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Hisar News: हिसार जिले में 30 हजार एकड़ में लगाई जाएंगी दलहन व हरी खाद वाली फसलें
Fri, 13 Mar 2026 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Fri, 13 Mar 2026 11:13 PM IST
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हिसार। प्रदेश में मिट्टी की सेहत सुधारने, खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से दलहन और हरी खाद (ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग) की फसलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत वर्ष 2026 के लिए राज्य स्तर पर दलहन फसलों की बुवाई का लक्ष्य 4.5 लाख एकड़ रखा गया है जिसमें हिसार जिले के लिए 30 हजार एकड़ का लक्ष्य तय किया गया है। इस योजना में शामिल होने वाले किसानों को 1,000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजबीर सिंह ने बताया कि दलहन फसलें न केवल पोषण सुरक्षा प्रदान करती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मददगार होती हैं। ये फसलें वायुमंडल से नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी में उपलब्ध कराती हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है और किसानों की लागत में कमी आती है। उन्होंने बताया कि मूंग, मोठ, उड़द, अरहर और लोबिया जैसी दलहन फसलें खरीफ मौसम में आसानी से उगाई जा सकती हैं।
डॉ. राजबीर सिंह ने आगे बताया कि ढैंचा, सनई, मूंग और लोबिया जैसी हरी खाद के लिए अत्यंत उपयोगी फसलें हैं, जिन्हें फसल चक्र में शामिल करने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और अगली फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। इन फसलों को खेतों में पलटने से जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है, भूमि की संरचना में सुधार होता है, और जल धारण क्षमता भी बढ़ती है।
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16 अप्रैल से 15 मई तक होगा सत्यापन
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पंजीकरण के लिए किसानों को मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपनी फसल का पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। पंजीकरण के बाद विभागीय योजनाओं के तहत प्रमाणित बीजों पर अनुदान और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। योजना का लाभ उठाने के लिए किसान 15 अप्रैल तक पंजीकरण करा सकते हैं और सत्यापन 16 अप्रैल से 15 मई तक होगा। सत्यापन प्रक्रिया के बाद किसानों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। किसान अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि विकास अधिकारी या कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजबीर सिंह ने बताया कि दलहन फसलें न केवल पोषण सुरक्षा प्रदान करती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मददगार होती हैं। ये फसलें वायुमंडल से नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी में उपलब्ध कराती हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है और किसानों की लागत में कमी आती है। उन्होंने बताया कि मूंग, मोठ, उड़द, अरहर और लोबिया जैसी दलहन फसलें खरीफ मौसम में आसानी से उगाई जा सकती हैं।
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डॉ. राजबीर सिंह ने आगे बताया कि ढैंचा, सनई, मूंग और लोबिया जैसी हरी खाद के लिए अत्यंत उपयोगी फसलें हैं, जिन्हें फसल चक्र में शामिल करने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और अगली फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। इन फसलों को खेतों में पलटने से जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ती है, भूमि की संरचना में सुधार होता है, और जल धारण क्षमता भी बढ़ती है।
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16 अप्रैल से 15 मई तक होगा सत्यापन
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पंजीकरण के लिए किसानों को मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपनी फसल का पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। पंजीकरण के बाद विभागीय योजनाओं के तहत प्रमाणित बीजों पर अनुदान और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। योजना का लाभ उठाने के लिए किसान 15 अप्रैल तक पंजीकरण करा सकते हैं और सत्यापन 16 अप्रैल से 15 मई तक होगा। सत्यापन प्रक्रिया के बाद किसानों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। किसान अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी कृषि विकास अधिकारी या कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।