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मेडिकल कॉलेज में नहीं आ रही ब्लैक फंगस की दवा

Mon, 07 Jun 2021 12:21 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jun 2021 12:21 AM IST
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shortage of black fungus medicine in Agroha medical college Hisar
हिसार। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस की दवा दो दिन से नहीं आ रही है। दो दिनों से अस्पताल में दाखिल मरीजों को इंजेक्शन नहीं लग रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक सोमवार शाम तक भी दवा आने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इससे पहले भी करीब 6 से 7 दिनों तक अस्पताल में दवा नहीं आई थी। उस दौरान दवा न आने के कारण मरीजों में संक्रमण अधिक फैला था। मरीजों को केवल पोसाकोनाजोल गोली ही मिल पा रही है।
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इस समय सबसे ज्यादा खतरा ऑपरेशन होने वाले मरीजों को है, क्योंकि ऑपरेशन के समय गई नस कट जाती है। ऐसे में उन खुली हुई नसों से फंगस को फैलने से रोकने के लिए तीन से चार दिन लगातार एंटीफंगल इंजेक्शन देना बेहद जरूरी है। अस्पताल में हर रोज 8 से 10 मरीजों के जबड़े, नाक और आंखों के ऑपरेशन हो रहे हैं। शनिवार शाम से उन मरीजों को भी इंजेक्शन नहीं लगे हैं, जिस कारण इन मरीजों में खुली हुई नसों से खून में फंगस होने का अधिक खतरा है। हालांकि, चिकित्सक भी वार्ड में दाखिल मरीजों को दवा ना होने के बारे में अवगत करवा रहे हैं। फिर भी मरीज खुद दाखिल हो रहे हैं। रविवार को भी एक मरीज दाखिल हुआ है।
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एक और मरीज का निकालना पड़ा जबड़ा
प्रो. डॉ. अनूप ग्रोवर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में रविवार को ओरल सर्जन टीम ने एक और मरीज का जबड़ा निकाला है। ओरल सर्जन डॉ. बंसीलाल की टीम ने दो मरीजों के जबड़ों के ऑपरेशन किए हैं और दोनों ही मरीज गंभीर हालत के हैं। फंगस फैलने के कारण मरीज को जबड़े में गलन शुरू हो गई थी, जिस कारण जबड़ा निकालने का फैसला लेना पड़ा। इससे पहले शनिवार को भी एक मरीज का जबड़ा निकाला गया था। इसके अलावा 5 से 6 मरीज और दाखिल हैं, जिनके जबड़ों में फंगस फैली हुई है।
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दवा न मिलने से अंदर ही अंदर फैल जाती है फंगस
चिकित्सकों के मुताबिक ब्लैक फंगस एक गंभीर बीमारी है। इसे रोकने के लिए ऑपरेशन ही एकमात्र उपाय है और मरीज का इलाज भी लंबा चलता है। इसलिए चिकित्सकों को भी मजबूरन ऑपरेशन करना पड़ता है। ऑपरेशन के बाद भी इंजेक्शन और दवा देनी पड़ती है। यदि मरीज को समय पर दवा नहीं मिले तो फंगस अंदर ही अंदर फैल जाती है। इसका ऑपरेशन करने के समय ही पता चल पाता है। यदि सोमवार तक भी दवा नहीं पहुंची तो मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन बंद हो सकते हैं।
रविवार को हुई दो मौत
फिलहाल मेडिकल कॉलेज के म्यूकरमाइकोसिस वार्ड में 79 मरीज दाखिल है। इनमें से 6 मरीज संदिग्ध हैं, जिनकी रिपोर्ट आना बाकी है। कुल मिलाकर ब्लैक फंगस मरीजों का आंकड़ा 196 हो गया है। इसके अलावा रविवार को मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के कारण 2 मरीजों की मौत हुई है। इनको मिलाकर ब्लैक फंगस से होने वाली मौत का आंकड़ा 43 हो गया है।
नेत्र रोग विभाग और ईएनटी विभाग की टीमों ने किए 12 ऑपरेशन
अस्पताल में रविवार को नेत्र रोग विभाग और ईएनटी विभाग की टीमों ने मिलकर 12 मरीजों के ऑपरेशन किए। इनमें से 5 मरीजों की आंखों में फंगस फैली हुई थी और सात मरीजों की नाक में फंगस फैलने की शुरुआत हुई थी। ऐसे में से शुरुआती दौर में ही ऑपरेशन कर फंगस निकाल दी है।

हमारे पास दवा नहीं
किसी भी मरीज को इलाज के लिए मना नहीं है, लेकिन हमारे पास दवा नहीं है। इस बारे में अपने मरीजों को भी अवगत करवा दिया है, ताकि वे अपना प्रबंध कर सकें। रविवार को भी हमने एक और मरीज दाखिल किया है। इस पर मरीज ने खुद सहमति जताई है। रविवार को दो मरीजों के जबड़ों के ऑपरेशन हुए हैं, जिनमें से एक का जबड़ा निकाला गया है। म्यूकरमाइकोसिस के दो मरीजों की मौत हुई है।
- डॉ. अनूप ग्रोवर, प्रोफेसर, दंत रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा।
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