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क्षमता से दोगुना से भी अधिक बच्चे, कर्मियों की संख्या कम
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हमले में घायल वार्डर तलविंदर।
- फोटो : Hisar
हिसार। बरवाला रोड पर स्थित बाल सुधार गृह में 44 बंदियों को रखने की जगह है, लेकिन यहां 97 बंदी रखे जा रहे थे, जो कि क्षमता से भी दोगुना से अधिक थे। इसके अलावा यहां तैनात कर्मियों की बात की जाए तो वे भी बंदियों की संख्या को देखते हुए बहुत कम हैं।
एक समय में चार वार्डर ही ड्यूटी पर रहते हैं। ऐसे में तीन वार्डर अंदर व एक बाहर रहता है। सोमवार को भी हुई वारदात के समय तीन वार्डर अंदर व एक बाहर था। फरार हुए बंदियों में से अधिकतर रोहतक और झज्जर के बताए जा रहे हैं। इनमें से 8 हत्या के आरोप में बंद हैं व बाकी हत्या के प्रयास और दुष्कर्म सहित कई संगीन मामलों में बंद हैं। बंदियों की यहां क्षमता से अधिक संख्या बारे पूछा गया तो वहां वार्डर ने बताया कि कोरोना काल के चलते कई मामलों में अदालत से फैसले के इंतजार में हैं। जिस कारण वे बंदी भी यहीं होने पर संख्या 97 पहुंची। वहीं सीसीटीवी की भी यहां संख्या 5 से 6 है। इनमें सिर्फ दो सीसीटीवी ही बाहर की तरफ लगे हैं। वहीं वारदात की सूचना मौके पर तैनात वार्डर विजेंद्र सिंह की तरफ से सदर थाना पुलिस को दी गई। इसके बाद सदर थाना पुलिस के साथ-साथ एसपी बलवान सिंह राणा, एएसपी उपासना यादव व सातों डीएसपी भी मौके पर पहुंचे।
वार्डर विजेंद्र ने बताया कि बंदियों को पकड़ने के लिए गेट के बाहर तक भी भागे, लेकिन वह सभी मौके से फरार हो गए। उन्होंने बताया कि इस बीच उन्हें भी पीठ पर चोट आईं। इस दौरान बाल सुधार गृह के परिसर में भागने वाले बंदियों की चप्पलें भी पड़ी दिखीं। हालांकि पुलिस इस मामले में अभी खुलकर कुछ भी नहीं कह रही, लेकिन जिस तरह से तीन बैरक के बंदी एक साथ भागे, ऐसे में यह मामला पूरा प्री-प्लान लग रहा है। मामले में बालसुधार गृह के अधीक्षक भी मीडिया के सामने नहीं आए। वहीं सूचना मिलते ही फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए।
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बंदियों ने छीनी बाइक
जानकारी के अनुसार बाल सुधार गृृह से फरार होते ही बंदियों ने कई लोगों की बाइक भी छीनी। पुलिस की ओर से पूरी रात सड़कों की खाक छानी गई। एसपी बलवान सिंह राणा भी स्वयं रात भर सड़कों पर दौड़ते रहे और इस दौरान पुलिस की ओर से सड़क पर घूमने वाले हर संदिग्ध से पूछताछ की गई।
चार चार घंटे शिफ्ट में ड्यूटी
मामले में वार्डर विजेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि यहां वार्डर की चार-चार घंटे की शिफ्ट होती है। उनकी शिफ्ट शाम सात बजे खत्म होनी थी। उससे पहले 6 बजे ये वारदात हो गई।
जांच की जा रही है
घटना करीब 6 बजे की है। अभी जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज भी देखी जाएगी।
-इंस्पेक्टर मनोज कुमार, सदर थाना प्रभारी, हिसार।
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खिड़की तोड़कर लकड़ियों से किया हमला
हिसार। हमले के दौरान मौजूद चारों वार्डर से अमर उजाला टीम ने बात की। चारों ने इस वारदात को प्री-प्लान बताया।
यह बोले वार्डर तलविंदर
वार्डर तलविंदर ने बताया कि हर रोज की तरह शाम को चार से 6 बजे तक कुछ देर के लिए टहलने और रोटी देने के लिए जेल में बैरक खोले जाते हैं। आज शाम को भी करीब 6 बजे जब रोटी देने के लिए बैरक खोले तो उस दौरान अचानक बच्चों ने रोटी खाते समय उस पर हमला कर दिया।
यह बोले वार्डर चंद्रकांत
वार्डर चंद्रकांत ने बताया कि बच्चों ने बैरक में लगी खिड़कियों को तोड़कर उनकी लकड़ियों से हमला किया। उन पर कीलें भी लगी थीं। हमला पहले तलविंदर पर किया गया। चंद्रकांत ने बताया कि इस दौरान वह कुछ दूरी पर मौजूद था। जब वह तलविंदर की मदद को गया तो बच्चों ने उस पर भी हमला कर दिया।
यह बोले वार्डर सुनील
वार्डर सुनील से बात करनी चाही तो उन्होंने यही कहा कि मुझे घबराहट हो रही है। मैं कुछ नहीं बोल सकता।
यह बोले वार्डर विजेंद्र सिंह
वार्डन विजेंद्र सिंह ने बताया कि एक नंबर व पांच नंबर बैरक को छोड़कर दो से चार नंबर बैरक तक में से ये बच्चे भागे। उन्होंने बताया कि बैरक नंबर पांच में यहां आने वाले नए बच्चों को रखा जाता है। विजेंद्र ने बताया कि भागने वाले 18 बच्चे थे। उनमें से एक को मौके पर ही काबू कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में यही सामने आ रहा है कि प्लान उसी के द्वारा बनाया गया था।
