{"_id":"57ab7aad4f1c1b8667ee60b8","slug":"nhm-second-day-protest-hisar","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक महीने में मांगें नहीं मानीं तो बेमियादी आंदोलन करेंगे शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक महीने में मांगें नहीं मानीं तो बेमियादी आंदोलन करेंगे शुरू
ब्यूरो / अमर उजाला , हिसार
Updated Thu, 11 Aug 2016 12:34 AM IST
विज्ञापन
प्रदर्शन
- फोटो : buraeau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वास्थ्य विभाग में ग्रामीण स्वास्थ्य योजना के तहत जिले में नियुक्त 750 कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर बुधवार को दूसरे दिन हड़ताल कर सीएमओ कार्यालय पर धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मियों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की। उनका दो दिवसीय आंदोलन बुधवार शाम समाप्त हो गया। आंदोलनरत कर्मियों ने यह कहते हुए आंदोलन समाप्त किया कि यदि एक महीने में उनकी मांगें न मानीं तो वे बेमियादी आंदोलन शुरू करेंगे। इस आंदोलन की सारी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की होगी।
एनएचएम के तहत लगे इन कर्मियों की हड़ताल के कारण जिले में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं हैं। असुविधाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारी पहले से विशेष प्रबंध नहीं कर पाए, जिससे लोगों को उसके क्षेत्र के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तरह मिल पाएं। दो दिन की हड़ताल से जिले के अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर नवजात शिशु सहित छोटी उम्र के बच्चों के टीकाकरण का काम काफी हद तक प्रभावित रहा। शहर के स्वास्थ्य विभाग के उपकेंद्रों पर विभाग आम नागरिक को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं दे पाया। जिले के 60 उप केंद्र एनएचएम के तहत नियुक्त कर्मचारियों पर निर्भर हैं। सीसवाल ब्लॉक के 29 में से 20 उप केंद्र, सिसाय ब्लॉक के सभी 20 उप केंद्र, मंगाली ब्लॉक के 25 में से 20 उप केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं काफी प्रभावित रहीं। यहां कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के चलते आम नागरिक को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
चुनाव से पहले भाजपा ने मांगें जायज मानी थीं : शर्मा
एनएचएम इंपलाइज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुनील शर्मा ने बताया कि भाजपा नेताओं ने चुनाव से पहले उनकी मांगों को जायज मानते हुए सरकार बनने पर पूरा करने का आश्वासन दिया था। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार बने लगभग दो साल होने को हैं। मगर सरकार प्रदेश के एनएचएम कर्मचारियों को स्थायी नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि उनकी अधिकांश मांगें पहले बने नियमों के अनुरूप पूरी हो सकती हैं, लेकिन सरकार की इच्छाशक्ति नहीं होने के कारण मांगें पूरी नहीं की जा रही हैं।
विज्ञापन
डिलीवरी मामलों में आई परेशानी
शर्मा ने दावा किया कि जिले में 750 कर्मचारियों में से 31 कर्मचारी आयुष के तहत स्वास्थ्य विभाग के उप केंद्रों पर कार्यरत हैं। दो दिन की हड़ताल के दौरान हिसार, हांसी व आदमपुर सिविल अस्पताल, अग्रोहा, बरवाला, कैमरी, सीसवाल, चौधरीवास, नारनौंद, मिर्चपुर स्थित विभाग के उप केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं काफी प्रभावित रहीं। मरीजों को उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ी। हड़ताल के चलते जिले के 23 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव पीड़ा को झेल रही महिला को डिलीवरी के लिए परेशानी उठानी पड़ी। महिला के परिजन उसे या तो सिविल अस्पताल लेकर आए या मजबूरन निजी अस्पताल ले जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि सभी पीएचसी पर कुल 69 कर्मचारी एनएचएम के तहत लगे हुए हैं। इन कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद महिलाओं को डिलीवरी संबंधी खासी परेशानी उठानी पड़ी।
अनुबंध समाप्त होने के नजदीक
