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Hisar News: लुवास की नौ गायें भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक से बनेंगी मां

Thu, 22 Jun 2023 10:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Thu, 22 Jun 2023 10:19 PM IST
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Nine cows of Luvas will become mothers with embryo transplant technique
हिसार। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) की 9 गायें भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक (ईटीटी) के प्रयोग से गर्भधारण किया है। पिछले साल भी ऐसी ही 11 सरोगेसी गायों से 8 बछिया व 3 बछड़ों का जन्म कराया गया था। अब इस तकनीक को आम पशुपालकों तक पहुंचाने का उपाय सुझाने के लिए टॉस्क फोर्स गठित किया गया है। इसके जरिये बेकार हो चुकी गायों से अच्छी नस्ल की बछिया का जन्म कराने की योजना है।
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भ्रूण प्रत्यारोपण अच्छी प्रजाति की गाय एवं भैंस के ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने की नई तकनीक है। इस तकनीक में सामान्य गाय-भैंस से एकत्रित अंडों को उच्च गुणवत्ता वाले सीमन से मेल कराया जाता है। करीब 7 दिन बाद बने हुए भ्रूण को गर्भाशय से बाहर निकालकर दूसरी गाय-भैंस के गर्भाशय में रखा जाता है। यह पूरी प्रक्रिया बगैर सर्जरी के होती है। इस तकनीक के जरिये एक गाय से अधिक से अधिक उन्नतशील नस्ल की संततियां प्राप्त की जा सकती हैं। लुवास में इस तकनीक से पिछले साल 11 गायों से 8 बछिया व 3 बछड़ों का जन्म कराया गया था। अब 9 अन्य गायों में भी भ्रूण प्रत्यारोपित किया गया है।
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तकनीक के वितरण के लिए सुझाव देंगे विशेषज्ञ
इस तकनीक को आम पशुपालक तक पहुंचाकर अच्छी नस्ल की अधिक से अधिक बछियों का जन्म कराने के लिए शासन ने विशेषज्ञों की एक समिति बनाई है। लुवास के रिसर्च डायरेक्टर डॉ. नरेश जिंदल की अगुवाई में गठित इस समिति में उप निदेशक पशुपालन डॉ. सुभाष जांगड़ा को कन्वीनर व डॉ. आनंद पांडेय, डॉ. जसमेर दलाल, डॉ. रणवीर सिंह, डॉ. विकास वर्मा व डॉ. भारत भूषण सुनेजा को सदस्य नामित किया गया है। यह समिति 20 अगस्त तक अपने सुझाव प्रदेश सरकार को सौंपेगी। समिति के चेयरमैन डॉ. नरेश जिंदल ने कहा कि प्रोजेक्ट की प्रगति काफी अच्छी है। विशेषज्ञों के सुझाव पर चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार होगी।
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बेकार गायों को उपयोगी बनाएगा यह शोध
भ्रूण प्रत्यारोपण विधि शुरुआती सफलता से सभी उत्साहित हैं। अपने यहां बड़ी संख्या में ऐसी गायें हैं, जो कि बहुत कम दूध देती हैं अथवा बांझपन की समस्या है। ऐसे बेकार गोवंश पशुपालकों पर बोझ बन जाती हैं। ईटीटी के जरिये इन गोवंश से अच्छी नस्ल की बछड़ी, बछड़ों का जन्म कराया जाएगा। इससे बेकार पशुओं का भी समुचित उपयोग हो सकेगा। कम समय में ही अच्छी नस्ल की गायों की संख्या बढ़ने से दूध उत्पादन में भी वृद्धि होगी। - डॉ. सुभाष जांगड़ा-उप निदेशक, पशुपालन विभाग, हिसार
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