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न घबराई और न ही डगमगाई, खुद संभली और बच्चों को भी संभाला

Sun, 08 May 2016 01:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला बहादुरगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला बहादुरगढ़ Updated Sun, 08 May 2016 01:07 AM IST
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Mdrrs - Day Special : Neither nervous nor waffle , and children themselves took a tab
मडर्स डे - फोटो : Bureau
शहर के वार्ड-25 मेला ग्राउंड स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के पास स्थित कालोनी में रहने वाली 58 वर्षीय महिला उर्मिला ने अपने जीवन में ऐसा संघर्ष किया कि वे बहुत सी महिलाओं के लिए आज प्रेरणा स्त्रोत हैं। उन्होंने अपने पति के निधन के बाद न केवल खुद को संभाला बल्कि अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देकर इस काबिल बनाया कि आज वे खुद सरकारी विभाग व कंपनियों में कर्मचारी है और उनकी तीनों लड़की व एक लड़का भी नौकरी कर रहे हैं।
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ये संघर्षशील महिला हाल फिलहाल एसडीएम आफिस कार्यालय में रिकार्ड रूम में क्लर्क हैं। जिन्होंने अपनी पूरी सर्विस ईमानदारी से कराई, अब उनकी बेटी भी इसी आफिस में क्लर्क के पद पर कार्यरत है और चार वर्ष से मां-बेटी एक साथ आफिस आती-जाती हैं। प्रदेश में इस तरह का संजोग बहुत कम देखने को मिलेगा की मां-बेटी एक ही सरकारी दफ्तर में काम करें। हर स्थान पर उर्मिला देवी ने अपनी जिम्मेदारी निभाई, कर्मचारियों की मांग को लेकर एक बार वे अपनी साथी कर्मचारियों के साथ जेल में भी गई। लेकिन उन्होंने संघर्ष से कभी मुंह नहीं मोड़ा।
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ये है उर्मिला के संघर्ष की कहानी

जिस समय वर्ष जून 1990 में महिला उर्मिला के पति महेंद्र सिंह का निधन हुआ, उस समय ये मात्र 29 वर्ष की थी। उनके  चार बच्चे थे, जिनमें बड़ा लड़का 10 वर्ष का था व तीन छोटी लड़कियां, सबसे छोटी लड़की की उम्र करीब सवा साल ही थी। इनके पति बहादुरगढ़ वाटर वर्क्स में पंप आपरेटर थे। उनके निधन के बाद उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। उर्मिला का खुद के परिवार का भी स्पोर्ट भी नहीं मिला। अकेली ने ही खुद संघर्ष किया। पति के निधन के बाद उनके पति के परिवार ने भी मुंह मोड़ लिया। लेकिन वे न तो घबराई और न ही डगमगाई। उर्मिला देवी आठवीं कक्षा तक पढ़ी हुई थी।
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उन्होंने संघर्ष करते हुए अपने परिवार को संभाला और उन्होंने अपनी पढ़ाई 10वीं कक्षा तक पूरी की और प्रदेश सरकार की एक्सग्रेसिया स्कीम के तहत वर्ष अक्तूबर 1990 में नौकरी पर लगी। पड़ोसियों के भरोसे बच्चों को घर पर छोड़कर नौकरी करती। आफिस से लौट कर बच्चों को संभालती। इस तरह से उन्होंने अपने परिवार को संभालते हुए तीनों बेटियों की उच्च शिक्षा की ठानी और मन में ठाना की इस तरह की आपदा कभी भी उनकी बेटियों पर न आए, इसलिए उन्हें उच्च शिक्षा दिलाई। उनकी मेहनत रंग भी लाई। तीनों बेटियों को मास्टर डिग्री का कोर्स कराया। बड़ी बेटी का चयन जेबीटी अध्यापक के पद पर हुआ है और एक बेटी ने फाइनेंस में एमबीए कर प्राइवेट जॉब कर रही है। जबकि मौजूदा हाल में उनकी सबसे छोटी बेटी बहादुरगढ़ एसडीएम आफिस में एमकॉम पास कर बिल क्लर्क के पद पर कार्यरत है। पिछले 4 वर्षों से मां बेटी एक ही आफिस में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं।




उनका बड़ा लड़का मानेसर स्थित होंडा कंपनी में सीनियर आपरेटर के पद पर कार्यरत है। मौजूदा हाल में संघर्षशील महिला उर्मिला देवी के चारों बच्चे अच्छे से वेल सेट हैं। 31 मई को इस एसडीएम आफिस में ये महिला अपने पद से सेवानिवृत्त होंगी। उर्मिला का कहना है कि परिस्थितियों चाहे कैसी भी हो हमें उन्हें स्वीकारते हुए संघर्ष करना चाहिए। बेटियों को हाई शिक्षा बेहद जरूरी है, इसलिए मैने शुरू से ही अपने सभी बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का संकल्प लिया। उच्च शिक्षा के कारण ही मेरे सभी बच्चे नौकरी कर रहे हैं।
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