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एनडीसी, टुकड़ों की रजिस्ट्री, प्रॉपर्टी टैक्स के गलत बिल, कन्वेंस डीड बने मुसीबत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 May 2022 11:21 PM IST
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NDC, Registry of pieces, wrong property tax bills, Conveyance deed become trouble
हिसार- अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम में उपस्थित एसोसिएशन के पदाधिकारी व अन्य गणमान्य। - फोटो : Hisar
हिसार। नगर निगम एरिया में नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी), टुकड़ों में रजिस्ट्री, रजिस्ट्री न होना, प्रॉपर्टी टैक्स असेसमेंट, नगर सुधार मंडल की प्रॉपर्टी की कन्वेंस डीड, अनाप-शनाप डेवलपमेंट चार्ज, सोलिड वेस्ट चार्ज लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। इन मुद्दों को लेकर दी हिसार प्रॉपर्टी डीलर वेलफेयर एसोसिएशन के सहयोग से अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अलावा अन्य प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने नगर निगम व तहसील कार्यालय से जुड़ी समस्याओं को उठाया। इन लोगों ने कहा कि निगम फाइल लगाने से पहले दस्तावेजों की सूची उपलब्ध भी नहीं कराता। कंपलीट फाइल मानकर स्वीकार की गई फाइल को भी रिजेक्ट कर दिया जाता है।
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बिना कारण रिजेक्ट की जा रही फाइलें
एनडीसी की साइट पिछले चार महीने से सुचारु रूप से काम नहीं कर रही है। अगर एक पिता अपने बच्चों को अपनी जमीन के हिस्से कर बंटवारा करना चाहता है तो वह नहीं कर सकता। टुकड़ों की रजिस्ट्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया हुआ है। नगर निगम में एनडीसी के लिए लगाई जाने वाली फाइलें बिना कारण रिजेक्ट कर दी जाती हैं। शिकायत करने जाएं तो अधिकारी सुनने तक को तैयार नहीं। - जय सिंह वर्मा, प्रधान, पड़ाव बाजार
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प्रॉपर्टी नाम कराने में परिवार पहचान पत्र बना बाधा
परिवार पहचान पत्र के नाम की नई मुसीबत डाल दी गई है। अगर किसी बुजुर्ग की मौत हो चुकी है, प्रॉपर्टी उसके नाम है तो उसके नाम का परिवार पहचान पत्र मांगा जाता है। अब जान गंवाने वाले आदमी का परिवार पहचान पत्र कहां से लाएं। सभी लोगों की फैमिली आईडी बनने का काम पूरा भी नहीं हुआ। इस कारण भी लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। फैमिली आईडी के नाम पर एनडीसी, रजिस्ट्री के काम रोके जा रहे हैं। - संदीप थरेजा, प्रधान, इंदिरा कॉलोनी मार्केट
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10 गज जगह पर लगा दिया 1.10 लाख टैक्स
मेरे नाम 10 गज की दुकान जहाजपुल एरिया में है। नगर निगम ने 1.10 लाख रुपये टैक्स बना दिया। 60 हजार रुपये सोलिड वेस्ट के दिखाए जा रहे हैं। 27 गज के गैराज पर 2.17 लाख रुपये टैक्स दिखाया है। इसी 27 गज के गैराज को नगर निगम के रिकॉर्ड में एक जगह 97 गज, एक जगह 167 गज दिखाया हुआ है। तीनों दस्तावेज मेरे पास हैं। अगर ठीक कराने जाएं तो नगर निगम में हमारी कोई सुनने को तैयार नहीं।
- नरेश वधवा, हिसार
प्रॉपर्टी सर्वे में 99 फीसदी गलतियां
याशी कंपनी का सर्वे 99 प्रतिशत गलत है। मकान के साइज, मकान के मालिक का नाम, एरिया गलत दिखाए हुए हैं। नगर निगम में फाइल लगाओ तो बिना कारण उसे रिजेक्ट कर दिया जाता है। फाइल लगाने के नाम पर सीएससी को 100 से लेकर 500 रुपये तक देने पड़ते हैं। नगर निगम के दफ्तर से मैनुअल फाइलें गायब हो जाती हैं। कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता। पैसा देकर सब काम हो जाते हैं। - सज्जन वर्मा, मिलगेट हिसार
