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एनएच 9 कैंट से सीधे एनएच 52 पर मुकलान तक बनेगा नया फोरलेन बाईपास
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हिसार। एनएच 9 (कैंट) से एनएच 52 (मुकलान) तक बाईपास बनाया जाएगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते बाहर निकाला है। साथ ही इसकी विस्तृत कार्य योजना (डीपीआर) बनानी शुरू कर दी है। इस बाईपास के बनने से शहर से वाहनों का बोझ कम होगा।
बता दें कि अगर कोई वाहन चालक एनएच 52 से होकर आता है और उसे एनएच 9 पर जाना है तो उसे शहर के अंदर से गुजरना पड़ेगा, क्योंकि अभी एनएच 52 से एनएच 9 को जोड़ने के लिए बाईपास उपलब्ध नहीं है। काफी समय से इस बाईपास के निर्माण की मांग की जा रही है।
डिप्टी स्पीकर ने परिवहन मंत्री से की थी मांग
डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी से इस बाईपास का निर्माण करवाने की मांग की थी। इसे बाद एनएचएआई ने स्थानीय अधिकारियों से इस बात का सर्वे करने के निर्देश दिए थे कि अगर इस बाईपास का निर्माण किया जाता है तो यहां से कितने वाहन गुजरेंगे, क्योंकि संभावना है कि इस बाईपास पर टोल टैक्स लिया जाए। इसके बाद स्थानीय अधिकारियों ने सर्वे रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी थी। इस रिपोर्ट को देखने के बाद एनएचएआई ने इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। मगर डिप्टी स्पीकर ने इस प्रोजेक्ट को लेकर फिर से नीतिन गडकरी से मुलाकात की, जिसके बाद अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते से बाहर निकाल लिया।
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40 किलोमीटर लंबा होगा बाईपास
अधिकारियों की मानें तो यह फोरलेन होगा। बाईपास के निर्माण को लेकर आधा दर्जन से ज्यादा गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। फिलहाल सर्वे कर यह पता लगाया जा रहा है कि यह बाईपास कहां-कहां से होकर गुजरेगा। साथ ही साथ इसकी डीपीआर भी बनाई जा रही है। डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
साउथ बाईपास पर वाहनों का बोझ होगा कम
फिलहाल एनएच 9 से एनएच 52 पर जाने वाले वाहन साउथ बाईपास से होकर गुजर रहे हैं। इस कारण से दिनभर इस रोड पर वाहनों का आवागमन लगा रहता है। चूंकि इस वाहनों में भारी वाहनों की संख्या काफी ज्यादा है और इन वाहनों के कारण इस रोड पर अक्सर हादसे होते रहते हैं। पिछले एक साल में भारी वाहनों के कारण दो लोग अपनी जान गवां चुके हैं, मगर बाईपास बनने के बाद इन वाहनों को शहर में एंट्री करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे साउथ बाईपास पर वाहनों का बोझ कम होगा।
बाईपास के निर्माण को लेकर डीपीआर बनाने का काम शुरू कर दिया है। साथ ही अलाइनमेंट का काम भी किया जा रहा है। - विपिन मंगला, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई
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बता दें कि अगर कोई वाहन चालक एनएच 52 से होकर आता है और उसे एनएच 9 पर जाना है तो उसे शहर के अंदर से गुजरना पड़ेगा, क्योंकि अभी एनएच 52 से एनएच 9 को जोड़ने के लिए बाईपास उपलब्ध नहीं है। काफी समय से इस बाईपास के निर्माण की मांग की जा रही है।
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डिप्टी स्पीकर ने परिवहन मंत्री से की थी मांग
डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी से इस बाईपास का निर्माण करवाने की मांग की थी। इसे बाद एनएचएआई ने स्थानीय अधिकारियों से इस बात का सर्वे करने के निर्देश दिए थे कि अगर इस बाईपास का निर्माण किया जाता है तो यहां से कितने वाहन गुजरेंगे, क्योंकि संभावना है कि इस बाईपास पर टोल टैक्स लिया जाए। इसके बाद स्थानीय अधिकारियों ने सर्वे रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी थी। इस रिपोर्ट को देखने के बाद एनएचएआई ने इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। मगर डिप्टी स्पीकर ने इस प्रोजेक्ट को लेकर फिर से नीतिन गडकरी से मुलाकात की, जिसके बाद अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते से बाहर निकाल लिया।
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40 किलोमीटर लंबा होगा बाईपास
अधिकारियों की मानें तो यह फोरलेन होगा। बाईपास के निर्माण को लेकर आधा दर्जन से ज्यादा गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। फिलहाल सर्वे कर यह पता लगाया जा रहा है कि यह बाईपास कहां-कहां से होकर गुजरेगा। साथ ही साथ इसकी डीपीआर भी बनाई जा रही है। डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
साउथ बाईपास पर वाहनों का बोझ होगा कम
फिलहाल एनएच 9 से एनएच 52 पर जाने वाले वाहन साउथ बाईपास से होकर गुजर रहे हैं। इस कारण से दिनभर इस रोड पर वाहनों का आवागमन लगा रहता है। चूंकि इस वाहनों में भारी वाहनों की संख्या काफी ज्यादा है और इन वाहनों के कारण इस रोड पर अक्सर हादसे होते रहते हैं। पिछले एक साल में भारी वाहनों के कारण दो लोग अपनी जान गवां चुके हैं, मगर बाईपास बनने के बाद इन वाहनों को शहर में एंट्री करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे साउथ बाईपास पर वाहनों का बोझ कम होगा।
बाईपास के निर्माण को लेकर डीपीआर बनाने का काम शुरू कर दिया है। साथ ही अलाइनमेंट का काम भी किया जा रहा है। - विपिन मंगला, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई