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Hisar News: इंटरनेट बंद करना ही समाधान नहीं, दूसरे विकल्पों पर काम करना होगा
Sat, 17 Feb 2024 09:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sat, 17 Feb 2024 09:59 PM IST
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अतुल बंसल, मंडी आदमपुर हिसार।
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हिसार। प्रदेश सरकार की ओर से कानून व्यवस्था का हवाला देकर इंटरनेट बंद कर दिया गया है। पिछले 6 दिन से इंटरनेट बंद होने के कारण लोगों के दैनिक काम प्रभावित हो गए हैं। बाजार से लेकर व्यापार, विद्यार्थी से लेकर शिक्षक, कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक सभी को असर पड़ा है। इस समय परीक्षा का समय चल रहा है। काफी विद्यार्थी कोचिंग के लिए ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। इंटरनेट बंद होने से युवाओं को दिक्कत आ रही है। अन्य राज्यों और विदेश में रहने वाले लोग अपने परिजनों से वीडियो कॉल नहीं कर पा रहे हैं। इससे पहले आरक्षण आंदोलन, किसान आंदोलन 2021 के समय भी लंबे समय तक इंटरनेट बंद किया गया था। इंटरनेट बंद होने के कारण वाईफाई की मांग तेजी से बढ़ रही है। कंपनियों की ओर से 3 से लेकर 10 दिन तक की वेटिंग दी जा रही है। कंपनियों ने ब्रॉडबेंड कनेक्शन के (वाईफाई) रेट भी बढ़ा दिए हैं। इंटरनेट बंद होने पर लोगों की अलग अलग राय है।
इंटरनेट बंद करने से सरकार-प्रशासन को अफवाहों को रोकने में काफी मदद मिलती है। जिससे कानून व्यवस्था बनाने में सहयोग मिलता है। इंटरनेट आज सभी की जरूरत बन गया है। इसको बंद करने से आम लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। हमारे मौलिक अधिकारों में आर्टिकल 19 हमें सूचना लेने का अधिकार प्रदान करता है। प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि आम लोगों के दैनिक जीवन के काम प्रभावित न हों। सभी को उनके मौलिक अधिकार मिलने चाहिएं।
अतुल बंसल, मंडी आदमपुर हिसार
डिजिटल इंडिया के युग में हम इंटरनेट पर आश्रित हो गए हैं। हमें छोटे छोटे काम के लिए इंटरनेट की जरूरत पड़ती है। सुबह व्हाट्स एप देखने से हमारी शुरुआत होती है। जिससे हमें कुछ पल में ही देर रात से सुबह तक की सभी घटनाओं की जानकारी मिल जाती है। इसके बाद ऑनलाइन पेमेंट, ऑनलाइन आर्डर, ऑनलाइन पढ़ाई इसी पर निर्भर है। हमारी काफी सेवाएं अब ओटीपी पर निर्भर हैं। ओटीपी सेवा बंद होने से यह का भी ठप हो गए। सरकार को इंटरनेट बंद करने के बजाय दूसरे विकल्प सोचने चाहिएं।
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ओपी कादयान, शिक्षक, हिसार
पिछले कुछ साल में इंटरनेट को बंद करने की संख्या सबसे अधिक रही है। कानून व्यवस्था की थोड़ी सी घबराहट से ही प्रशासन सबसे पहले इंटरनेट को बंद करता है। इस समय परीक्षाओं का दौर चल रहा है। विद्यार्थियों को अपने सवालों के जवाब के लिए बार-बार इंटरनेट की आवश्यकता पड़ती है। पहले सरकार की ओर से डिजिटल का नारा देकर लोगाें को डिजिटल बनाया गया। अब अचानक से उसे बंद कर दिया जा रहा है। इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा कि क्या इंटरनेट पर प्रतिबंध ही अंतिम विकल्प है।
