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अब नागरिक अस्पताल में होगा यौन और मनोरोगियों का अस्पताल
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हिसार। नागरिक अस्पताल में पहली बार आटिज्म, न्यूरो साइकाइट्री और सेक्सुअल क्लीनिक खोले जा रहे हैं। हाल में ही नियुक्त हुए एमडी मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत कुमार हफ्ते में दो दिन क्लीनिक चलाएंगे। कमरा नंबर 38 में शनिवार को आटिज्म, न्यूरो साइकाइट्री और वीरवार को सेक्सुअल क्लीनिक की स्पेशल ओपीडी शुरू की है। मरीज अस्पताल पहुंच कर निशुल्क उपचार करवा सकते हैं।
जानिए आटिज्म के बारे में
डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि आटिज्म एक न्यूरोलोलॉजिकल और विकास संबंधी विकार है। आटिज्म एक तरह की विकलांगता है, बीमारी नहीं। इसलिए आटिज्म कभी जाता नहीं है, आटिज्म बचपन में शुरू होता है और एक व्यक्ति के जीवन में अंत तक रहता है। यह उस क्षमता को प्रभावित करता है जिसके द्वारा एक व्यक्ति दूसरों के साथ कैसे काम और बातचीत करता है और सीखता है। यह आटिज्म स्पेक्ट्रम विकार के रूप में भी जाना जाता है।
यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है। जिन लोगों को आटिज्म होता है वे ऑटिस्टिक कहलाते हैं। ऑटिस्टिक लोग दुनिया को दूसरे नजर से देखते हैं, सुनते हैं और महसूस करते हैं।
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सेक्सुअल क्लीनिक
उन्होंने बताया कि वीरवार को सेक्सुअल क्लीनिक लगाया जाएगा। ओपीडी के अंदर यौन संबंध में आ रही दिक्कतों की दवा दी जाएगी। लोग इस बारे में चिकित्सक को अपनी बीमारी खुल कर नहीं बता सकते लेकिन, क्लीनिक में मरीज अपनी बीमारी के बारे में बता सकेगा और उसका निदान किया जाएगा।
न्यूरो साइकाइट्री क्लीनिक
डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि शनिवार को न्यूरो साइकाइट्री क्लीनिक में हर प्रकार के सिर दर्द का उपचार किया जाएगा। खासतौर पर माइग्रेन से ग्रस्त मरीज अपना उपचार करवा सकेंगे। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार तकरीबन 7.5 प्रतिशत भारतीय किसी न किसी रूप में मानसिक विकार से ग्रस्त हैं। वर्ष 2025 तक भारत की लगभग 40 प्रतिशत आबादी मानसिक रोगों से पीड़ित होगी। मानसिक रोगियों की इतनी बड़ी संख्या के बावजूद भी अब तक भारत में इसे एक रोग के रूप में पहचान नहीं मिल पाई है। आज भी यहां मानसिक स्वास्थ्य की पूर्णत: उपेक्षा की जाती है और इसे काल्पनिक माना जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि जिस प्रकार शारीरिक रोग हमारे लिये हानिकारक हो सकते हैं उसी प्रकार मानसिक रोग भी हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
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जानिए आटिज्म के बारे में
डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि आटिज्म एक न्यूरोलोलॉजिकल और विकास संबंधी विकार है। आटिज्म एक तरह की विकलांगता है, बीमारी नहीं। इसलिए आटिज्म कभी जाता नहीं है, आटिज्म बचपन में शुरू होता है और एक व्यक्ति के जीवन में अंत तक रहता है। यह उस क्षमता को प्रभावित करता है जिसके द्वारा एक व्यक्ति दूसरों के साथ कैसे काम और बातचीत करता है और सीखता है। यह आटिज्म स्पेक्ट्रम विकार के रूप में भी जाना जाता है।
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यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है। जिन लोगों को आटिज्म होता है वे ऑटिस्टिक कहलाते हैं। ऑटिस्टिक लोग दुनिया को दूसरे नजर से देखते हैं, सुनते हैं और महसूस करते हैं।
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सेक्सुअल क्लीनिक
उन्होंने बताया कि वीरवार को सेक्सुअल क्लीनिक लगाया जाएगा। ओपीडी के अंदर यौन संबंध में आ रही दिक्कतों की दवा दी जाएगी। लोग इस बारे में चिकित्सक को अपनी बीमारी खुल कर नहीं बता सकते लेकिन, क्लीनिक में मरीज अपनी बीमारी के बारे में बता सकेगा और उसका निदान किया जाएगा।
न्यूरो साइकाइट्री क्लीनिक
डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि शनिवार को न्यूरो साइकाइट्री क्लीनिक में हर प्रकार के सिर दर्द का उपचार किया जाएगा। खासतौर पर माइग्रेन से ग्रस्त मरीज अपना उपचार करवा सकेंगे। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार तकरीबन 7.5 प्रतिशत भारतीय किसी न किसी रूप में मानसिक विकार से ग्रस्त हैं। वर्ष 2025 तक भारत की लगभग 40 प्रतिशत आबादी मानसिक रोगों से पीड़ित होगी। मानसिक रोगियों की इतनी बड़ी संख्या के बावजूद भी अब तक भारत में इसे एक रोग के रूप में पहचान नहीं मिल पाई है। आज भी यहां मानसिक स्वास्थ्य की पूर्णत: उपेक्षा की जाती है और इसे काल्पनिक माना जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि जिस प्रकार शारीरिक रोग हमारे लिये हानिकारक हो सकते हैं उसी प्रकार मानसिक रोग भी हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।