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Hisar News: अब मिड-डे मील स्टाफ की साल में दो बार होगी स्वास्थ्य जांच
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बच्चों को मिड डे मील परोसती कर्मचारी।
हिसार। प्रदेश सरकार ने मिड-डे मील योजना से जुड़े कुक-कम-हेल्परों के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब इन कर्मचारियों से केवल भोजन तैयार करने और बच्चों को परोसने का ही काम लिया जाएगा, और किसी भी प्रकार का अतिरिक्त कार्य करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, उनकी सेहत का ध्यान रखते हुए साल में दो बार मुफ्त हेल्थ चेकअप अनिवार्य कर दिया गया है।
शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार यदि किसी स्कूल में कुक-कम-हेल्परों से सफाई, कार्यालयीन कार्य या अन्य अतिरिक्त कार्य कराया जाता है, तो उसे तुरंत बंद कराया जाएगा। नियम का उल्लंघन करने पर संबंधित स्कूल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिले में कुल 863 सरकारी स्कूल हैं जिनमें 6 आरोही स्कूल शामिल हैं। इनमें से 857 स्कूलों में मिड-डे मील योजना नियमित रूप से लागू है। योजना को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए जिले में लगभग 1960 कुक-कम-हेल्पर कार्यरत हैं।
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हिसार-2 के बीईओ राकेश चराया ने कहा कि भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों का स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है, ताकि बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित भोजन मिल सके। नियमित स्वास्थ्य जांच से कर्मचारियों की सेहत पर निगरानी बनी रहेगी और समय पर उपचार संभव होगा। इस कदम से कर्मचारियों का कार्य दबाव कम होगा और वे अपने मुख्य कर्तव्यों पर बेहतर ध्यान दे पाएंगे जिससे बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
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शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार यदि किसी स्कूल में कुक-कम-हेल्परों से सफाई, कार्यालयीन कार्य या अन्य अतिरिक्त कार्य कराया जाता है, तो उसे तुरंत बंद कराया जाएगा। नियम का उल्लंघन करने पर संबंधित स्कूल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में कुल 863 सरकारी स्कूल हैं जिनमें 6 आरोही स्कूल शामिल हैं। इनमें से 857 स्कूलों में मिड-डे मील योजना नियमित रूप से लागू है। योजना को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए जिले में लगभग 1960 कुक-कम-हेल्पर कार्यरत हैं।
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हिसार-2 के बीईओ राकेश चराया ने कहा कि भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों का स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है, ताकि बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित भोजन मिल सके। नियमित स्वास्थ्य जांच से कर्मचारियों की सेहत पर निगरानी बनी रहेगी और समय पर उपचार संभव होगा। इस कदम से कर्मचारियों का कार्य दबाव कम होगा और वे अपने मुख्य कर्तव्यों पर बेहतर ध्यान दे पाएंगे जिससे बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।