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Hisar News: प्रदूषण से सांसों में घुल रहा जहर, आंखों में लाली की लहर
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हिसार। खेतों में पराली जलाने और फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं से वातावरण में प्रदूषण फैलने लगा है। प्रदूषण से जहां सांसों में जहर घुल रहा है, वहीं आंखों में जलन से लालिमा बढ़ने लगी है। नागरिक अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में रोजाना करीब 100 मरीज आंखों में एलर्जी होने के आ रहे हैं। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि जब तक हवा में धुआं रहे उस समय तक सुबह और शाम की सैर से परहेज रखें।
आंखों में जलन होने पर न ही रगड़े और न ही पानी से धोएं
नागरिक अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सरगम ने बताया कि हर दूसरा मरीज आंखों की एलर्जी का मिल रहा है। इस मौसम में धुआं ऊपर नहीं जाता और वह हवा में घुल जाता है। धुएं के कारण आंखों में जलन होने लगती है। ऐसे में हम बार-बार आंखों को मसलने व रगड़ने लगते हैं, जो नुकसानदायक है। आंखाें में एलर्जी की समस्या होने पर पानी से नहीं धोना चाहिए क्योंकि पानी और आंखों के आंसुओं का पीएच का मान (हाइड्रोजन की क्षमता) अलग-अलग होता है। इसके कारण आंखें और ज्यादा खराब हो सकती हैं।
सांस के मरीजों के लिए खतरनाक
फिजिशियन डॉ. ज्ञानेंद्र बताते हैं कि इस मौसम में धुआं फैला हुआ है और यह धुआं सांस के मरीजों के लिए यह खतरनाक है। ऐसे में मरीजों को घर पर ही रहना चाहिए। धुएं का असर सीधे फेफड़ों पर पड़ता है। बाहर घूमते समय धुआं सांस के जरिये अंदर चला जाता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है।
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आंखों में जलन होने पर न ही रगड़े और न ही पानी से धोएं
नागरिक अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सरगम ने बताया कि हर दूसरा मरीज आंखों की एलर्जी का मिल रहा है। इस मौसम में धुआं ऊपर नहीं जाता और वह हवा में घुल जाता है। धुएं के कारण आंखों में जलन होने लगती है। ऐसे में हम बार-बार आंखों को मसलने व रगड़ने लगते हैं, जो नुकसानदायक है। आंखाें में एलर्जी की समस्या होने पर पानी से नहीं धोना चाहिए क्योंकि पानी और आंखों के आंसुओं का पीएच का मान (हाइड्रोजन की क्षमता) अलग-अलग होता है। इसके कारण आंखें और ज्यादा खराब हो सकती हैं।
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सांस के मरीजों के लिए खतरनाक
फिजिशियन डॉ. ज्ञानेंद्र बताते हैं कि इस मौसम में धुआं फैला हुआ है और यह धुआं सांस के मरीजों के लिए यह खतरनाक है। ऐसे में मरीजों को घर पर ही रहना चाहिए। धुएं का असर सीधे फेफड़ों पर पड़ता है। बाहर घूमते समय धुआं सांस के जरिये अंदर चला जाता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है।
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