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इधर रामायण धरने पर बैठे आंदोलनकारी की तबीयत बिगड़ी
amarujala/Hisar
Updated Sun, 05 Mar 2017 12:58 AM IST
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रामायण में जाट आरक्षण को लेकर जारी धरने पर बैठे एक आंदोलनकारी की शनिवार को तबीयत बिगड़ गई। उसे उपचार के लिए शहर के नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों ने उनकी हालात को देखते हुए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया है। तबीयत बिगड़ने वाले आंदोलनकारी की पहचान बडाला निवासी साधूराम के रूप में हुई है। जिला प्रधान कृष्ण किरमारा ने बताया कि साधूराम को छाती में दर्द हुआ था, जिसके चलते उन्हें एंबुलेंस की सहायता से उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
उधर जाट आरक्षण संघर्ष समिति का 35 वें दिन रामायण में धरना जारी रहा। आंदोलनकारियों ने धरने पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। धरना स्थल पर प्रदेश सचिव महेंद्र पूनिया ने कहा कि सरकार बार बार कह रही है कि बातचीत के लिए दरवाजे खुले हैं मगर कौन से दरवाजे खुुले हैं हमें तो कोई दरवाजा दिखाई नहीं दे रहा। क्योंकि हमारे पास कोई न्योता नहीं है। आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार के कुछ एजेंट आंदोलन को बांटना चाहते हैं मगर हम इन्हें अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होने देंगे।
जाट नेताओं ने कहा कि सरकार ने पहले भी आंदोलन फेल करने की साजिश की थी मगर कामयाबी नहीं मिली। वक्ताओं ने कहा कि कुछ लोग संघर्ष समिति को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रैक रोकने वालों से उनका कोई लेना देना नहीं सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। वे तो 20 मार्च को दिल्ली में डंके की चोट पर शक्ति प्रदर्शन करेंगे।
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उधर जाट आरक्षण संघर्ष समिति का 35 वें दिन रामायण में धरना जारी रहा। आंदोलनकारियों ने धरने पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। धरना स्थल पर प्रदेश सचिव महेंद्र पूनिया ने कहा कि सरकार बार बार कह रही है कि बातचीत के लिए दरवाजे खुले हैं मगर कौन से दरवाजे खुुले हैं हमें तो कोई दरवाजा दिखाई नहीं दे रहा। क्योंकि हमारे पास कोई न्योता नहीं है। आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार के कुछ एजेंट आंदोलन को बांटना चाहते हैं मगर हम इन्हें अपने मंसूबों में कामयाब नहीं होने देंगे।
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जाट नेताओं ने कहा कि सरकार ने पहले भी आंदोलन फेल करने की साजिश की थी मगर कामयाबी नहीं मिली। वक्ताओं ने कहा कि कुछ लोग संघर्ष समिति को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रैक रोकने वालों से उनका कोई लेना देना नहीं सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। वे तो 20 मार्च को दिल्ली में डंके की चोट पर शक्ति प्रदर्शन करेंगे।
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