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बदहाली : उकलाना के सरकारी अस्पताल में 8 चिकित्सकों में से 3 की तैनाती, कैसे मिले मरीजों को बेहतर इलाज
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उकलाना मंडी। सरकार स्वास्थ्य सेवा बेहतर करने के दावे कर रहती है। उकलाना में सीएचसी और पीएचसी अस्पतालों की स्थिति खराब है। स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। कहीं फिजिशियन नहीं, तो कहीं सर्जन नहीं है। ऐसे में बेहतर स्वास्थ्य सेवा के दावे बेमानी हैं। स्वास्थ्य संबंधी हल्की दिक्कतों के बाद प्राथमिक इलाज के बाद मरीजों को रेफर किया जा रहा है। अस्पताल की खस्ता हालत और चिकित्सकों की कमी आमजन को भुगतनी पड़ रही है।
उकलाना सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों के 8 पद स्वीकृत हैं, लेकिन तीन ही तैनात हैं। सीनियर मेडिकल अफसर (एसएमओ) का पद भी खाली पड़ा है। एसएमओ का कार्यभार किसी अन्य चिकित्सक को दिया हुआ है। यहा पर दो ही चिकित्सक है जिनकी ड्यूटी कभी बरवाला के सीएचसी में लग जाती है और उकलाना सीएचसी के अंतर्गत दौलतुपर, पाबड़ा और हसनगढ़ की पीएचसी आती हैं। दौलतपुर व पाबड़ा में एक-एक चिकित्सक है लेकिन हसनगढ़ के पीएचसी बिना चिकित्सक के चल रही है। अस्पताल में रोजाना एक से दो सड़क दुर्घटना के केस आते हैं, चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
उकलाना के अस्पताल में रोजाना आते हैं 60 से 80 मरीज
अस्पताल में रोजाना 60 से 80 ओपीडी होती है। इनमें पेट रोग, चर्म रोग व बुखार से लेकर अन्य बीमारी के मरीज आते है। इन मरीजों को चिकित्सकों के अभाव में नागरिक अस्पताल हिसार में रेफर कर दिया जाता है। वहीं अस्पताल में तीन डाक्टरों के पद खाली है। महिला चिकित्सक नहीं होने से डिलीवरी के केस रेफर करने पड़ रहे हैं। किसी महिला को प्रसव पीड़ा ज्यादा होने पर डिलीवरी नर्स को ही करवानी पड़ती है। अस्पताल में दंत रोगी काफी आते हैं, पर दंत चिकित्सक का पद रिक्त पड़ा है।
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एक्स-रे मशीन फांक रही धूल
उकलाना सीएचसी में एक्स-रे मशीन है, मगर इस मशीन को चलाने वाला ऑपरेटर नहीं हैं। ऐसे में एक्स-रे मशीन धूल फांक रही है। इस कारण लोगों को हिसार नागरिक अस्पताल व निजी अस्पतालों की ओर से रुख करना पड़ रहा है।
नहीं कट रही एमएलआर
कोई दुघर्टना, लड़ाई-झगड़े की घटना हो जाती है तो ऐसे में उपरोक्त अस्पताल में एमएलआर तक नहीं काटी जाती और केवल प्राथमिक स्वास्थ्य जांच देकर हिसार रेफर कर दिया जाता है। जिस कारण मरीज व तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
उकलाना के सरकारी अस्पताल में तीन चिकित्सक हैं। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक अपनी सेवाएं देते हैं। दो चिकित्सक बरवाला डेपुटेशन पर चले गए हैं। वही अस्पताल में सुविधाओं की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को कई बार लिख चुके हैं। - डॉ. उमेद, मेडिकल ऑफिसर
सीएम व स्वास्थ्य मंत्री से सुविधाएं देने की मांग
सीनियर सिटीजन कल्याण ट्रस्ट समिति के चेयरमैन सत्यपाल गोयल ने कहा कि उकलाना के अस्पताल में बेहतर सुविधाएं देना सरकार का कर्तव्य है। जो लोग सरकार के नुमाइंदे उकलाना में हैं वे सत्ता में भागीदारी चाहते हैं। उन्होंने पहले दस वर्षो में उकलाना के लिए कुछ नहीं किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी व स्वास्थ्य मंत्री आरती राव से उकलाना के सरकारी अस्पताल में बेहतर सुविधाएं देने की मांग की है।
