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पार्थ की मौत का मामला : 11 सदस्यीय कमेटी ने चिकित्सक को दी क्लीन चिट
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हिसार। पार्थ की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की गठित 11 सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने कैंप चौक नजदीक स्थित मान आई अस्पताल संचालक डॉ. गुरु प्रताप सिंह मान को क्लीन चिट दे दी। बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पार्थ की मौत ऑपरेशन के समय दिल की धड़कन रुकने यानी कार्डियक अरेस्ट से हुई थी। पार्थ की एफएसएल एवं पोस्टमार्टम की रिपोर्ट सामान्य आई हैं। वहीं, इस फैसले से पार्थ के परिजनों में रोष है। उन्होंने अधिकारियों को बद्दुआ देते हुए कहा कि तुम्हारे बच्चे भी ऐसे ही जाएंगे। हमें न्याय नहीं मिला है। शनिवार को मान अस्पताल के बाहर धरना देंगे। हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा कर न्याय मांगेंगे।
उधर, पार्थ के परिजनों के समर्थन में सीएमओ कार्यालय के बाहर रोष प्रदर्शन की आशंका को लेकर पुलिस बल को तैनात रखा गया। सीएमओ ने इस बारे में पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट भेजी थी। शुक्रवार सुबह से लेकर देर शाम तक अस्पताल में पुलिस फोर्स तैनात रही। पार्थ के मामले में गठित कमेटी की बैठक शुक्रवार शाम राजगुरु मार्केट स्थित पंजाबी धर्मशाला में हुई।
याद रहे कि 22 जनवरी को कैंप चौक के पास कैमरी रोड स्थित मान आई अस्पताल में सात वर्षीय पार्थ का भैंगापन का ऑपरेशन होना था। ऑपरेशन के समय उसकी मौत हो गई। पहले 12 क्वार्टर निवासी पार्थ के पिता मोहित वधवा और परिजनों ने दो से तीन बार चेकअप करवाकर ऑपरेशन के लिए 22 जनवरी का समय रखा था। परिजनों का आरोप था कि डॉ. गुरु प्रताप सिंह मान और चिकित्सकों ने पार्थ को ओवरडोज दी, जिससे उसकी मौत हुई। मौत के बाद पार्थ को न्याय दिलाने के लिए शहर के लोगों ने अस्पताल में धरना देकर रोड जाम किया था। इसके बाद इस मामले में मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था।
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सात महीने बाद भी नहीं मिला न्याय
पार्थ को भैंगापन की शिकायत थी। हम उसके जन्मदिन पर उसे ऑपरेशन कराकर उसे उपहार देना चाहते थे। अगर यह पता होता कि हम उसे हमेशा के लिए खो देंगे, तो कभी अस्पताल नहीं जाते।ह मारी गलती थी कि हम उसे ऑपरेशन के लिए मान अस्पताल में गए। यह पल हमेशा याद रहेगा। मेडिकल बोर्ड पर हमें पहले ही संदेह था। सात महीने बाद रिपोर्ट आई। हमें न्याय नहीं मिला। हम इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जाएंगे।
- मोहित, पार्थ के पिता
हमने जांच कमेटी में सदस्यों को 6 से बढ़ाकर 11 किया था ताकि सही तरह से जांच हो। इसमें जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के स्पेशलिस्ट, एनेस्थीसिया, फॉरेंसिक एक्सपर्ट को शामिल किया था। हर तरह से जांच की है। पार्थ की एफएसएल एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामान्य आई है। बच्चे की मौत दिल की धड़कन बंद होने से हुई है। परिजन गुस्से में हैं क्योंकि उनका बच्चा गया है। इसका दुख हमें भी है। - डॉ. रत्ना भारती, सिविल सर्जन, हिसार
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उधर, पार्थ के परिजनों के समर्थन में सीएमओ कार्यालय के बाहर रोष प्रदर्शन की आशंका को लेकर पुलिस बल को तैनात रखा गया। सीएमओ ने इस बारे में पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट भेजी थी। शुक्रवार सुबह से लेकर देर शाम तक अस्पताल में पुलिस फोर्स तैनात रही। पार्थ के मामले में गठित कमेटी की बैठक शुक्रवार शाम राजगुरु मार्केट स्थित पंजाबी धर्मशाला में हुई।
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याद रहे कि 22 जनवरी को कैंप चौक के पास कैमरी रोड स्थित मान आई अस्पताल में सात वर्षीय पार्थ का भैंगापन का ऑपरेशन होना था। ऑपरेशन के समय उसकी मौत हो गई। पहले 12 क्वार्टर निवासी पार्थ के पिता मोहित वधवा और परिजनों ने दो से तीन बार चेकअप करवाकर ऑपरेशन के लिए 22 जनवरी का समय रखा था। परिजनों का आरोप था कि डॉ. गुरु प्रताप सिंह मान और चिकित्सकों ने पार्थ को ओवरडोज दी, जिससे उसकी मौत हुई। मौत के बाद पार्थ को न्याय दिलाने के लिए शहर के लोगों ने अस्पताल में धरना देकर रोड जाम किया था। इसके बाद इस मामले में मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था।
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सात महीने बाद भी नहीं मिला न्याय
पार्थ को भैंगापन की शिकायत थी। हम उसके जन्मदिन पर उसे ऑपरेशन कराकर उसे उपहार देना चाहते थे। अगर यह पता होता कि हम उसे हमेशा के लिए खो देंगे, तो कभी अस्पताल नहीं जाते।ह मारी गलती थी कि हम उसे ऑपरेशन के लिए मान अस्पताल में गए। यह पल हमेशा याद रहेगा। मेडिकल बोर्ड पर हमें पहले ही संदेह था। सात महीने बाद रिपोर्ट आई। हमें न्याय नहीं मिला। हम इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जाएंगे।
- मोहित, पार्थ के पिता
हमने जांच कमेटी में सदस्यों को 6 से बढ़ाकर 11 किया था ताकि सही तरह से जांच हो। इसमें जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के स्पेशलिस्ट, एनेस्थीसिया, फॉरेंसिक एक्सपर्ट को शामिल किया था। हर तरह से जांच की है। पार्थ की एफएसएल एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामान्य आई है। बच्चे की मौत दिल की धड़कन बंद होने से हुई है। परिजन गुस्से में हैं क्योंकि उनका बच्चा गया है। इसका दुख हमें भी है। - डॉ. रत्ना भारती, सिविल सर्जन, हिसार