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इस दशहरा बिना आतिशबाजी अकेला जलेगा रावण का अहंकार
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रावण का पुतला तैयार करता प्रमोद शर्मा। संवाद
- फोटो : Hisar
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हिसार। कोरोना के कारण इस बार दशहरे पर राजकीय कॉलेज मैदान में अकेले रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। पुतले में कोई आतिशबाजी नहीं लगाई जाएगी। मैदान में जगह के अभाव को देखते हुए इस बार कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन नहीं होगा। वहीं, रावण के पुतले का कद भी 50 फुट से घटाकर 25 फुट किया गया है।
कारीगर प्रमोद शर्मा रावण का पुतला तैयार कर रहा है। पहले एक पुतला करीब 50 हजार रुपये में तैयार होता था। तीन पुतलों पर डेढ़ लाख खर्च आता था। आतिशबाजी पर भी एक लाख के करीब खर्च होते थे। इस बार महज 25 हजार रुपये में काम चल जाएगा।
पटाखों पर पाबंदी होने के कारण इस बार आातिशबाजी नहीं करने का फैसला लिया गया है। राजकीय कॉलेज मैदान में दशहरा पर्व पर सिर्फ रावण का पुतला दहन होगा। जगह के अभाव को देखते हुए ऐसा किया जा रहा है। - सूर्या गोयल, मीडिया प्रभारी, श्री रामलीला कमेटी कटला मंचन-2021
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39 साल से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले बना रहे प्रमोद शर्मा
हिसार के रहने वाले प्रमोद शर्मा पिछले 39 साल से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले तैयार करते आ रहे हैं। पिछले साल दशहरा को छोड़कर हर साल उनके पास 15 से ज्यादा पुतले बनाने के ऑर्डर आते हैं। इतना ही नहीं, उनके द्वारा तैयार किए गए पुतले हिसार के अलावा भादरा, सिवानी, भूना, भट्टू जाते हैं। मगर इस बार सिर्फ रामलीला कमेटी कटला की ओर से एक ही रावण का पुतला बनाने का आर्डर आया है। प्रमोद शर्मा ने बताया कि इस बार पुतले का ऑर्डर नहीं आने पर उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
प्रमोद शर्मा बताते हैं कि 1960 में पिता स्वर्गीय रामगोपाल ने पुतले बनाने शुरू किए थे। सन 1982 में उनका निधन हो गया। पिता की कलाकारी को जिंदा रखने के लिए उन्होंने पुतले बनाने का काम जारी रखा। प्रमोद शर्मा अपने बेटे अनुज की मदद से पुतले तैयार करते हैं।
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कारीगर प्रमोद शर्मा रावण का पुतला तैयार कर रहा है। पहले एक पुतला करीब 50 हजार रुपये में तैयार होता था। तीन पुतलों पर डेढ़ लाख खर्च आता था। आतिशबाजी पर भी एक लाख के करीब खर्च होते थे। इस बार महज 25 हजार रुपये में काम चल जाएगा।
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पटाखों पर पाबंदी होने के कारण इस बार आातिशबाजी नहीं करने का फैसला लिया गया है। राजकीय कॉलेज मैदान में दशहरा पर्व पर सिर्फ रावण का पुतला दहन होगा। जगह के अभाव को देखते हुए ऐसा किया जा रहा है। - सूर्या गोयल, मीडिया प्रभारी, श्री रामलीला कमेटी कटला मंचन-2021
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39 साल से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले बना रहे प्रमोद शर्मा
हिसार के रहने वाले प्रमोद शर्मा पिछले 39 साल से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले तैयार करते आ रहे हैं। पिछले साल दशहरा को छोड़कर हर साल उनके पास 15 से ज्यादा पुतले बनाने के ऑर्डर आते हैं। इतना ही नहीं, उनके द्वारा तैयार किए गए पुतले हिसार के अलावा भादरा, सिवानी, भूना, भट्टू जाते हैं। मगर इस बार सिर्फ रामलीला कमेटी कटला की ओर से एक ही रावण का पुतला बनाने का आर्डर आया है। प्रमोद शर्मा ने बताया कि इस बार पुतले का ऑर्डर नहीं आने पर उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
प्रमोद शर्मा बताते हैं कि 1960 में पिता स्वर्गीय रामगोपाल ने पुतले बनाने शुरू किए थे। सन 1982 में उनका निधन हो गया। पिता की कलाकारी को जिंदा रखने के लिए उन्होंने पुतले बनाने का काम जारी रखा। प्रमोद शर्मा अपने बेटे अनुज की मदद से पुतले तैयार करते हैं।