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प्रॉपर्टी टैक्स बिल : पहली बार में नहीं आई एक भी एजेंसी, अब दोबारा लगाया जाएगा टेंडर
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हिसार। शहर में प्रॉपर्टी टैक्स बिल बंटवाने को लेकर नगर निगम की तरफ से लगाए टेंडर में एक भी एजेंसी ने आवेदन नहीं किया। अब निगम प्रशासन की तरफ से दोबारा से टेंडर लगाया जाएगा। इस बार शॉर्ट नोटिस पीरियड का टेंडर लगाया जाएगा।
बता दें कि यूं तो प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे से लेकर बिल बांटने तक की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार ने याशी कंसल्टेंसी को दी गई है। कंपनी की तरफ से शहर में सर्वे पूरा किया जा चुका है। मगर अभी तक उक्त कंपनी ने न तो सर्वे को फाइनल किया है और न ही बिल बांटने का काम। इसी को देखते हुए निगम प्रशासन ने किसी अन्य एजेंसी से प्रॉपर्टी टैक्स बिल बंटवाने का फैसला किया। इसी को लेकर पिछले दिनों से निगम ने इस कार्य का टेंडर लगाकर एजेंसियों से आवेदन आमंत्रित किए थे। मगर एक भी एजेंसी ने इस काम में अपनी रुचि नहीं दिखाई।
पहली बार प्रॉपर्टी टैक्स बिल में डेवलपमेंट व यूजर चार्जिज भी जुड़कर आएंगे
नगर निगम की मानें तो इस बार प्रॉपर्टी टैक्स बिल में डेवलपमेंट व यूजर चार्जिज भी जुड़कर आएंगे। निगम का तर्क है कि शहरवासी कई वर्षों से डेवलपमेंट व यूजर चार्जिज जमा नहीं करा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक शहर में करीब 1.40 लाख प्रॉपर्टी हैं, जिनके मालिकों को प्रॉपर्टी टैक्स बिल भेजे जाएंगे। जिस एजेंसी को यह टेंडर मिलेगा, उसे 60 दिन के अंदर यह काम पूरा करना होगा। साथ ही उसे प्रॉपर्टी टैक्स भरने के लिए मोड़ भी तैयार करना होगा ताकि शहरवासी गूगल पे, पेटीएम के माध्यम से घर बैठकर ही बिल भर सकें और उन्हें कार्यालय के चक्कर काटने न पड़े।
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याशी के बिल से काटी जाएगी राशि
चूंकि बिल बांटने की जिम्मेदारी याशी कंपनी की है। ऐसे में अगर अन्य एजेंसी से बिल बंटवाने का कार्य किया जाएगा तो उस पर आने वाले खर्च को याशी के बिल से काट लिया जाएगा। इस बारे में निगम प्रशासन ने मुख्यालय को भी अवगत करा दिया है।
लक्ष्य : 24 करोड़ में से अभी तक 4.75 करोड़ ही हुए जमा
निगम ने इस वित्त वर्ष में प्रॉपर्टी टैक्स का टारगेट 24 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। मगर अभी तक निगम में करीब 4.75 करोड़ रुपये ही टैक्स के रूप में जमा हुए है। निगम के अनुसार अगर प्रॉपर्टी टैक्स बिल बंटते हैं तो लोग ज्यादा संख्या में अपना टैक्स जमा करवाएंगे। लोगों की एक धारणा है कि जब तक बिल नहीं मिलता, तब तक वह उसकी भुगतान नहीं करते।
टेंडर में एक भी एजेंसी ने आवेदन नहीं किया। अब दोबारा से टेंडर लगाया जाएगा। इस बार शॉर्ट नोटिस पीरियड पर टेंडर लगाया जाएगा। - दीपक गोयल, कार्यकारी अधिकारी, नगर निगम
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बता दें कि यूं तो प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे से लेकर बिल बांटने तक की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार ने याशी कंसल्टेंसी को दी गई है। कंपनी की तरफ से शहर में सर्वे पूरा किया जा चुका है। मगर अभी तक उक्त कंपनी ने न तो सर्वे को फाइनल किया है और न ही बिल बांटने का काम। इसी को देखते हुए निगम प्रशासन ने किसी अन्य एजेंसी से प्रॉपर्टी टैक्स बिल बंटवाने का फैसला किया। इसी को लेकर पिछले दिनों से निगम ने इस कार्य का टेंडर लगाकर एजेंसियों से आवेदन आमंत्रित किए थे। मगर एक भी एजेंसी ने इस काम में अपनी रुचि नहीं दिखाई।
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पहली बार प्रॉपर्टी टैक्स बिल में डेवलपमेंट व यूजर चार्जिज भी जुड़कर आएंगे
नगर निगम की मानें तो इस बार प्रॉपर्टी टैक्स बिल में डेवलपमेंट व यूजर चार्जिज भी जुड़कर आएंगे। निगम का तर्क है कि शहरवासी कई वर्षों से डेवलपमेंट व यूजर चार्जिज जमा नहीं करा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक शहर में करीब 1.40 लाख प्रॉपर्टी हैं, जिनके मालिकों को प्रॉपर्टी टैक्स बिल भेजे जाएंगे। जिस एजेंसी को यह टेंडर मिलेगा, उसे 60 दिन के अंदर यह काम पूरा करना होगा। साथ ही उसे प्रॉपर्टी टैक्स भरने के लिए मोड़ भी तैयार करना होगा ताकि शहरवासी गूगल पे, पेटीएम के माध्यम से घर बैठकर ही बिल भर सकें और उन्हें कार्यालय के चक्कर काटने न पड़े।
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याशी के बिल से काटी जाएगी राशि
चूंकि बिल बांटने की जिम्मेदारी याशी कंपनी की है। ऐसे में अगर अन्य एजेंसी से बिल बंटवाने का कार्य किया जाएगा तो उस पर आने वाले खर्च को याशी के बिल से काट लिया जाएगा। इस बारे में निगम प्रशासन ने मुख्यालय को भी अवगत करा दिया है।
लक्ष्य : 24 करोड़ में से अभी तक 4.75 करोड़ ही हुए जमा
निगम ने इस वित्त वर्ष में प्रॉपर्टी टैक्स का टारगेट 24 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। मगर अभी तक निगम में करीब 4.75 करोड़ रुपये ही टैक्स के रूप में जमा हुए है। निगम के अनुसार अगर प्रॉपर्टी टैक्स बिल बंटते हैं तो लोग ज्यादा संख्या में अपना टैक्स जमा करवाएंगे। लोगों की एक धारणा है कि जब तक बिल नहीं मिलता, तब तक वह उसकी भुगतान नहीं करते।
टेंडर में एक भी एजेंसी ने आवेदन नहीं किया। अब दोबारा से टेंडर लगाया जाएगा। इस बार शॉर्ट नोटिस पीरियड पर टेंडर लगाया जाएगा। - दीपक गोयल, कार्यकारी अधिकारी, नगर निगम