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कौन सी मिठाई कब तक कर सकते हैं इस्तेमाल, नहीं लिख रहे दुकानदार
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हिसार। फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की ओर से जारी नई गाइडलाइन का ज्यादातर मिष्ठान भंडार के संचालक गंभीरता से पालन नहीं कर रहे। सोमवार को अमर उजाला टीम ने शहर की प्रमुख मिठाई दुकानों पर पड़ताल की। इस दौरान पता चला कि दुकानदार मिठाई कितने दिन तक इस्तेमाल कर सकते हैं, यह तिथि नहीं लिख रहे हैं।
एफएसएसएआई ने कुछ दिन पूर्व आदेश जारी कर मिठाई विक्रेताओं को कहा गया था कि अब मिठाई खुले में नहीं बेची जाएंगी। मिठाई पैक कर बेची जाएंगी और उस पर मैन्युफैक्चरिंग व एक्सपायरी डेट (निर्माण व मियाद खत्म होने की तिथि) दोनों लिखनी होंगी, लेकिन जिले के अधिकांश दुकानदार ऐसा नहीं कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि वे ग्राहकों को मुंहजुबानी बता रहे हैं कि मिठाई को कब तक इस्तेमाल कर सकते हैं।
बहाने बना रहे दुकानदार
अमर उजाला टीम ने सोमवार को कैंप चौक और दिल्ली रोड स्थित मिठाई की आठ दुकानों पर पता लगाया तो किसी भी दुकान पर निर्माण और उसकी मियाद खत्म होने की तिथि अंकित नहीं थी। डिब्बों पर मैन्युफैक्चरिंग या इस्तेमाल तिथि न होने के बारे में दुकानदारों से बात की गई तो सभी का एक ही जवाब था कि अभी कम मिठाई ही बना रहे हैं और जितनी बना रहे हैं, वह सब बिक जाती हैं। मिठाई बच ही नहीं रहीं, इसलिए इस्तेमाल तिथि अंकित नहीं कर रहे। दुकानदारों का यह भी कहना था कि त्योहारों से कुछ दिन पहले जब ज्यादा मिठाई बनाएंगे तो उन डिब्बों पर निर्माण व इस्तेमाल तिथि अंकित कर देंगे।
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कौन सी मिठाई, कब तक होगी खराब
एक दिन चलने वाली मिठाइयां : चॉकलेट कलाकंद, कलाकंद, बटर स्कॉच कलाकंद, रोज कलाकंद।
दो दिन चलने वाली मिठाइयां : दूध से बनीं मिठाइयां, रसगुल्ला, मिल्क बादाम, मलाई रोल, हरिभोग, रसकदम, गुड़ रसमलाई, रस मलाई, शाही टोस्ट, रबड़ी, रस काटा, खीर मोहन, बंगाली रबड़ी।
चार दिन चलने वाली मिठाइयां : केसर कोकोनट लड्डू, खीर कदम, मेवा भाटी, फ्रूट केक, मोतीचूर मोदक, पेड़ा, घेवर, तिल बुग्गा, सफेद पेड़ा, मिल्क बर्फी, खोवा बादाम, फ्रूट केक, बूंदी लड्डू, प्लेन बर्फी, कोकोनट बर्फी, लाल लड्डू।
सात दिन चलने वाली मिठाइयां : काजू कतली, बालूशाही, मूंग बर्फी, काजू केसर बर्फी, काजू लड्डू, बेसन बर्फी, काजू रोल, केसर गुजिया, मैदा गुजिया, काजू खजूर, पिस्ता लौंग।
30 दिन चलने वाली मिठाइयां : चना लड्डू, बेसन लड्डू, आटा लड्डू, कराची हलवा, सोन हलवा, गजक, चिक्की, अंजीर खजूर बर्फी।
किस कोर्ट में जाएगा केस, इस तरह होता है तय
सैंपल की रिपोर्ट तीन तरह से आती है। सब स्टैंडर्ड, मिसब्रांड और अनसेफ। अगर सैंपल रिपोर्ट सब स्टैंडर्ड या मिसब्रांड है तो उसका केस एडीसी कोर्ट में जाएगा। अगर अनसेफ है तो वह केस सीजेएम कोर्ट में जाएगा। सीजेएम कोर्ट में जो केस जाता है, उसमें जेल भी हो सकती है। सब स्टैंडर्ड रिपोर्ट तब आती है, जब खाद्य पदार्थ मापतोल के हिसाब से कम फैट वाला हो या लेबल न हो। मिसब्रांड रिपोर्ट तब आती है, जब खाद्य पदार्थ पर गाय, भैंस की फोटो हो, इस्तेमाल तिथि भी छोटे अक्षर में हो या लेबल न हो। अनसेफ की रिपोर्ट तब आती है, जब खाद्य पदार्थ में हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किया हो।
कार्रवाई की जाएगी
मिठाई विक्रेताओं और उनके प्रधानों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से बैठक कर निर्देश दिए गए हैं कि वे डिब्बों पर मैन्युफैक्चरिंग व एक्सपायरी डेट डालें। मंगलवार से विभाग की ओर से सघन जांच अभियान चलाया जाएगा। अगर किसी भी दुकानदार की ओर से मैन्युफैक्चरिंग या एक्सपायरी तारीख नहीं मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. अरविंदर जीत, खाद्य सुरक्षा अधिकारी।
