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Hisar News: हरियाली अमावस्या पर बनेंगे दुर्लभ संयोग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2026 01:24 AM IST
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Rare celestial alignments to occur on Hariyali Amavasya.

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हिसार। सावन मास की हरियाली अमावस्या इस बार कई शुभ संयोग लेकर आ रही है। धार्मिक दृष्टि से यह तिथि स्नान-दान, पितरों के तर्पण, नवग्रह शांति और भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार हरियाली अमावस्या की शुरुआत 11 अगस्त की रात 1:54 बजे होगी जो 12 अगस्त की रात 11:07 बजे तक रहेगी। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार 12 अगस्त को ही हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी।


पंडित श्याम ने बताया कि हरियाली अमावस्या पर पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ में स्नान करने के बाद दान-पुण्य और पितरों का तर्पण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सावन मास में पड़ने के कारण इस दिन भगवान शिव की आराधना का महत्व भी बढ़ जाता है। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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पितरों के तर्पण के लिए विशेष दिन

हरियाली अमावस्या को पितृकर्म के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है। जिन लोगों के परिवार में किसी पूर्वज का श्राद्ध या तर्पण करना बाकी रह गया हो वे इस दिन विधि-विधान से तर्पण कर सकते हैं। पितरों की शांति के लिए जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। अमावस्या तिथि पर किए गए दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन अन्न, वस्त्र, फल और सामर्थ्य के अनुसार धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही पौधरोपण और पेड़-पौधों की सेवा को भी हरियाली अमावस्या पर शुभ माना जाता है।
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शिव आराधना से मिलेगा विशेष फल

सावन के अंतिम चरण में आने वाली हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल मिलने की मान्यता है। श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर में जाकर जल और पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का पूजन किया जा सकता है। घर में भी शिव मंत्रों का जाप और दीप प्रज्वलित कर पूजा कर सकते हैं।
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