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कागज उद्योग कागज के प्रति अत्यंत सजग : प्रो. अनायत
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हिसार। गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय के मुद्रण तकनीकी विभाग की तरफ से मंगलवार से एग्जीक्यूटिव डेवलेपमेंट कार्यक्रम (ईडीपी) आयोजित किया जा रहा है। विवि के चौधरी रणबीर सिंह सभागार में ''''''''उच्च मुद्रण गुणवत्ता के लिए कागज की आवश्यकता : कागज और मुद्रण गुणवत्ता तकनीकी उपकरणों का व्यवाहारिक प्रशिक्षण'''''''' विषय पर हो रहा यह कार्यक्रम उद्योगों व शिक्षण संस्थानों के बीच आपसी सामंजस्य बढ़ाने के लिए है।
विवि के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई के दिशा-निर्देशों में हो रहा यह कार्यक्रम 16 मार्च तक चलेगा। कुलपति प्रो. बिश्नोई ने कहा कि शिक्षण संस्थानों तथा उद्योगों के बीच आपसी सामंजस्य ही 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सेतु का कार्य करेगा। कुलसचिव प्रो. विनोद छोकर ने भी इस कार्यक्रम को विश्वविद्यालय की बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि बताया।
दीनबंधु छोटूराम विश्वविद्यालय मुरथल के पूर्व कुलपति प्रो. आरके अनायत इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता रहे। प्रो. संदीप राणा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सीआईआईपी निदेशक प्रो. कर्मपाल नरवाल भी उपस्थित रहे। ईडीपी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता मुद्रण तकनीकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. पंकज तिवारी ने की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में खन्ना पेपर मिल्स लिमिटेड के 25 कार्यकारी अधिकारी भाग ले रहे हैं।
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प्रो. आरके अनायत ने कहा कि दुनिया की अब तक की तीन श्रेष्ठ खोजों में कागज की खोज भी एक है। उन्होंने कहा कि यह गलत धारणा है कि कागज उद्योग के कारण पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। जबकि वास्तव में कागज उद्योग कागज के प्रति अत्यंत सजग है। कागज उद्योग द्वारा मरू और बंजर भूमि पर पेड़ लगाकर कागज की आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है। कागज उद्योग द्वारा पेड़ लगाने की प्रक्रिया लगातार जारी रहती है। उन्होंने कहा कि कागज का प्रयोग पर्यावरण सततता को बढ़ावा देता है। कागज उद्योग शीघ्र ही हाइब्रिड कागज का निर्माण करने जा रहा है।
प्रो. संदीप राणा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों के कौशल में वृद्धि करेगा और इससे प्रतिभागियों की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ेगी। प्रो. कर्मपाल नरवाल ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय द्वारा उद्योगों की आवश्यकताओं को समझना है। प्रो. पंकज तिवारी ने ईडीपी के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
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विवि के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई के दिशा-निर्देशों में हो रहा यह कार्यक्रम 16 मार्च तक चलेगा। कुलपति प्रो. बिश्नोई ने कहा कि शिक्षण संस्थानों तथा उद्योगों के बीच आपसी सामंजस्य ही 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सेतु का कार्य करेगा। कुलसचिव प्रो. विनोद छोकर ने भी इस कार्यक्रम को विश्वविद्यालय की बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि बताया।
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दीनबंधु छोटूराम विश्वविद्यालय मुरथल के पूर्व कुलपति प्रो. आरके अनायत इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता रहे। प्रो. संदीप राणा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सीआईआईपी निदेशक प्रो. कर्मपाल नरवाल भी उपस्थित रहे। ईडीपी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता मुद्रण तकनीकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. पंकज तिवारी ने की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में खन्ना पेपर मिल्स लिमिटेड के 25 कार्यकारी अधिकारी भाग ले रहे हैं।
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प्रो. आरके अनायत ने कहा कि दुनिया की अब तक की तीन श्रेष्ठ खोजों में कागज की खोज भी एक है। उन्होंने कहा कि यह गलत धारणा है कि कागज उद्योग के कारण पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। जबकि वास्तव में कागज उद्योग कागज के प्रति अत्यंत सजग है। कागज उद्योग द्वारा मरू और बंजर भूमि पर पेड़ लगाकर कागज की आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है। कागज उद्योग द्वारा पेड़ लगाने की प्रक्रिया लगातार जारी रहती है। उन्होंने कहा कि कागज का प्रयोग पर्यावरण सततता को बढ़ावा देता है। कागज उद्योग शीघ्र ही हाइब्रिड कागज का निर्माण करने जा रहा है।
प्रो. संदीप राणा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों के कौशल में वृद्धि करेगा और इससे प्रतिभागियों की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ेगी। प्रो. कर्मपाल नरवाल ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय द्वारा उद्योगों की आवश्यकताओं को समझना है। प्रो. पंकज तिवारी ने ईडीपी के बारे में विस्तृत जानकारी दी।