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लैब पर कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस संक्रमण की जांच का दबाव

Wed, 26 May 2021 01:04 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 26 May 2021 01:04 AM IST
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Pressure on lab to test black fungus infection after corona
हिसार। जिले में अब कोरोना के अलावा ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस के मामले बढ़ रहे हैं। ब्लैक फंगस के मामले अधिक मिल रहे हैं। हिसार के अलावा सिरसा, फतेहाबाद, जींद, भिवानी, चरखी दादरी, जींद जिलों से ब्लैक फंगस के मरीज अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में पहुंच रहे हैं।
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मरीजों के कोरोना के अलावा फंगस संक्रमण का पता लगाने के लिए फंगल कल्चर टेस्ट भी करने पड़ते हैं। यह सुविधा केवल अग्रोहा मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में ही उपलब्ध है। इसके चलते माइक्रोबायोलॉजी लैब में कोरोना सैंपल और म्यूकरमाइकोसिस टेस्टिंग का दबाव बढ़ गया है। हर रोज लैब में कोरोना के 1000 सैंपल तो ब्लैक फंगस संक्रमण के 10 से 12 टेस्ट हो रहे हैं। कभी-कभी ब्लैक फंगस संक्रमण के मरीजों की संख्या 20 तक भी पहुंच जाती है।
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अस्पताल की माइक्रोबायोलॉजी लैब में कार्यरत चिकित्सक और कर्मियों को सभी सैंपल की रिपोर्ट अलग-अलग तैयार करनी पड़ती है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के करीब 45 स्टाफ लैब में सैंपल जांच करने में जुटा हुआ है। इनमें चिकित्सक, रिसर्च वैज्ञानिक, लैब टेक्नीशियन और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी शामिल हैं। यह सभी सैंपल एक साथ जांच करने पड़ते हैं। मेडिकल कॉलेज की लैब में दिन रात 24 घंटे सैंपल जांच होते हैं। इस समय कोरोना सैंपलिंग का दबाव भी अधिक है। अब ब्लैक फंगल संक्रमण के टेस्टिंग का भी काम अधिक बढ़ गया है।
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लैब के एलटी और कर्मियों को ही लेने पड़ते है सैंपल
इस समय अस्पताल के म्यूकरमाइकोसिस वार्ड में 92 मरीज दाखिल हैं। इनके भी हर रोज शेड्यूल से सभी केेेे टेस्ट करने पड़ते हैं। इसके अलावा आइसोलेशन वार्ड में करीब 135 मरीज दाखिल हैं। इन मरीजों की भी शक के आधार पर टेस्ट किए जाते हैं। पहले भी वार्ड में दाखिल कुछ मरीजों में ब्लैक फंगस का संक्रमण मिल चुका है। ऐसे में लैैैब केे एलटी और अन्य कर्मियों को ही सैंपल लेने के लिए जाना पड़ता है।
माइक्रोस्कोपी से देखने पर ही पता लगता है संक्रमण का
ब्लैक फंगस संक्रमण के फंगल कल्चर टेस्ट करने में पहले सभी सैंपल को स्लाइड पर लगाते हैं। इसके बाद माइक्रोस्कॉपी से गहराई से जांच करते हैं, क्योंकि माइक्रोस्कोपी से देखने पर ही फंगस संक्रमण का पता लगता है। ऐसे में बार-बार माइक्रोस्कोपी से देखने पर आंखों पर भी गहरा असर पड़ता है। इस प्रक्रिया में लगभग आधा घंटा से अधिक समय लगता है। इसके बाद ही रिपोर्ट तैयार की जाती है।

कोरोना के बाद अब म्यूकरमाइकोसिस के सैंपल का दबाव भी बढ़ गया है। म्यूकरमाइकोसिस के हर रोज 10 से 12 सैंपल जांच के लिए आते हैं। कई बार सैंपल अधिक हो जाते हैं। इनकी माइक्रोस्कोपी से गहराई से जांच करनी पड़ती है, जिससे रिपोर्ट में भी समय लगता है। हमारा स्टाफ अतिरिक्त ड्यूूटी कर रहा है।
- डॉ. कंवलप्रीत कौर, नोडल अधिकारी, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, मेडिकल कॉलेज अग्रोहा।
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