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सविता दूसरी तो उदिता-शर्मिला पहली बार दिखाएगी हॉकी स्टिक का जादू
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हिसार। टोक्यो ओलंपिक के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम में हिसार की उदिता, शर्मिला के अलावा सिरसा के जोधका गांव की रहने वाली सविता पूनिया का चयन हुआ है। ओलंपिक के लिए टीम में चयन होने पर खिलाड़ियों के परिवार में खुशी का माहौल है। सविता पूनिया ने दूसरी बार ओलंपिक का टिकट कटवाया है, वहीं न्यू पुलिस लाइन की रहने वाली उदिता और कैमरी निवासी शर्मिला पहली बार ओलंपिक में हॉकी स्टिक का जादू दिखाएंगी।
ओलंपिक में शामिल होने वाली भारतीय टीम में सविता पूनिया वाइस कैप्टन होंगी। सीनियर हॉकी कोच आजाद मलिक का कहना है कि काफी खुशी की बात है कि हिसार ग्राउंड पर अभ्यास करने वाले खिलाड़ी ओलंपिक में खेलेंगे। इससे अन्य खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी। वहीं खिलाड़ियों का ओलंपिक के लिए चयन होने पर हॉकी हिसार के पदाधिकारियों, उमरा गर्ल्स हॉकी की ओर से बधाई दी गई।
सविता पूनिया ने हिसार से की थी शुरुआत
सविता पूनिया के पिता महेंद्र सिंह ने बताया कि बेटी सविता ने हिसार ग्राउंड से ही हॉकी की शुरुआत की थी। यहां ग्राउंड पर अभ्यास कर वह इंटरनेशनल स्तर पर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि जब भी सविता हिसार आती है तो वह हिसार हॉकी ग्राउंड पर ही अभ्यास करती है। साथ ही जूनियर खिलाड़ियों को हॉकी की बारीकियां सिखाती हैं।
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स्कूूल मैदान में लड़कियों को खेलते देख उदिता ने थामी थी हॉकी
महिला खिलाड़ी उदिता बताती है कि उन्होंने सातवीं कक्षा से ही हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। पहले उन्होंने स्कूल में हैंडबाल खेलना शुरू किया, लेकिन कोच नहीं था। इसके बाद एक दिन उन्होंने स्कूल मैदान में लड़कियों को हॉकी खेलते देखा तो हॉकी खेलने की ठान ली। अब उदिता की निगाह ओलंपिक में गोल्ड मेडल पर है।
बीमारी ने छीना पिता का साया
खिलाड़ी उदिता के पिता जसबीर सिंह हरियाणा पुलिस में ईएसआई के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2015 में बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। ऐसे में उदिता अपने पिता का सपना पूरा नहीं कर पाई। वहीं उदिता की माता गीता देवी का कहना मुझे बेटी पर गर्व है। अब बेटी ओलंपिक खेलेगी, इससे बड़ी मेरे लिए कोई खुशी नहीं। गीता देवी ने बताया कि उनके पास दोपहर बाद कोच आजाद मलिक और बेटी उदिता का फोन आया और ओलंपिक के लिए नाम फाइनल होने की बात कही तो परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं था। उम्मीद है कि बेटी ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतेगी।
किसान परिवार में जन्मी शर्मिला
शर्मिला जब कैमरी के प्राइमरी स्कूल में पढ़ती थी तो उस समय प्रवीण सिहाग डीपी के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने ही शर्मिला को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। आज शर्मिला हॉकी में पदक लाकर देश का नाम रोशन करने के साथ अन्य बेटियों के लिए प्रेरणादायक बन गई है। जब भी शर्मिला हिसार आती है तो प्रवीण सिहाग उन्हें हॉकी का अभ्यास करवाती हैं। वह खुद राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रह चुकी हैं। शर्मिला ने बताया कि पिछले दो-तीन साल से सोनीपत हॉकी एकेडमी में रहकर सोनीपत से ही खेल रही थी। शर्मिला के पिता सुरेश गोदारा किसान हैे और माता संतोष गृहिणी।
अब प्रैक्टिस पर रहेगा फोकस : शर्मिला