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत प्रदेशभर में सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र एवं उप केंद्रों पर लगाए गए 12 हजार कर्मचारी फिलहाल अस्थायी हैं। वे प्रमुख मांगों को लेकर दो दिन की हड़ताल पर रहे। प्रदेशभर के इन 12 हजार कर्मचारियों का अनुबंध 6 अक्टूबर को समाप्त होने वाला है। इन कर्मचारियों ने सरकार को सितंबर के प्रथम सप्ताह तक मांगों को पूरा करने की मोहलत दी है। यदि सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो अनुबंध पूरा होने से पहले वे प्रदेशस्तर का आंदोलन करेंगे, जिसमें ये हजारों कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर जा सकते हैं।
विज्ञापन
एनएचएम के तहत लगे इन कर्मियों की हड़ताल के कारण जिले में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं हैं। असुविधाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारी पहले से विशेष प्रबंध नहीं कर पाए, जिससे लोगों को उसके क्षेत्र के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तरह मिल पाएं। दो दिन की हड़ताल से जिले के अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर नवजात शिशु सहित छोटी उम्र के बच्चों के टीकाकरण का काम काफी हद तक प्रभावित रहा। शहर के स्वास्थ्य विभाग के उपकेंद्रों पर विभाग आम नागरिक को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं दे पाया। जिले के 60 उप केंद्र एनएचएम के तहत नियुक्त कर्मचारियों पर निर्भर हैं। सीसवाल ब्लॉक के 29 में से 20 उप केंद्र, सिसाय ब्लॉक के सभी 20 उप केंद्र, मंगाली ब्लॉक के 25 में से 20 उप केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं काफी प्रभावित रहीं। यहां कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के चलते आम नागरिक को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
विज्ञापन
चुनाव से पहले भाजपा ने मांगें जायज मानी थीं : शर्मा
एनएचएम इंपलाइज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुनील शर्मा ने बताया कि भाजपा नेताओं ने चुनाव से पहले उनकी मांगों को जायज मानते हुए सरकार बनने पर पूरा करने का आश्वासन दिया था। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार बने लगभग दो साल होने को हैं। मगर सरकार प्रदेश के एनएचएम कर्मचारियों को स्थायी नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि उनकी अधिकांश मांगें पहले बने नियमों के अनुरूप पूरी हो सकती हैं, लेकिन सरकार की इच्छाशक्ति नहीं होने के कारण मांगें पूरी नहीं की जा रही हैं।
विज्ञापन
डिलीवरी मामलों में आई परेशानी
शर्मा ने दावा किया कि जिले में 750 कर्मचारियों में से 31 कर्मचारी आयुष के तहत स्वास्थ्य विभाग के उप केंद्रों पर कार्यरत हैं। दो दिन की हड़ताल के दौरान हिसार, हांसी व आदमपुर सिविल अस्पताल, अग्रोहा, बरवाला, कैमरी, सीसवाल, चौधरीवास, नारनौंद, मिर्चपुर स्थित विभाग के उप केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं काफी प्रभावित रहीं। मरीजों को उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ी। हड़ताल के चलते जिले के 23 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव पीड़ा को झेल रही महिला को डिलीवरी के लिए परेशानी उठानी पड़ी। महिला के परिजन उसे या तो सिविल अस्पताल लेकर आए या मजबूरन निजी अस्पताल ले जाना पड़ा। उन्होंने बताया कि सभी पीएचसी पर कुल 69 कर्मचारी एनएचएम के तहत लगे हुए हैं। इन कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद महिलाओं को डिलीवरी संबंधी खासी परेशानी उठानी पड़ी।
अनुबंध समाप्त होने के नजदीक
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत प्रदेशभर में सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र एवं उप केंद्रों पर लगाए गए 12 हजार कर्मचारी फिलहाल अस्थायी हैं। वे प्रमुख मांगों को लेकर दो दिन की हड़ताल पर रहे। प्रदेशभर के इन 12 हजार कर्मचारियों का अनुबंध 6 अक्टूबर को समाप्त होने वाला है। इन कर्मचारियों ने सरकार को सितंबर के प्रथम सप्ताह तक मांगों को पूरा करने की मोहलत दी है। यदि सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो अनुबंध पूरा होने से पहले वे प्रदेशस्तर का आंदोलन करेंगे, जिसमें ये हजारों कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर जा सकते हैं।