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मां की ममता ने बेटी को बनाया चैंपियन

Mon, 07 Dec 2015 01:18 AM IST
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो
अमर उजाला हिसार/ब्यूरो Updated Mon, 07 Dec 2015 01:18 AM IST
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Mothers support Made Deeksha Boxing Champion

छोटी सी उम्र में सिर से पिता का साया उठने के बाद मां की ममता के सहारे एक बेटी बॉक्सिंग चैंपियन बनी है। पिछले दो साल से लगातार यह बेटी ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप जीतकर बेटियों का मान बढ़ा रही है।

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हम बात कर रहे हैं, 2008 में ओलंपिक में खेलने गए बॉक्सर अखिल कुमार से प्रेरित होकर 2011 में बॉक्सिंग को प्रोफेशन के तौर पर चुनने वाली दीक्षा धनखड़ की।

दूसरों के ताने सुनने के बाद भी दीक्षा के हौसले को मां ने कायम रखा और उसे बेहतर बॉक्सर बनने के लिए प्रोत्साहित किया।

चार सालों से हिसार के अखिल कुमार बॉक्सिंग क्लब में मुक्केबाजी के पंच सीख रही दीक्षा ने विपरीत हालातों में भी अपने संघर्ष के दम पर कई चैंपियनशिप जीती हैं।
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मुश्किल खड़ी से उबरकर दिखाया हौसला
आठ-नौ साल की उम्र में पिता के निधन के साथ ही दीक्षा का परिवार टूट गया। एक बार तो हालात गंभीर हो गए। मगर मां ने खेतीबाड़ी के साथ-साथ परिवार को भी संभाला और बेटे की पढ़ाई के साथ-साथ बेटी के हुनर को भी हौसला दिया।
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मूलरूप से रोहतक के गांव करौथा की निवासी होने के बावजूद बेटी को बॉक्सिंग के गुर सिखाने के लिए हिसार के बॉक्सिंग क्लब में दाखिला दिलवाया।

2011 में ही लड़ी पहली फाइट   
भूगोल से एमए कर रही दीक्षा ने 2011 में बॉक्सिंग की शुरुआत की और उसी साल में पहली बड़ी फाइट पटियाला में हुए जूनियर नेशनल चैंपियनशिप के दौरान लड़ी।

इसमें अपना शानदार प्रदर्शन करते हुए दीक्षा ने गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और अगले साल भी इसी चैंपियनशिप की विजेता बनी।

अब सरकार से नौकरी की दरकार
मुश्किल हालातों से जूझ रही दीक्षा धनखड़ को फिलहाल सरकार से नौकरी की दरकार है। दीक्षा कहती है कि अपने बॉक्सिंग के हुनर को अब और ज्यादा निखारने तथा परिवार का भी पालन पोषण करने के लिए उसे नौकरी की जरूरत है।

नौकरी मिलने के बाद उसकी पारिवारिक चिंता कम होगी। जिससे वो अपने खेल पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगी।

यह जीते ईनाम
- सितंबर 2011 में हुई जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता
- सितंबर 2012 में हुई जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता
- जुलाई 2013 के सर्बिया इंटरनेशनल टूर में कजाकिस्तान को हराकर सिल्वर मेडल जीता
- सितंबर 2013 में बुलगारिया में हुई यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची
- 2014 में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप जीती
- 2015 में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप जीती

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