निगम के रिकॉर्ड में मालिक का नाम नहीं होता चेंज
कोई प्रॉपर्टी बिकने पर हम टैक्स देते हैं, जिसका एक हिस्सा नगर निगम में भी आता है। इसके बाद भी निगम के रिकॉर्ड में मालिक का नाम चेंज नहीं होता। निगम में एनडीसी लेने के लिए वहां मालिक का नाम बदलवाने के लिए फिर फाइल लगानी पड़ती है। अलग से पैसे भी देने पड़ते हैं। जब रजिस्ट्री हो रही है तो वहां से पूरा रिकॉर्ड नगर निगम को भी मिलना चाहिए, जिसके आधार पर निगम में भी प्रॉपर्टी मालिक का नाम खुद ही बदलना चाहिए।
- संजय बजाज, उपप्रधान, सर्वजन विकास जागृति मोर्चा, हिसार
टुकड़ों की रजिस्ट्री खोली जाए
हम शहरी नगर निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता से मिले थे। उन्हें प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे, एनडीसी, टुकड़ों की रजिस्ट्री में आ रही समस्याओं पर अवगत भी कराया था। फिर भी कोई समाधान नहीं हुआ। मेयर गौतम सरदाना ने हमारी समस्या को सुना, मंत्री को इस बारे में पत्र भी लिखा। अब तक किसी तरह की राहत नहीं मिली। टुकड़ों की रजिस्ट्री खोली जाए। - शुभम वलेचा, हिसार
कन्वेंस डीड के नाम पर मांग रहे रिश्वत
नगर सुधार मंडल की शहर में करीब 15 हजार प्रॉपर्टी हैं। इसमें 5 हजार से अधिक की कन्वेंस डीड नहीं है। कन्वेंस डीड के नाम पर तहसील में 5 से 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगी जाती है। अगर पैसा न दो तो काम नहीं देते। फाइलों पर दर्जनों ऑब्जेक्शन लगा देते हैं। - दिनेश नारंग, हिसार
खसरा नंबर पुराने, दोबारा कराया जाए सर्वे
खसरा नंबर पुराने हो चुके हैं। 1990 में खसरा नंबर का सर्वे हुआ था। खसरा नंबर चार अंकों के बजाय अब तीन अंकों में आ चुके हैं। तीन दशक बाद हालात काफी बदल जाते हैं। खसरा सर्वे दोबारा किया जाना चाहिए।
- राजकुमार बजाज, हिसार
निगम एरिया में 40 साल से बसी कॉलोनियां भी अवैध
नगर निगम के बीचों-बीच 40 साल से बसी कॉलोनियां रिकॉर्ड में अवैध बताई जा रही हैं। 12 क्वार्टर एरिया की नेताजी कॉलोनी ऐसी ही है। यहां लोगों के पास रजिस्ट्री है, बिजली बिल, पानी का बिल, निगम के हाउस टैक्स भरने के बिल हैं। इसके चारों ओर दो किलोमीटर आगे तक की कॉलोनियां वैध हैं। फिर भी इन कॉलोनियों को अवैध दिखाया जा रहा है। किसी को बताएं तो कोई सुनने को तैयार नहीं। - वेदप्रकाश वर्मा, हिसार
जमीन के इंतकाल के नाम पर किया जा रहा परेशान
40 साल पहले खरीद-फरोख्त के इंतकाल आज तक नहीं हुए। इंतकाल के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। अगर सरकार राजस्व ले रही है तो इंतकाल रजिस्ट्री के साथ तुरंत होना चाहिए। इंतकाल के नाम पर लोगों को परेशान कर पैसा वसूला जा रहा है। ऑनलाइन से भ्रष्टाचार खत्म होने की बात कही जा रही है। हकीकत में इससे भ्रष्टाचार कई गुना बढ़ गया है। - राजकुमार वधवा, हिसार

अपने नाम दर्ज प्लॉट का आधा हिस्सा नहीं बेच सकते
शहरी एरिया में जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर बहुत परेशानी आ रही है। अगर आप 200 गज के प्लॉट के मालिक हैं। आप किसी मुसीबत या जरूरत के चलते अपने प्लॉट का 100 गज का हिस्सा बेचना चाहते हैं तो वह नहीं बेच सकते। आपको पूरा प्लॉट बेचना पड़ेगा, उसके बाद फिर से 100 गज की खरीद दिखानी पड़ेगी। - अनिल गांधी , हिसार
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