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Hisar News: बालसमंद में 15 दिनों में 150 से अधिक भैंस और कटड़ों की मौत
Sun, 04 Feb 2024 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 04 Feb 2024 12:33 AM IST
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बालसमंद। जिले के गांव बालसमंद में कई दुधारू भैंसों की मौत हो चुकी है। इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 15 दिनों में 150 से अधिक भैंस और कटड़े मर चुके हैं। मौत से पहले भैंसों में कंपन हुई है।
स्थानीय पशुपालक मदन ने बताया कि बीती 10 जनवरी को उनकी भैंस में अचानक कंपन हुई, तो उसने भैंस को बुखार की दवा दिलाई। इससे आराम नहीं हुआ तो अगले दिन गांव के सरकारी पशुचिकित्सक से इंजेक्शन लगवा कर दवा दी। इसके कुछ घंटों बाद पशु की मौत हो गई। इसके तीन दिन बाद दो छोटे पशुओं की भी मौत हो गई। मदन ने डॉक्टर से पशुओं की मौत का कारण पूछा तो इसे वायरस बताया गया।
इसी प्रकार गांव में टीटा गोरखपुरिया की पांच भैंस, बादल की दो भैंस, रतन की एक भैंस और तीन छोटे कटड़े, ओमप्रकाश की दो भैंस और एक कटड़ा, प्रकाश के दो पशु, सरजीत के दो पशु, रतन व्यापारी के चार पशु, बलराज के एक पशु सहित 150 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। गांव में लगातार पशुओं की मौत के बावजूद पशुपालन एवं डायरी विभाग इसके कारणों का पता नहीं लगा पाया है।
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पशुपालकों ने की मुआवजे की मांग
ग्रामीण कुलदीप लौरा ने बताया कि उनके एक पशु की बुधवार को मौत हुई है। वहां रोज पशु मर रहे हैं। एक-एक घर में चार-चार पशुओं की मौत से पशुपालकों की आय के साधन खत्म हो गए हैं। एक लाख से अधिक कीमत की भैंस मर जाने से आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीण मदन, सरजीत, रतन, बलराज सहित अन्य पशुपालकों ने उचित मुआवजे की मांग की है।
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गांव में 150 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है, जिनमें भैंस और कटड़े शामिल हैं। इसमें पशु को ठंड लगती है। दवा, इंजेक्शन देने के बाद पशु चारा खाने लगते हैं। इसके बावजूद अचानक उनकी मौत हो जाती है। - मंजू, सरपंच बालसमंद।
गांव बालसमंद में पशुओं की लगातार हो रही मौत की सूचना मिली है। गांव जाकर पशुओं की मौत का कारण जानेंगे। पशुपालकों को जागरूक कर विभाग की ओर से समाधान के उचित प्रयास किए जाएंगे। - डाॅ. सुभाष जांगड़ा, डीडीए, पशुपालन विभाग, हिसार।
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स्थानीय पशुपालक मदन ने बताया कि बीती 10 जनवरी को उनकी भैंस में अचानक कंपन हुई, तो उसने भैंस को बुखार की दवा दिलाई। इससे आराम नहीं हुआ तो अगले दिन गांव के सरकारी पशुचिकित्सक से इंजेक्शन लगवा कर दवा दी। इसके कुछ घंटों बाद पशु की मौत हो गई। इसके तीन दिन बाद दो छोटे पशुओं की भी मौत हो गई। मदन ने डॉक्टर से पशुओं की मौत का कारण पूछा तो इसे वायरस बताया गया।
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इसी प्रकार गांव में टीटा गोरखपुरिया की पांच भैंस, बादल की दो भैंस, रतन की एक भैंस और तीन छोटे कटड़े, ओमप्रकाश की दो भैंस और एक कटड़ा, प्रकाश के दो पशु, सरजीत के दो पशु, रतन व्यापारी के चार पशु, बलराज के एक पशु सहित 150 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। गांव में लगातार पशुओं की मौत के बावजूद पशुपालन एवं डायरी विभाग इसके कारणों का पता नहीं लगा पाया है।
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पशुपालकों ने की मुआवजे की मांग
ग्रामीण कुलदीप लौरा ने बताया कि उनके एक पशु की बुधवार को मौत हुई है। वहां रोज पशु मर रहे हैं। एक-एक घर में चार-चार पशुओं की मौत से पशुपालकों की आय के साधन खत्म हो गए हैं। एक लाख से अधिक कीमत की भैंस मर जाने से आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीण मदन, सरजीत, रतन, बलराज सहित अन्य पशुपालकों ने उचित मुआवजे की मांग की है।
गांव में 150 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है, जिनमें भैंस और कटड़े शामिल हैं। इसमें पशु को ठंड लगती है। दवा, इंजेक्शन देने के बाद पशु चारा खाने लगते हैं। इसके बावजूद अचानक उनकी मौत हो जाती है। - मंजू, सरपंच बालसमंद।
गांव बालसमंद में पशुओं की लगातार हो रही मौत की सूचना मिली है। गांव जाकर पशुओं की मौत का कारण जानेंगे। पशुपालकों को जागरूक कर विभाग की ओर से समाधान के उचित प्रयास किए जाएंगे। - डाॅ. सुभाष जांगड़ा, डीडीए, पशुपालन विभाग, हिसार।