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एफएसएसएआई ने कुछ दिन पूर्व आदेश जारी कर मिठाई विक्रेताओं को कहा गया था कि अब मिठाई खुले में नहीं बेची जाएंगी। मिठाई पैक कर बेची जाएंगी और उस पर मैन्युफैक्चरिंग व एक्सपायरी डेट (निर्माण व मियाद खत्म होने की तिथि) दोनों लिखनी होंगी, लेकिन जिले के अधिकांश दुकानदार ऐसा नहीं कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि वे ग्राहकों को मुंहजुबानी बता रहे हैं कि मिठाई को कब तक इस्तेमाल कर सकते हैं।
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बहाने बना रहे दुकानदार
अमर उजाला टीम ने सोमवार को कैंप चौक और दिल्ली रोड स्थित मिठाई की आठ दुकानों पर पता लगाया तो किसी भी दुकान पर निर्माण और उसकी मियाद खत्म होने की तिथि अंकित नहीं थी। डिब्बों पर मैन्युफैक्चरिंग या इस्तेमाल तिथि न होने के बारे में दुकानदारों से बात की गई तो सभी का एक ही जवाब था कि अभी कम मिठाई ही बना रहे हैं और जितनी बना रहे हैं, वह सब बिक जाती हैं। मिठाई बच ही नहीं रहीं, इसलिए इस्तेमाल तिथि अंकित नहीं कर रहे। दुकानदारों का यह भी कहना था कि त्योहारों से कुछ दिन पहले जब ज्यादा मिठाई बनाएंगे तो उन डिब्बों पर निर्माण व इस्तेमाल तिथि अंकित कर देंगे।
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कौन सी मिठाई, कब तक होगी खराब
एक दिन चलने वाली मिठाइयां : चॉकलेट कलाकंद, कलाकंद, बटर स्कॉच कलाकंद, रोज कलाकंद।
दो दिन चलने वाली मिठाइयां : दूध से बनीं मिठाइयां, रसगुल्ला, मिल्क बादाम, मलाई रोल, हरिभोग, रसकदम, गुड़ रसमलाई, रस मलाई, शाही टोस्ट, रबड़ी, रस काटा, खीर मोहन, बंगाली रबड़ी।
चार दिन चलने वाली मिठाइयां : केसर कोकोनट लड्डू, खीर कदम, मेवा भाटी, फ्रूट केक, मोतीचूर मोदक, पेड़ा, घेवर, तिल बुग्गा, सफेद पेड़ा, मिल्क बर्फी, खोवा बादाम, फ्रूट केक, बूंदी लड्डू, प्लेन बर्फी, कोकोनट बर्फी, लाल लड्डू।
सात दिन चलने वाली मिठाइयां : काजू कतली, बालूशाही, मूंग बर्फी, काजू केसर बर्फी, काजू लड्डू, बेसन बर्फी, काजू रोल, केसर गुजिया, मैदा गुजिया, काजू खजूर, पिस्ता लौंग।
30 दिन चलने वाली मिठाइयां : चना लड्डू, बेसन लड्डू, आटा लड्डू, कराची हलवा, सोन हलवा, गजक, चिक्की, अंजीर खजूर बर्फी।
किस कोर्ट में जाएगा केस, इस तरह होता है तय
सैंपल की रिपोर्ट तीन तरह से आती है। सब स्टैंडर्ड, मिसब्रांड और अनसेफ। अगर सैंपल रिपोर्ट सब स्टैंडर्ड या मिसब्रांड है तो उसका केस एडीसी कोर्ट में जाएगा। अगर अनसेफ है तो वह केस सीजेएम कोर्ट में जाएगा। सीजेएम कोर्ट में जो केस जाता है, उसमें जेल भी हो सकती है। सब स्टैंडर्ड रिपोर्ट तब आती है, जब खाद्य पदार्थ मापतोल के हिसाब से कम फैट वाला हो या लेबल न हो। मिसब्रांड रिपोर्ट तब आती है, जब खाद्य पदार्थ पर गाय, भैंस की फोटो हो, इस्तेमाल तिथि भी छोटे अक्षर में हो या लेबल न हो। अनसेफ की रिपोर्ट तब आती है, जब खाद्य पदार्थ में हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किया हो।
कार्रवाई की जाएगी
मिठाई विक्रेताओं और उनके प्रधानों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से बैठक कर निर्देश दिए गए हैं कि वे डिब्बों पर मैन्युफैक्चरिंग व एक्सपायरी डेट डालें। मंगलवार से विभाग की ओर से सघन जांच अभियान चलाया जाएगा। अगर किसी भी दुकानदार की ओर से मैन्युफैक्चरिंग या एक्सपायरी तारीख नहीं मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. अरविंदर जीत, खाद्य सुरक्षा अधिकारी।