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रोचक मामला: 67 साल पुराना कर्ज चुकाने अमेरिका से हरियाणा पहुंचे रिटायर्ड नौसेना कॉमोडोर, 28 रुपये लिए थे उधार
Fri, 03 Dec 2021 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Dec 2021 11:54 PM IST
सार
रिटायर्ड नौसेना कॉमोडोर बीएस उप्पल अमेरिका से हरियाणा के हिसार पहुंचे। उन्होंने 1954 में एक दुकान पर दही और पेड़े खाए थे। जिसके 28 रुपये बकाया रह गए थे।
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दुकान संचालक विनय बंसल को उधारी चुकाते बीएस उप्पल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
नौसेना बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित होने वाले रिटायर्ड नौसेना कॉमोडोर बीएस उप्पल अमेरिका से हरियाणा के हिसार पहुंचे। वे यहां मोती बाजार स्थित दिल्ली वाला हलवाई के पास आए थे। उन्होंने दुकान के स्वामी विनय बंसल को बताया कि तुम्हारे दादा शम्भू दयाल बंसल को मैंने 1954 में 28 रुपये देने थे, परंतु मुझे अचानक शहर से बाहर जाना पड़ गया। उसके बाद मैं नौसेना में भर्ती हो गया। फिर हिसार आना नहीं हो पाया।
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सेवानिवृत्ति के बाद बेटे के साथ अमेरिका रहने लगा। वहां मुझे हिसार की दो बातें हमेशा याद रहती थीं। एक तो आपके दादा जी के 28 रुपये देने थे। दूसरा, मैं हरजीराम हिन्दू हाई स्कूल में दसवीं पास करने के बाद नहीं जा सका था। वहां जाने की मेरी इच्छा थी। आपकी दुकान पर मैं दही की लस्सी में पेड़े डालकर पीता था। जिसके 28 रुपये बकाया रह गए थे। आप की राशि का उधार चुकाने और अपनी शिक्षण संस्था को देखने के लिए विशेष रूप से हिसार में आया हूं।
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बीएस उप्पल ने विनय बंसल के हाथ में दस हजार की राशि रखी तो उन्होंने लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने आग्रह करते हुए कहा कि मेरे सिर पर आपकी दुकान का ऋण बकाया है, इस ऋण के लिए कृपया यह राशि स्वीकार कर लो। मैं अमेरिका से विशेष रूप से इस कार्य के लिए आया हूं। मेरी उम्र 85 साल हो चुकी है। उस समय की यह राशि आज इतनी तो हो गई होगी, इस कारण मैं यह राशि देना चाहता हूं।
तब विनय बंसल ने राशि को स्वीकार किया। रिटायर्ड नौसेना कॉमोडोर बीएस उप्पल बाद में हरजीराम स्कूल में गए। बंद स्कूल को देखकर वे निराश लौट आए। बता दें बीएस उप्पल उस पनडुब्बी के कमोडोर थे, जिसने भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान के जहाज को डुबो दिया था। अपनी पनडुब्बी और नौसैनिकों को सुरक्षित ले आए थे। इस बहादुरी के लिए भारतीय सेना ने उन्हें बहादुरी के नौसेना पुरस्कार से सम्मानित किया था।