{"_id":"63837a902d4efb441772c305","slug":"scheduled-caste-female-won-sarpanch-election-in-mirchpur-of-hisar","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar: जातीय हिंसा के 12 साल बाद मिर्चपुर में बनीं अनुसूचित महिला सरपंच, किया था अंतरजातीय विवाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar: जातीय हिंसा के 12 साल बाद मिर्चपुर में बनीं अनुसूचित महिला सरपंच, किया था अंतरजातीय विवाह
Sun, 27 Nov 2022 08:26 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौंद, हिसार (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौंद, हिसार (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sun, 27 Nov 2022 08:26 PM IST
सार
अंतरजातीय विवाह करने वाली रजनी को गांव की चौधर मिली है। बोलीं-गांव को आदर्श बनाने के लिए काम करूंगी। रजनी ने नारनौंद खंड में 1628 वोटों से सबसे बड़ी जीत दर्ज की है, उन्हें 2987 वोट मिले।
विज्ञापन
मिर्चपुर से विजेता प्रत्याशी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिसार के नारनौंद क्षेत्र के गांव मिर्चपुर में जातीय हिंसा के 12 साल बाद पहली बार अनुसूचित वर्ग की महिला गांव की सरपंच बनी हैं। रजनी (24) वर्ष 2017 में अंतरजातीय विवाह कर दुल्हन बनकर गांव मिर्चपुर में आई थीं। नवनिर्वाचित सरपंच रजनी ने कहा कि अतीत में बदनाम हुए मिर्चपुर को आदर्श ग्राम बनाने के लक्ष्य को लेकर काम करूंगी।
विज्ञापन
नारनौंद खंड की सबसे बड़ी जीत की दर्ज
गांव में सरपंच का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित था। रजनी ने नारनौंद खंड में 1628 वोटों से सबसे बड़ी जीत दर्ज की है, उन्हें 2987 वोट मिले। उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी अनीता को 1359 वोट मिले। गांव में 7113 मतदाता हैं। रजनी ने कहा कि वह गांव में भाईचारा बनाने और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर तलाशेंगी। मिर्चपुर गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने के लिए प्रयास करेंगे। खेतों से बारिश के पानी की निकासी सहित गांव कई समस्याओं का सामना कर रहा है।
विज्ञापन
सरपंच का चुनाव लड़ने वाली 9 उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी चेतना ने कहा कि रजनी को ऊंची जाति के परिवार में शादी करने का फायदा मिला। प्रत्याशी रही रीना के पति रूपेश ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताई, जिसमें एक अनुसूचित जाति की महिला को उच्च जाति के युवक से शादी करने के बाद भी आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाती है। गांव में हिंसा के बाद बनी शांति समिति के सदस्य मास्टर चंद्रप्रकाश ने कहा कि उन्होंने अतीत को पीछे छोड़ दिया है। अब गांव में पूर्ण सद्भाव है।
विज्ञापन
मिर्चपुर हिंसा प्रकरण में 20 अभियुक्तों को सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा
याद रहे कि अप्रैल 2010 में गांव मिर्चपुर जातिगत हिंसा के कारण सुर्खियों में आया था। एक कुत्ते की पिटाई के मामले को लेकर अनुसूचित वर्ग के दो लोगों को भीड़ ने पीटा और उनके घरों में आग लगाकर उन्हें जिंदा जला दिया था। इसके बाद हिंसा प्रभावित करीब 250 परिवारों ने गांव छोड़ दिया था।
कई साल बाद इन परिवारों को हिसार शहर के पास प्लाट देकर दीनदयालपुरम में बसाया गया है। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंसा के लिए 20 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में अभियुक्त पक्ष के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है।