान है।
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लक्षण
- अगर कोई पशु चेचक से ग्रस्त होता है तो वह लगातार हरकत करता रहता है। जिससे वह बैचन होने लगता है।
- पशु खाना खाना छोड़ देता है।
- यह महामारी का असर लगातार छह से 7 दिन में दिखाई देना शुरु कर देता है।
- पशु को चलने में दिक्कत होती है।
बचाव
- अगर कोई बीमार पशु है तो अन्य पशुओं को उससे दूर रखें।
- पशुओं को रहने की जगह में मच्छर न पनपने दें। सफाई का विशेष ख्याल रखें।
- अगर कोई भी पशु खरीदता है तो उसे तीन माह तक अलग रखें। ताकि पशु से संबंधित बीमारी का पता चल सकें।
- अगर कोई पशु चेचक की ग्रस्त में आता है तो उसे पेन किलर व एंटीवाइटिक की गोली दें।
- पशु के रहने की जगह को वीरू साइडेन स्प्रे से छिड़काव करें।
1929 में खोजी थी यह बीमारी
सबसे पहले 1929 में अफ्रीका में यह बीमारी सबसे पहले फैली थी। लेकिन भारत में इसका प्रकोप धीरे-धीरे आने शुरु हो गए। पहले देश के 15 राज्यों में फिर बीते तीन माह में प्रदेश में पशुओं में चेचक के केस अधिक मिलने शुरु हो गए। हरियाणा में गाय और भैंसों की संख्या करीबन 50 लाख है और इस बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा 20 लाख गोवंश को है।

पशुओं में चेचक का खतरा बढ़ चुका है। केस भी मिलने शुरू हो गए हैं। क्लीनिकों में रोजाना केस आ भी रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा सफाई रखें। अन्यथा पशुओं पर चेचक का खतरा मंडरा सकता है। - प्रो. डॉ. नरेश जिंदल, एचओडी, वीपीएचई, लुवास
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