शमशेर बामल, हिसार
इंटरनेट की सेवाएं बंद होने से हर किसी को प्रभाव पड़ा है। बच्चों की मोबाइल बार बार देखने की आदत में थोड़ा सुधार आया है। अब बच्चे टेलीविजन देख कर इस समय मनोरंजन कर रहे हैं। दूसरी ओर इंटरनेट बंद हाेने से कामकाज पर असर पड़ा है। काफी कंपनियों का पूरा कारोबार ही इंटरनेट पर होने के चलते उन्हें नुकसान हो रहा है। इंटरनेट सुविधा बंद होने के कारण ऑर्डर नहीं आ रहे। काफी लोगों ने अब वाईफाई लगवाना शुरू कर दिया है। विकसित देशों की तरह से हमें नए विकल्प अपनाने होंगे।
कुलदीप मलिक, शिक्षक, हिसार
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इंटरनेट बंद करने से सरकार-प्रशासन को अफवाहों को रोकने में काफी मदद मिलती है। जिससे कानून व्यवस्था बनाने में सहयोग मिलता है। इंटरनेट आज सभी की जरूरत बन गया है। इसको बंद करने से आम लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। हमारे मौलिक अधिकारों में आर्टिकल 19 हमें सूचना लेने का अधिकार प्रदान करता है। प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि आम लोगों के दैनिक जीवन के काम प्रभावित न हों। सभी को उनके मौलिक अधिकार मिलने चाहिएं।
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अतुल बंसल, मंडी आदमपुर हिसार
डिजिटल इंडिया के युग में हम इंटरनेट पर आश्रित हो गए हैं। हमें छोटे छोटे काम के लिए इंटरनेट की जरूरत पड़ती है। सुबह व्हाट्स एप देखने से हमारी शुरुआत होती है। जिससे हमें कुछ पल में ही देर रात से सुबह तक की सभी घटनाओं की जानकारी मिल जाती है। इसके बाद ऑनलाइन पेमेंट, ऑनलाइन आर्डर, ऑनलाइन पढ़ाई इसी पर निर्भर है। हमारी काफी सेवाएं अब ओटीपी पर निर्भर हैं। ओटीपी सेवा बंद होने से यह का भी ठप हो गए। सरकार को इंटरनेट बंद करने के बजाय दूसरे विकल्प सोचने चाहिएं।
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ओपी कादयान, शिक्षक, हिसार
पिछले कुछ साल में इंटरनेट को बंद करने की संख्या सबसे अधिक रही है। कानून व्यवस्था की थोड़ी सी घबराहट से ही प्रशासन सबसे पहले इंटरनेट को बंद करता है। इस समय परीक्षाओं का दौर चल रहा है। विद्यार्थियों को अपने सवालों के जवाब के लिए बार-बार इंटरनेट की आवश्यकता पड़ती है। पहले सरकार की ओर से डिजिटल का नारा देकर लोगाें को डिजिटल बनाया गया। अब अचानक से उसे बंद कर दिया जा रहा है। इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा कि क्या इंटरनेट पर प्रतिबंध ही अंतिम विकल्प है।
शमशेर बामल, हिसार
इंटरनेट की सेवाएं बंद होने से हर किसी को प्रभाव पड़ा है। बच्चों की मोबाइल बार बार देखने की आदत में थोड़ा सुधार आया है। अब बच्चे टेलीविजन देख कर इस समय मनोरंजन कर रहे हैं। दूसरी ओर इंटरनेट बंद हाेने से कामकाज पर असर पड़ा है। काफी कंपनियों का पूरा कारोबार ही इंटरनेट पर होने के चलते उन्हें नुकसान हो रहा है। इंटरनेट सुविधा बंद होने के कारण ऑर्डर नहीं आ रहे। काफी लोगों ने अब वाईफाई लगवाना शुरू कर दिया है। विकसित देशों की तरह से हमें नए विकल्प अपनाने होंगे।
कुलदीप मलिक, शिक्षक, हिसार