शर्मिला ने बताया कि फिलहाल वह कैंप में ही अभ्यास करेंगे। ओलंपिक की तैयारी के लिए वह सुबह-शाम चार घंटे अभ्यास करेंगे। साथ ही फिटनेस का भी ध्यान रखेंगे। शर्मिला का ओलंपिक के लिए चयन होने पर परिवार में खुशी का माहौल बना हुआ है।
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ओलंपिक में शामिल होने वाली भारतीय टीम में सविता पूनिया वाइस कैप्टन होंगी। सीनियर हॉकी कोच आजाद मलिक का कहना है कि काफी खुशी की बात है कि हिसार ग्राउंड पर अभ्यास करने वाले खिलाड़ी ओलंपिक में खेलेंगे। इससे अन्य खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी। वहीं खिलाड़ियों का ओलंपिक के लिए चयन होने पर हॉकी हिसार के पदाधिकारियों, उमरा गर्ल्स हॉकी की ओर से बधाई दी गई।
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सविता पूनिया ने हिसार से की थी शुरुआत
सविता पूनिया के पिता महेंद्र सिंह ने बताया कि बेटी सविता ने हिसार ग्राउंड से ही हॉकी की शुरुआत की थी। यहां ग्राउंड पर अभ्यास कर वह इंटरनेशनल स्तर पर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि जब भी सविता हिसार आती है तो वह हिसार हॉकी ग्राउंड पर ही अभ्यास करती है। साथ ही जूनियर खिलाड़ियों को हॉकी की बारीकियां सिखाती हैं।
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स्कूूल मैदान में लड़कियों को खेलते देख उदिता ने थामी थी हॉकी
महिला खिलाड़ी उदिता बताती है कि उन्होंने सातवीं कक्षा से ही हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। पहले उन्होंने स्कूल में हैंडबाल खेलना शुरू किया, लेकिन कोच नहीं था। इसके बाद एक दिन उन्होंने स्कूल मैदान में लड़कियों को हॉकी खेलते देखा तो हॉकी खेलने की ठान ली। अब उदिता की निगाह ओलंपिक में गोल्ड मेडल पर है।
बीमारी ने छीना पिता का साया
खिलाड़ी उदिता के पिता जसबीर सिंह हरियाणा पुलिस में ईएसआई के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2015 में बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। ऐसे में उदिता अपने पिता का सपना पूरा नहीं कर पाई। वहीं उदिता की माता गीता देवी का कहना मुझे बेटी पर गर्व है। अब बेटी ओलंपिक खेलेगी, इससे बड़ी मेरे लिए कोई खुशी नहीं। गीता देवी ने बताया कि उनके पास दोपहर बाद कोच आजाद मलिक और बेटी उदिता का फोन आया और ओलंपिक के लिए नाम फाइनल होने की बात कही तो परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं था। उम्मीद है कि बेटी ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतेगी।
किसान परिवार में जन्मी शर्मिला
शर्मिला जब कैमरी के प्राइमरी स्कूल में पढ़ती थी तो उस समय प्रवीण सिहाग डीपी के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने ही शर्मिला को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। आज शर्मिला हॉकी में पदक लाकर देश का नाम रोशन करने के साथ अन्य बेटियों के लिए प्रेरणादायक बन गई है। जब भी शर्मिला हिसार आती है तो प्रवीण सिहाग उन्हें हॉकी का अभ्यास करवाती हैं। वह खुद राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रह चुकी हैं। शर्मिला ने बताया कि पिछले दो-तीन साल से सोनीपत हॉकी एकेडमी में रहकर सोनीपत से ही खेल रही थी। शर्मिला के पिता सुरेश गोदारा किसान हैे और माता संतोष गृहिणी।
अब प्रैक्टिस पर रहेगा फोकस : शर्मिला
शर्मिला ने बताया कि फिलहाल वह कैंप में ही अभ्यास करेंगे। ओलंपिक की तैयारी के लिए वह सुबह-शाम चार घंटे अभ्यास करेंगे। साथ ही फिटनेस का भी ध्यान रखेंगे। शर्मिला का ओलंपिक के लिए चयन होने पर परिवार में खुशी का माहौल बना हुआ है।