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कैमरी रोड फाटक : आरओबी की लॉन्चिंग ड्राइंग को नहीं मिली मंजूरी, पहले बनेगा अंडरपास
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कैमरी रोड रेलवे फाटक पर अंडरपास के निर्माण कार्य में लगे मजदूर।
- फोटो : Hisar
हिसार। कैमरी रोड रेलवे फाटक पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) में रेलवे ट्रैक के ऊपर बनने वाले हिस्से की लॉन्चिंग ड्राइंग को मंजूरी नहीं है। करीब साढ़े चार माह से लॉन्चिंग ड्राइंग रेलवे के पास ही अटकी हुई है। इसे देखते हुए एजेंसी ने पहले अंडरपास का का निर्माण कार्य ही पूरा करने का फैसला किया है। एजेंसी की मानें तो एक माह में अंडरपास का निर्माण पूरा कर दिया जाएगा।
बता दें कि इस साल के पहले माह में एजेंसी ने रेलवे ट्रैक के ऊपर बनने वाले हिस्से की लॉन्चिंग ड्राइंग रेलवे को भेजी थी। इस ड्राइंग के हिसाब से इस हिस्से का काम पूरा किया जाएगा। रेलवे की तरफ से क्लोजर (किस-किस दिन ट्रेनों का आवागमन बाधित रहेगा) का शेड्यूल भी लॉन्चिंग ड्राइंग के हिसाब से ही दिया जाएगा।
अंडरपास का 40 मीटर का हिस्सा बनाना बाकी
आरओबी के साथ बनने वाले अंडरपास की लंबाई 240 मीटर है। इसमें से सिर्फ 40 मीटर का हिस्सा ही बनना बाकी है। इसकी चौड़ाई 4 मीटर व ऊंचाई 2.5 मीटर होगी।
अगस्त तक पूरा किया जाना है काम, लागत 40 करोड़ रुपये की
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने की समय सीमा बढ़ाकर अगस्त की जा चुकी है। इससे पहले यह दिसंबर 2021 तक पूरा किया जाना था। रेलवे की तरफ से ड्राइंग मंजूर करने में टाइम लगने और पिलरों की संख्या 9 से बढ़ाकर 21 किए जाने का तर्क देते हुए एजेंसी ने प्रोजेक्ट की समय सीमा को बढ़वाया है। वहीं इसकी लागत साढ़े 24 करोड़ से बढ़कर 40 करोड़ रुपये हो चुकी है।
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बो स्टिंग आकार में बनेगा बीच का हिस्सा
इस आरओबी में रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ बनने वाले पिलरों के बीच की दूरी करीब 76 मीटर है, जो काफी ज्यादा है। इस कारण से रेलवे वाले हिस्से को बो स्टिंग गर्डर तकनीक से बनाया जाएगा। इस तकनीक में सिर्फ दो ही स्टील गार्डर रखे जाएंगे, जो करीब 750 टन वजनी होंगे। इन दो गार्डर पर ही स्लैब का निर्माण किया जाएगा। इस स्लैब को स्पोर्ट देने के लिए बो स्ट्रिंग आकार का स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। यह आरओबी करीब 580 मीटर लंबा होगा। कैरिज वे की चौड़ाई 9.5 मीटर होगी, जिस पर वाहन चल सकेंगे। इसके अलावा एक तरफ डेढ़ मीटर का फुटपाथ बनाया जाएगा।
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बता दें कि इस साल के पहले माह में एजेंसी ने रेलवे ट्रैक के ऊपर बनने वाले हिस्से की लॉन्चिंग ड्राइंग रेलवे को भेजी थी। इस ड्राइंग के हिसाब से इस हिस्से का काम पूरा किया जाएगा। रेलवे की तरफ से क्लोजर (किस-किस दिन ट्रेनों का आवागमन बाधित रहेगा) का शेड्यूल भी लॉन्चिंग ड्राइंग के हिसाब से ही दिया जाएगा।
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अंडरपास का 40 मीटर का हिस्सा बनाना बाकी
आरओबी के साथ बनने वाले अंडरपास की लंबाई 240 मीटर है। इसमें से सिर्फ 40 मीटर का हिस्सा ही बनना बाकी है। इसकी चौड़ाई 4 मीटर व ऊंचाई 2.5 मीटर होगी।
अगस्त तक पूरा किया जाना है काम, लागत 40 करोड़ रुपये की
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने की समय सीमा बढ़ाकर अगस्त की जा चुकी है। इससे पहले यह दिसंबर 2021 तक पूरा किया जाना था। रेलवे की तरफ से ड्राइंग मंजूर करने में टाइम लगने और पिलरों की संख्या 9 से बढ़ाकर 21 किए जाने का तर्क देते हुए एजेंसी ने प्रोजेक्ट की समय सीमा को बढ़वाया है। वहीं इसकी लागत साढ़े 24 करोड़ से बढ़कर 40 करोड़ रुपये हो चुकी है।
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बो स्टिंग आकार में बनेगा बीच का हिस्सा
इस आरओबी में रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ बनने वाले पिलरों के बीच की दूरी करीब 76 मीटर है, जो काफी ज्यादा है। इस कारण से रेलवे वाले हिस्से को बो स्टिंग गर्डर तकनीक से बनाया जाएगा। इस तकनीक में सिर्फ दो ही स्टील गार्डर रखे जाएंगे, जो करीब 750 टन वजनी होंगे। इन दो गार्डर पर ही स्लैब का निर्माण किया जाएगा। इस स्लैब को स्पोर्ट देने के लिए बो स्ट्रिंग आकार का स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। यह आरओबी करीब 580 मीटर लंबा होगा। कैरिज वे की चौड़ाई 9.5 मीटर होगी, जिस पर वाहन चल सकेंगे। इसके अलावा एक तरफ डेढ़ मीटर का फुटपाथ बनाया जाएगा।