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Hisar News: लंपी से बीमार व मृत पशुओं के लिए नहीं मिली कोई क्षतिपूर्ति, बीमा कंपनी का अनुबंध भी समाप्त

Mon, 01 May 2023 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Mon, 01 May 2023 11:54 PM IST
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No compensation was received from Lumpi for sick and dead animals, contract of insurance company also terminated
हिसार। पशुओं की बीमारी या मौत से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी बीमा होता है, लेकिन इसका कोई लाभ पशुपालकों को नहीं मिल रहा है। पिछले साल लंपी बीमारी से अकेले हिसार जिले में 100 से अधिक पशुओं की मौत और 3000 से अधिक पशु बीमार हुए, लेकिन पशुपालकों को क्षतिपूर्ति नहीं मिली। इस साल तो पशु बीमा कंपनी का नया अनुबंध भी अब तक नहीं बन पाया है।
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कृषि की तरह ही पशुपालकों के लिए भी सरकार ने बीमा योजना चला रखी है। योजना के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थी का निशुल्क और सामान्य व पिछड़ी जाति के पशुपालकों को पशु की कीमत के अनुसार 100, 200 या 300 रुपये देकर बीमा करवाना होता है। अनुमान के मुताबिक हिसार जिले में 2 लाख से अधिक पशुओं का पिछले साल बीमा हुआ था।
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पिछले साल लंपी बीमारी के चलते बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हुई थी, लेकिन बीमा कराने वाले पशुपालकों को इस नुकसान की भरपाई के लिए कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। पशुओं का बीमा करने वाली कंपनी का अनुबंध भी बीते 31 मार्च को ही समाप्त हो गया। तब से अब तक नया अनुबंध भी नहीं हुआ है। इस वजह से पशु बीमा का काम भी बंद है।
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31 मार्च को खत्म हो चुका बीमा कंपनी का अनुबंध
हिसार व फतेहाबाद के उप निदेशक पशुपालन डॉ. सुखविंदर का कहना है कि लंपी से हुई पशुओं की बीमारी या मौत के मामले में सरकार की तरफ से पशुपालकों की आर्थिक मदद देने की कोई योजना ही नहीं थी। आंकड़े वास्तविक स्थिति की जानकारी के लिए एकत्रित किए जा रहे थे। पशुपालन विभाग ने इलाज व टीकाकरण का प्रबंध कराकर बीमारी का प्रसार रोका था। पशु बीमा कंपनी का अनुबंध 31 मार्च को समाप्त हो गया था। अब प्रक्रिया चल रही है, जल्दी ही अनुमति मिलने की उम्मीद है।
बीमा कंपनी ने भुलाया और सरकार ने भी नहीं दी कोई मदद
पशुपालक सत्यजीत, रामनिवास, मांगेराम आदि ने बताया कि पिछले साल जब लंपी बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा था, उस वक्त सरकार के जिम्मेदार बार-बार कह रहे थे कि पशुपालकों को हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। यहां तक कि कृषि मंत्री भी कई कार्यक्रमों में पशुपालकों की मदद का भरोसा दिलाया था, परंतु सरकार या बीमा कंपनी की तरफ से पशुपालकों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।



मदद तो की नहीं, अब डाटा भी छिपा रहे
बीमा कंपनी और सरकार की पशुपालकों को तो कोई लाभ नहीं ही दिया गया, अब इससे संबंधित डाटा भी छिपाया जा रहा है। हिसार के बीमा सहायता अधिकारी ने पशु बीमा से संबंधित जानकारी वरिष्ठों अफसरों से ही मिलने की बात कहीं। वहीं जनरल मैनेजर जतिन सरीन का कहना है कि इस तरह का डॉटा हम सार्वजनिक नहीं कर सकते।
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