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गेहूं की नई अगेती किस्म डब्ल्यूएच 1270 से बढ़ेगा उत्पादन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 15 Sep 2022 12:33 AM IST
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New early wheat variety WH 1270 will increase production
हिसार। गेहूं उत्पादक किसानों के लिए इस बार का कृषि मेला खास रहा। प्रदर्शनी में एचएयू की प्रजाति डब्ल्यूएच 1270 को भी बिक्री के लिए रखा गया था, जिसका औसत उत्पादन 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखा गया है। गेहूं की यह नई प्रजाति हिसार में अब तक की सबसे अधिक उपज देने वाली प्रजाति भी है। हालांकि, इसकी लंबाई सामान्य पौधों से अधिक होती है, जिससे इसके गिरने का डर रहता है। इस पर नियंत्रण के लिए विश्वविद्यालय ने दो केमिकल भी बनाया है, जिसके प्रयोग से न केवल फसल की अनियंत्रित वृद्घि रुकेगी, बल्कि उत्पादन में भी वृद्घि होगी।
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हरियाणा देश के अग्रणी गेहूं उत्पादक राज्यों में है। यहां गेहूं का औसत उत्पादन 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आसपास है। हिसार क्षेत्र में कुछ अग्रणी प्रजातियों में उत्पादन 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिला है। अब चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय ने जो नई प्रजाति विकसित की है, उसकी औसत उपज 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। विश्वविद्यालय के गेहूं एवं जौ विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने बताया कि नई विकसित की गई प्रजाति अभी तक की सबसे अधिक उपज देने वाली प्रजाति है। इस प्रजाति के बीज का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
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लेकिन वृद्घि पर करना होगा नियंत्रण
नई किस्म में पौधे की लंबाई तेजी से बढ़ती है, जिसके नियंत्रण के लिए किसानों को क्लोरमीक्वेट क्लोराईड का .2 प्रतिशत टेबुकोनाजोल का .1 प्रतिशत मिश्रित घोल बनाकर दो छिड़काव तने की पहली गांठ बनने पर और शिखर पत्ता आने की अवस्था में करना चाहिए। इसके प्रयोग से फसल को गिरने से रोका जा सकता है।
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उर्वरक की मात्रा का रखें ख्याल
इस किस्म से अधिकतम उत्पादन लेने के लिए प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन (यूरिया) 225 किलोग्राम, फास्फोरस 90 किलोग्राम, पोटाश 60 किलोग्राम, जिंक सल्फेट 25 किलोग्राम व 15 टन गोबर की खाद का उपयोग किया जाना चाहिए। फास्फोरस, पोटाश व जिंक सल्फेट की पूरी मात्रा व नाइट्रोजन का आधा हिस्सा बिजाई के समय दें। यूरिया का शेष चौथाई हिस्सा पहली सिंचाई पर तथा शेष दूसरी सिंचाई पर दें।
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