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गड्ढे की खुदाई में नहीं मिले मोर
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
Updated Sat, 05 Dec 2015 02:08 AM IST
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गांव किरतान व सीसवाला के बीच स्थित एक मुर्गियों की वैक्सिन बनाने की फैक्टरी में ग्रामीणों के शक और निशानदेही पर शुक्रवार को फिर से खुदाई गई।
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इस दौरान प्रशासन को फैक्ट्री के गड्ढे में ना तो मोर मिले और ना ही उनके अवशेष। प्रशासन ने जेसीबी से खुदाई करवाई थी।
खुदाई कार्य शिकायत करने वाले युवकों, वन्य जीव विभाग के अधिकारियों, पुलिस और विभिन्न संगठनों की मौजूदगी में करवाया गया।
ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम और खुदाई की वीडियोग्राफी भी करवाई। खुदाई में कुछ न मिलने के बाद फैक्ट्री के सामने मौजूद ग्रामीणों ने बवाल काटना शुरू कर दिया।
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ग्रामीणों का आरोप था कि मोर के अवशेषों को फैक्ट्री प्रशासन द्वारा कहीं दूसरी जगह दबा दिया गया है। मौके पर मौजूद अधिकारियों का कहना था कि पूरी खुदाई का कार्य ग्रामीणों की निशानदेही पर ही करवाया गया।
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उन्होंने बवाल कर रहे ग्रामीणों को समझाया और नहीं मानने वालों को फटकार लगाई। खुदाई के दौरान वन्य जीव विभाग के इंस्पेक्टर राजेन्द्र प्रसाद डांगी, रक्षक दिनेश जांगड़ा, ज्योति कुमार, बालसमंद पुलिस चौकी इंचार्ज राजेन्द्र सिंह मौजूद थे।
देहरादून भेजे जाएंगे गेहूं के दानों के सैंपल
गांव किरतान व सीसवाला के बीच स्थित एक मुर्गियों की वैक्सिन बनाने की फैक्टरी में भूरे तीतर को मारकर गड्ढे में दफनाए जाने का मामला सामने आने पर वीरवार को ग्रामीणों ने खूब हंगामा मचाया था।
ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी कि फैक्ट्री के कर्मचारी मोर व तीतर को जहरीला पदार्थ खिलाकर मारते हैं। मारे गए पक्षियों को फैक्टरी परिसर में ही दफनाया गया है।
मौके पर वाइल्ड लाइफ की टीम व बालसंमद चौकी पुलिस पहुंची। ग्रामीणों के कहने पर फैक्टरी के अंदर खुदाई की गई। करीब पांच फुट गहरे गड्ढे में पुलिस को आठ तीतर के शव मिले थे।
ऐसे हुआ शक
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में करीब 40 मोर और दर्जनों भूरे तीतर है। बुधवार शाम को दाना चुगने एक भी मोर नहीं आया। तब इस मामले की खोज शुरू हुई और फैक्टरी में खुदाई करवाई गई।
वन्य प्राणी जीव रक्षा विभाग के जीव रक्षक दिनेश जांगड़ा, बुधराम और ज्योति कुमार ने बताया कि फैक्टरी से मृत हालत में मिले तीतरों की जांच करवाई जाएगी। मौके पर मिले गेहूं के सैंपल भी लिए गए, जिन्हें देहरादून लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा।