स्ट्रीट लाइट घोटाला: हांसी नगर परिषद के एमई और सिसाय नगर पालिका के जेई सस्पेंड, दो अन्य अधिकारी भी नपे
बरवाला नगर पालिका में चार करोड़ रुपये का स्ट्रीट लाइट घोटाला हुआ। बरवाला के पार्षद जगदीश गुलाटी ने इस संदर्भ में गृह एवं शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मंत्री अनिल विज को एक लिखित शिकायत भी दी थी।
विस्तार
बरवाला नगर पालिका में चार करोड़ रुपये का स्ट्रीट लाइट घोटाला हुआ। हांसी नगर परिषद के एमई जयवीर सिंह और सिसाय नगर पालिका के जेई संदीप कुमार पर वहां करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का टेंडर अपने चहेतों को देने का आरोप लगा था। मामला सुर्खियों में आने के बाद नगर निगम हिसार के अधिकारियों ने बरवाला नपा का रिकॉर्ड तलब किया।
इसके अलावा 20 जून 2019 के बाद जो भी विकास कार्य हुए हैं, उनका पूरा रिकॉर्ड नगर निगम हिसार के कार्यकारी अभियंता को सौंपा गया। बरवाला के पार्षद जगदीश गुलाटी ने इस संदर्भ में गृह एवं शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मंत्री अनिल विज को एक लिखित शिकायत भी दी थी। इस दौरान एमई जयवीर सिंह और सिसाय नगर पालिका के जेई संदीप कुमार बरवाला नगर पालिका में ही कार्यरत थे।
एमई पर बड़े पैमाने पर घपले करने का आरोप
पार्षद जगदीश गुलाटी ने नगरपालिका बरवाला के एमई पर बड़े पैमाने पर घपले करने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि स्थानीय निकाय विभाग के डायरेक्टर द्वारा जारी पत्र के अनुसार सभी टेंडर निक ई प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर ही लगाए जा सकते हैं। मगर नगर पालिका ने तमाम नियमों को ताक पर रखते हुए करोड़ों रुपये के टेंडर पुराने सिस्टम के अनुसार ही लगा दिए, जबकि सभी नगर पालिकाओं और निगमों में उपरोक्त पोर्टल काफी पहले से ही शुरू हो चुका था।
चूंकि इस पोर्टल में मिलीभगत की गुंजाइश न के बराबर है। पुराने सिस्टम में दस्तावेज कार्यालय में ही जमा करवाने होते हैं। इसमें कोई दूसरी फर्म आती है तो उसे पहले रिक्वेस्ट द्वारा फिर दबाव डालकर और फिर भी ना माने तो उसे कुल राशि का दो से तीन प्रतिशत देकर एक पत्र लिखवा लिया जाता है कि उसके दस्तावेज समय पर नहीं पहुंचे। इसलिए यह टेंडर खोल दिया जाए, उसे कोई आपत्ति नहीं है। इस प्रकार नगर पालिका बरवाला का एक एमई नगर पालिका में मनमाने तरीके से लंबे समय से मिलीभगत का खेल खेलता रहा है।
विज ने दिए थे जांच के आदेश
पार्षद ने आरोप लगाया था कि इस अधिकारी ने भ्रष्टाचार की तमाम हदें पार कर दी। इसलिए इसके सभी कार्यों की पारदर्शी तरीके से जांच की जाए और नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाए। इस पत्र के आधार पर अनिल विज ने जांच के आदेश दिए थे। अब उसी मामले में यह जांच जिला नगर आयुक्त को सौंपी गई थी। उन्होंने जांच के लिए मुख्य अभियंता नगर निगम हिसार को नियुक्त किया। इसके बाद दो सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई थी। इसमें सहायक अभियंता प्रवीण गंगवानी और कनिष्ठ अभियंता नगर निगम हिसार अंकुर को नियुक्त किया गया था। कार्यकारी अभियंता ने मामले की शिकायत करने वाले पार्षद जगदीश गुलाटी को भी 8 फरवरी को शिकायत से संबंधित दस्तावेज लेकर प्रस्तुत होने के आदेश दिए थे।