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एक समय में चार वार्डर ही ड्यूटी पर रहते हैं। ऐसे में तीन वार्डर अंदर व एक बाहर रहता है। सोमवार को भी हुई वारदात के समय तीन वार्डर अंदर व एक बाहर था। फरार हुए बंदियों में से अधिकतर रोहतक और झज्जर के बताए जा रहे हैं। इनमें से 8 हत्या के आरोप में बंद हैं व बाकी हत्या के प्रयास और दुष्कर्म सहित कई संगीन मामलों में बंद हैं। बंदियों की यहां क्षमता से अधिक संख्या बारे पूछा गया तो वहां वार्डर ने बताया कि कोरोना काल के चलते कई मामलों में अदालत से फैसले के इंतजार में हैं। जिस कारण वे बंदी भी यहीं होने पर संख्या 97 पहुंची। वहीं सीसीटीवी की भी यहां संख्या 5 से 6 है। इनमें सिर्फ दो सीसीटीवी ही बाहर की तरफ लगे हैं। वहीं वारदात की सूचना मौके पर तैनात वार्डर विजेंद्र सिंह की तरफ से सदर थाना पुलिस को दी गई। इसके बाद सदर थाना पुलिस के साथ-साथ एसपी बलवान सिंह राणा, एएसपी उपासना यादव व सातों डीएसपी भी मौके पर पहुंचे।
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वार्डर विजेंद्र ने बताया कि बंदियों को पकड़ने के लिए गेट के बाहर तक भी भागे, लेकिन वह सभी मौके से फरार हो गए। उन्होंने बताया कि इस बीच उन्हें भी पीठ पर चोट आईं। इस दौरान बाल सुधार गृह के परिसर में भागने वाले बंदियों की चप्पलें भी पड़ी दिखीं। हालांकि पुलिस इस मामले में अभी खुलकर कुछ भी नहीं कह रही, लेकिन जिस तरह से तीन बैरक के बंदी एक साथ भागे, ऐसे में यह मामला पूरा प्री-प्लान लग रहा है। मामले में बालसुधार गृह के अधीक्षक भी मीडिया के सामने नहीं आए। वहीं सूचना मिलते ही फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए।
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बंदियों ने छीनी बाइक
जानकारी के अनुसार बाल सुधार गृृह से फरार होते ही बंदियों ने कई लोगों की बाइक भी छीनी। पुलिस की ओर से पूरी रात सड़कों की खाक छानी गई। एसपी बलवान सिंह राणा भी स्वयं रात भर सड़कों पर दौड़ते रहे और इस दौरान पुलिस की ओर से सड़क पर घूमने वाले हर संदिग्ध से पूछताछ की गई।
चार चार घंटे शिफ्ट में ड्यूटी
मामले में वार्डर विजेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि यहां वार्डर की चार-चार घंटे की शिफ्ट होती है। उनकी शिफ्ट शाम सात बजे खत्म होनी थी। उससे पहले 6 बजे ये वारदात हो गई।
जांच की जा रही है
घटना करीब 6 बजे की है। अभी जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज भी देखी जाएगी।
-इंस्पेक्टर मनोज कुमार, सदर थाना प्रभारी, हिसार।
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खिड़की तोड़कर लकड़ियों से किया हमला
हिसार। हमले के दौरान मौजूद चारों वार्डर से अमर उजाला टीम ने बात की। चारों ने इस वारदात को प्री-प्लान बताया।
यह बोले वार्डर तलविंदर
वार्डर तलविंदर ने बताया कि हर रोज की तरह शाम को चार से 6 बजे तक कुछ देर के लिए टहलने और रोटी देने के लिए जेल में बैरक खोले जाते हैं। आज शाम को भी करीब 6 बजे जब रोटी देने के लिए बैरक खोले तो उस दौरान अचानक बच्चों ने रोटी खाते समय उस पर हमला कर दिया।
यह बोले वार्डर चंद्रकांत
वार्डर चंद्रकांत ने बताया कि बच्चों ने बैरक में लगी खिड़कियों को तोड़कर उनकी लकड़ियों से हमला किया। उन पर कीलें भी लगी थीं। हमला पहले तलविंदर पर किया गया। चंद्रकांत ने बताया कि इस दौरान वह कुछ दूरी पर मौजूद था। जब वह तलविंदर की मदद को गया तो बच्चों ने उस पर भी हमला कर दिया।
यह बोले वार्डर सुनील
वार्डर सुनील से बात करनी चाही तो उन्होंने यही कहा कि मुझे घबराहट हो रही है। मैं कुछ नहीं बोल सकता।
यह बोले वार्डर विजेंद्र सिंह
वार्डन विजेंद्र सिंह ने बताया कि एक नंबर व पांच नंबर बैरक को छोड़कर दो से चार नंबर बैरक तक में से ये बच्चे भागे। उन्होंने बताया कि बैरक नंबर पांच में यहां आने वाले नए बच्चों को रखा जाता है। विजेंद्र ने बताया कि भागने वाले 18 बच्चे थे। उनमें से एक को मौके पर ही काबू कर लिया गया। प्रारंभिक जांच में यही सामने आ रहा है कि प्लान उसी के द्वारा बनाया गया था।

हमले में घायल वार्डर चंद्रकांत।- फोटो : Hisar

हमले में घायल वार्डर सुनील।- फोटो : Hisar

जानकारी देते हमले में घायल वार्डन विजेंद्र सिंह।- फोटो : Hisar