उकलाना के सरकारी अस्पताल की दयनीय हालत का मुद्दा विधानसभा सत्र में उठाएंगे। सरकारी अस्पताल में सुविधाएं न होना सरकार की पिछले दस वर्षों की नाकामी साबित करती है। उनका प्रयास रहेगा कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले। - नरेश सेलवाल, विधायक, उकलाना
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उकलाना सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों के 8 पद स्वीकृत हैं, लेकिन तीन ही तैनात हैं। सीनियर मेडिकल अफसर (एसएमओ) का पद भी खाली पड़ा है। एसएमओ का कार्यभार किसी अन्य चिकित्सक को दिया हुआ है। यहा पर दो ही चिकित्सक है जिनकी ड्यूटी कभी बरवाला के सीएचसी में लग जाती है और उकलाना सीएचसी के अंतर्गत दौलतुपर, पाबड़ा और हसनगढ़ की पीएचसी आती हैं। दौलतपुर व पाबड़ा में एक-एक चिकित्सक है लेकिन हसनगढ़ के पीएचसी बिना चिकित्सक के चल रही है। अस्पताल में रोजाना एक से दो सड़क दुर्घटना के केस आते हैं, चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
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उकलाना के अस्पताल में रोजाना आते हैं 60 से 80 मरीज
अस्पताल में रोजाना 60 से 80 ओपीडी होती है। इनमें पेट रोग, चर्म रोग व बुखार से लेकर अन्य बीमारी के मरीज आते है। इन मरीजों को चिकित्सकों के अभाव में नागरिक अस्पताल हिसार में रेफर कर दिया जाता है। वहीं अस्पताल में तीन डाक्टरों के पद खाली है। महिला चिकित्सक नहीं होने से डिलीवरी के केस रेफर करने पड़ रहे हैं। किसी महिला को प्रसव पीड़ा ज्यादा होने पर डिलीवरी नर्स को ही करवानी पड़ती है। अस्पताल में दंत रोगी काफी आते हैं, पर दंत चिकित्सक का पद रिक्त पड़ा है।
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एक्स-रे मशीन फांक रही धूल
उकलाना सीएचसी में एक्स-रे मशीन है, मगर इस मशीन को चलाने वाला ऑपरेटर नहीं हैं। ऐसे में एक्स-रे मशीन धूल फांक रही है। इस कारण लोगों को हिसार नागरिक अस्पताल व निजी अस्पतालों की ओर से रुख करना पड़ रहा है।
नहीं कट रही एमएलआर
कोई दुघर्टना, लड़ाई-झगड़े की घटना हो जाती है तो ऐसे में उपरोक्त अस्पताल में एमएलआर तक नहीं काटी जाती और केवल प्राथमिक स्वास्थ्य जांच देकर हिसार रेफर कर दिया जाता है। जिस कारण मरीज व तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
उकलाना के सरकारी अस्पताल में तीन चिकित्सक हैं। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक अपनी सेवाएं देते हैं। दो चिकित्सक बरवाला डेपुटेशन पर चले गए हैं। वही अस्पताल में सुविधाओं की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को कई बार लिख चुके हैं। - डॉ. उमेद, मेडिकल ऑफिसर
सीएम व स्वास्थ्य मंत्री से सुविधाएं देने की मांग
सीनियर सिटीजन कल्याण ट्रस्ट समिति के चेयरमैन सत्यपाल गोयल ने कहा कि उकलाना के अस्पताल में बेहतर सुविधाएं देना सरकार का कर्तव्य है। जो लोग सरकार के नुमाइंदे उकलाना में हैं वे सत्ता में भागीदारी चाहते हैं। उन्होंने पहले दस वर्षो में उकलाना के लिए कुछ नहीं किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी व स्वास्थ्य मंत्री आरती राव से उकलाना के सरकारी अस्पताल में बेहतर सुविधाएं देने की मांग की है।
उकलाना के सरकारी अस्पताल की दयनीय हालत का मुद्दा विधानसभा सत्र में उठाएंगे। सरकारी अस्पताल में सुविधाएं न होना सरकार की पिछले दस वर्षों की नाकामी साबित करती है। उनका प्रयास रहेगा कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले। - नरेश सेलवाल, विधायक, उकलाना