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बिना गर्भपात लौटी, मुआवजा के लिए कोर्ट में लगाई अर्जी
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
Updated Thu, 02 Oct 2014 12:13 AM IST
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बरवाला क्षेत्र में आठवीं कक्षा की छात्रा के साथ हुए दुराचार व गर्भवती होने के मामले में पीड़ित पक्ष के वकीलों ने सेशन कोर्ट में मुआवजे की अर्जी लगाई है। सेशन कोर्ट ने इस मामले को एडीजे कोर्ट में भेज दिया है। कोर्ट ने मामले में 6 अक्तूबर की तारीख दी है।
पीड़िता के केस की पैरवी कर रहे वकीलों का कहना है कि अदालत ने मामले में राज्य सरकार की ओर से इस पर पक्ष रखा जाएगा। वहीं, 14 वर्षीय किशोरी का कोर्ट के आदेश के बावजूद गर्भपात नहीं होने की वजह से उसके भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। डॉक्टरों का तर्क है कि किशोरी का गर्भ 24 सप्ताह का हो चुका है, जबकि 20 सप्ताह तक के गर्भ को ही गिराया जा सकता है।
पीड़िता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल और विक्रम मित्तल ने अर्जी लगाई है कि पीड़िता एवं उसके परिवार को मुआवजा मिलना चाहिए। वकीलों ने अर्जी के माध्यम से कहा है कि इस मामले के बाद पीड़िता व उसका परिवार मानसिक, आर्थिक व सामाजिक रूप से टूट चुका है।
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नाबालिग बच्ची की पढ़ाई खराब हो रही है। विशेषकर पीड़ित नाबालिग को शारीरिक और मानसिक परेशानी उठानी पड़ रही है। वकीलों की तरफ से कहा गया है कि पीड़िता को अंतरिम मुआवजा तुरंत दिलवाया जाए। पीड़िता के परिवार की आर्थिक हालत ऐसी नहीं है कि उसकी अच्छे तरीके से देखभाल की जा सके।
कितना मुआवजा चाहिए, इसका नहीं जिक्र
अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल व विक्रम मित्तल ने सेशन कोर्ट में मुआवजे के लिए जो अर्जी लगाई है, उसमें पोक्सो एक्ट 2012 के सेक्शन का हवाला दिया है। हालांकि इसमें पीड़ित पक्ष को कितना मुआवजा दिया जाए, इसकी कोई राशि नहीं लिखी है।
पीड़िता की अस्पताल से छुट्टी
पीड़ित पक्ष ने अस्पताल से नाबालिग को छुट्टी दिलवा दी है। परिजनों का कहना है कि उनकी आर्थिक हालात नाजुक है। पीड़िता का पिता अस्पताल में उसके साथ 15 दिन से रह रहा था। घर में कोई कमाने वाला नहीं है। दूसरा वे नाबालिग का गर्भपात नहीं होेने की वजह से भी हताश हैं।
यह है मामला
17 सितंबर को बरवाला क्षेत्र के एक गांव की 8वीं कक्षा की छात्रा ने अपने पड़ोसी 55 वर्षीय निहाल सिंह पर दुराचार करने व जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। पीड़ित छात्रा का आरोप था कि निहाल सिंह पिछले छह महीने से उसके साथ दुराचार कर रहा है।
बरवाला पुलिस ने आरोपी निहाल सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। पीड़ित लड़की ने जब अपने परिजनों को पेट दर्द होने की शिकायत बताई, तो डाक्टरों द्वारा जांच में नाबालिग के गर्भवती होने का पता चला। उसके बाद कोर्ट से गर्भपात की अनुमति ली गई।
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पीड़िता के केस की पैरवी कर रहे वकीलों का कहना है कि अदालत ने मामले में राज्य सरकार की ओर से इस पर पक्ष रखा जाएगा। वहीं, 14 वर्षीय किशोरी का कोर्ट के आदेश के बावजूद गर्भपात नहीं होने की वजह से उसके भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। डॉक्टरों का तर्क है कि किशोरी का गर्भ 24 सप्ताह का हो चुका है, जबकि 20 सप्ताह तक के गर्भ को ही गिराया जा सकता है।
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पीड़िता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल और विक्रम मित्तल ने अर्जी लगाई है कि पीड़िता एवं उसके परिवार को मुआवजा मिलना चाहिए। वकीलों ने अर्जी के माध्यम से कहा है कि इस मामले के बाद पीड़िता व उसका परिवार मानसिक, आर्थिक व सामाजिक रूप से टूट चुका है।
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नाबालिग बच्ची की पढ़ाई खराब हो रही है। विशेषकर पीड़ित नाबालिग को शारीरिक और मानसिक परेशानी उठानी पड़ रही है। वकीलों की तरफ से कहा गया है कि पीड़िता को अंतरिम मुआवजा तुरंत दिलवाया जाए। पीड़िता के परिवार की आर्थिक हालत ऐसी नहीं है कि उसकी अच्छे तरीके से देखभाल की जा सके।
कितना मुआवजा चाहिए, इसका नहीं जिक्र
अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल व विक्रम मित्तल ने सेशन कोर्ट में मुआवजे के लिए जो अर्जी लगाई है, उसमें पोक्सो एक्ट 2012 के सेक्शन का हवाला दिया है। हालांकि इसमें पीड़ित पक्ष को कितना मुआवजा दिया जाए, इसकी कोई राशि नहीं लिखी है।
पीड़िता की अस्पताल से छुट्टी
पीड़ित पक्ष ने अस्पताल से नाबालिग को छुट्टी दिलवा दी है। परिजनों का कहना है कि उनकी आर्थिक हालात नाजुक है। पीड़िता का पिता अस्पताल में उसके साथ 15 दिन से रह रहा था। घर में कोई कमाने वाला नहीं है। दूसरा वे नाबालिग का गर्भपात नहीं होेने की वजह से भी हताश हैं।
यह है मामला
17 सितंबर को बरवाला क्षेत्र के एक गांव की 8वीं कक्षा की छात्रा ने अपने पड़ोसी 55 वर्षीय निहाल सिंह पर दुराचार करने व जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। पीड़ित छात्रा का आरोप था कि निहाल सिंह पिछले छह महीने से उसके साथ दुराचार कर रहा है।
बरवाला पुलिस ने आरोपी निहाल सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। पीड़ित लड़की ने जब अपने परिजनों को पेट दर्द होने की शिकायत बताई, तो डाक्टरों द्वारा जांच में नाबालिग के गर्भवती होने का पता चला। उसके बाद कोर्ट से गर्भपात की अनुमति ली गई।