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मिट्टी में मिले सपने, बचे तो सिर्फ आंसू...

Thu, 23 Jun 2016 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार Updated Thu, 23 Jun 2016 12:10 AM IST
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Mill gate, Millgate in Hisar, JCB ride on 122 Families on road, Hisar
मिट्टी में मिले सपने, आंखों में आंसू - फोटो : bureau

मिलगेट एरिया से ढहाये गए मकान ही नहीं उजड़े, लोगों की खुशियां और सपने तक उजड़ गए। लोगों ने वर्षों पहले तिनका-तिनका जोड़कर आशियाने बनाए थे। बुधवार को तिनके की तरह 122 घरों को गिरा दिया गया।

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मकान गिरते रहे और महिलाओं के आंसू बहते रहे। बेबस महिलाओं ने कहा कि सरकार ने हमें उजाड़ दिया। घर तोड़कर हमें सड़क पर ला दिया। अपने बच्चों को लेकर कहां जाएं। अधिकांश बुजुर्ग आंखों में आंसू लिए कह रहे थे, अपनी जिंदगी की सारी जमा-पूंजी इन घरों में लगा दी। हमारी खुशियां, सपने, बच्चों का भविष्य सब इन घरों के साथ जुड़ा हुआ था, लेकिन अब सब मिट्टी में मिला दिया।  
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40 सालों से बुने सपनों को मिट्टी में मिलाया

मिलगेट कालोनी में 122 घर बने हुए थे। इनमें तकरीबन 1300 लोग रहते थे। तकरीबन 40 पहले बसी इस कॉलोनी में अधिकांश दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोग रहते हैं। इनके आशियाने ढहाए जाने से इन लोगों को दो वक्त की रोटी भी नसीब होना मुश्किल हो गई है, लेकिन प्रशासन ने इन लोगों के आशियानों पर पीला पंजा चला 40 सालों से बुने सपनों को मिट्टी में मिला दिया।
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नम आंखों से समेटते रहे मलबा
मिलगेट कॉलोनी में एक तरफ तो प्रशासन का पीला पंजा मकानों को ढहाता रहा। दूसरी तरफ तोड़े गए मकानों से लोग नम आंखों से मलबा समेटने में लगे रहे। प्रशासन के सामने बेबस हुई एक महिला कभी अपने घर से तवा उठा रही थी तो कभी मकान ढहाए जाने से गिरी खिड़की को समेटने की कोशिश कर रही थी।

तीन दिन की नवजात हुई बेघर
मिल गेट एरिया कालोनी में रहने वाली पूजा को तीन दिन पहले ही लड़की हुई है, लेकिन जन्म लेने के तीन बाद ही इस बच्ची के सिर से छत की छाया हट गई। बेघर हुए पूजा के ससुर राजाराम ने बताया कि इस कॉलोनी में 35 साल से रह रहे थे।

लस्सी बेचकर अपने बच्चों का पेट पाल रहा था, लेकिन प्रशासन ने हमें बेघर कर दिया है। राजाराम ने नम आंखों से बताया कि उसकी पुत्रवधू और नवजात बच्ची के साथ उनकी चार बेटियां भी हैं, जो शादी के लायक हो गई हैं। अब सड़क पर आने से उन्हें बहू-बेटियों की तो चिंता सता ही रही है। साथ ही तीन दिन की बच्ची को लेकर भी दर-दर की ठोकरें खाने का मजबूर हो गए हैं।

घर टूटा तो शादी भी टूटी
इसी कॉलोनी में रहने वाले शीशपाल ने बताया कि उसके 22 वर्षीय बेटे की सगाई भी हो चुकी थी। कुछ दिन बाद ही शादी होने वाली थी, लेकिन मकान तोड़े जाने से उसके बेटे के ससुराल वालों ने रिश्ता भी तोड़ दिया। ससुराल वालों का कहना है कि बिना घर के हम बेटी को कैसे ब्याह दे।

15 सदस्यों का परिवार हुआ बेघर
इसी कॉलोनी में रहने वाली 15 सदस्यों के परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला भगवानी देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। भगवानी देवी ने बताया कि उनकी पांच पोतियां हैं, जो शादी के लायक हो गई हैं। किसी तरह दिहाड़ी-मजदूरी करके गुुजर-बसर कर रहे थे, लेकिन इस सरकार ने तो हमें सड़क पर रहने को मजबूर कर दिया है।

मकान तो टूटा, साथ में हड्डी भी टूटी
मकान तोड़े जाने से भगवानी देवी के परिवार को मकान के साथ और भी काफी दुख उठाना पड़ा। उसके 17 साल के पोते अमर के हाथ की हड्डी भी उनके मकान के साथ ही टूट गई। हुआ यूं कि अमर अपने टूटे मकान की दीवार से ईंटें उतार रहा था।

अचानक दीवार के गिरने से वह भी जमीन पर गिर पड़ा, गिरने से उसके हाथ की बाएं हाथ की हड्डी टूट गई, लेकिन रोता हुआ अमर कह रहा था, हड्डी तो जुड़ जाएगी, मकान कहां से बनाएंगे।

दवाई के लिए कहां से लाएं 200 रुपये
मिलगेट कॉलोनी में रहने वाले मुकेश का भी रो-रोकर बुरा हाल था। मुकेश ने चार दिन पहले ही कर्जे का पैसा उठाकर अपने युवा लड़के का घुटने का ऑपरेशन करवाया था, लेकिन बुधवार को उसका मकान तोड़े जाने के बाद अपने बेटे को सड़क पर लिटाने को मजबूर हो गया है।


मुकेश ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर है। उसका एक ही बेटा है। उसकी पत्नी 16 साल पहले ही भगवान को प्यारी हो चुकी है। घर टूटने से बेटे की दवाई के भी लाले पड़ गए हैं। मुकेश ने बताया कि उसके बेटे के  रोजाना 200 रुपये की दवाई चाहिए, लेकिन अब घर ही नहीं है तो कहां से उसका इलाज कराएं।

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