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Hisar: जमीन के नीचे दबे मादक पदार्थ को सूंघ कर बाहर निकाल देते है सिंबा, माइकल और बुलेट
Mon, 17 Oct 2022 03:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 17 Oct 2022 03:07 AM IST
सार
हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल हिसार यूनिट के पास बेल्जियम नस्ल के तीन कुत्ते हैं। आईटीबीपी में हुई छह माह की ट्रेनिंग, दो हैंडलर देखभाल करते हैं।
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हिसार। बेल्जियम नस्ल का सिंबा।
- फोटो : Hisar
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विस्तार
हिसार। हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल हिसार यूनिट में पुलिस कर्मचारियों के साथ-साथ मादक पदार्थ ढूंढने में बेलिज्यम नस्ल के तीन कुत्ते भी मदद करते हैं। पुलिस टीम में शामिल सिंबा, माइकल और बुलेट एक बार नशीला पदार्थ सूंघन के बाद जमीन में दबा नशीले पदार्थ को भी ढूंढ निकाले हैं। इन कुत्तों की मदद से पुलिस जींद और भिवानी में आरोपियों को पकड़ने और मादक पदार्थ की बरामदगी कर चुकी है।
लेबरा नस्ल से दस गुना ज्यादा है सूंघने की शक्ति
हिसार यूनिट के डीएसपी प्रदीप यादव ने बताया कि पहली बार नारकोटिक्स सेल के पास कुत्ते आए हैं। पहले जब जरूरत पड़ती थी तो कुत्ते मांग कर लाने पड़ते थे। अब हमारी यूनिट के पास तीन ट्रेंड कुत्ते हैं। बेल्जियम नस्ल के इन कुत्तों को छह महीने के लिए आईटीबीपी में ट्रेनिंग दिलाई गई। इनके साथ साथ दो हैंडलर एचसी देवेंद्र और मुकेश को इनके साथ ट्रेनिंग दिलाई है। दोनों हैंडलर के अलावा सफाई कर्मी श्रीभगवान इनकी देखरेख करते हैं। उन्होंने बताया कि लेबरा नस्ल के कुत्तों के मुकाबले बेल्जियम नस्ल के कुत्तों की सूंघने की क्षमता दस गुना ज्यादा है।
दो टाइम देते हैं डाइट
उन्होंने बताया कि हर महीने 8050 रुपये एक कुत्ते की डाइट का खर्चा है। दिन में दो बार इन्हें फीड दी जाती है। फीड के अलावा इन्हें कुछ नहीं दिया जाता। हैंडलर और सफाई कर्मचारी इनका ध्यान रखते हैं। हालांकि अभी तक इन्हें कोई रैंक नहीं दिया है।
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लेबरा नस्ल से दस गुना ज्यादा है सूंघने की शक्ति
हिसार यूनिट के डीएसपी प्रदीप यादव ने बताया कि पहली बार नारकोटिक्स सेल के पास कुत्ते आए हैं। पहले जब जरूरत पड़ती थी तो कुत्ते मांग कर लाने पड़ते थे। अब हमारी यूनिट के पास तीन ट्रेंड कुत्ते हैं। बेल्जियम नस्ल के इन कुत्तों को छह महीने के लिए आईटीबीपी में ट्रेनिंग दिलाई गई। इनके साथ साथ दो हैंडलर एचसी देवेंद्र और मुकेश को इनके साथ ट्रेनिंग दिलाई है। दोनों हैंडलर के अलावा सफाई कर्मी श्रीभगवान इनकी देखरेख करते हैं। उन्होंने बताया कि लेबरा नस्ल के कुत्तों के मुकाबले बेल्जियम नस्ल के कुत्तों की सूंघने की क्षमता दस गुना ज्यादा है।
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दो टाइम देते हैं डाइट
उन्होंने बताया कि हर महीने 8050 रुपये एक कुत्ते की डाइट का खर्चा है। दिन में दो बार इन्हें फीड दी जाती है। फीड के अलावा इन्हें कुछ नहीं दिया जाता। हैंडलर और सफाई कर्मचारी इनका ध्यान रखते हैं। हालांकि अभी तक इन्हें कोई रैंक नहीं दिया है।
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हिसार। बेल्जियम नस्ल का माइकल।