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जीजेयू में प्रोफेसरों ने लगाया सहकर्मियों पर पांच करोड़ के घोटाले का आरोप

Fri, 18 Apr 2014 12:32 AM IST
hisar
hisar Updated Fri, 18 Apr 2014 12:32 AM IST
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गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये घपले के आरोप लगने से घमासान मच गया है। पर्यावरण विभाग के शिक्षकों ने अपने ही सहकर्मी प्रोफेसरों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर कंसलटेंसी (परामर्श कार्यों) के नाम पर सरकारी फंड हड़पने का आरोप लगाया है।
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भ्रष्टाचार के खिलाफ विभाग के शिक्षक और गुरु जंभेश्वर टीचर्स यूनियन के प्रधान भी सांकेतिक रूप से बृहस्पतिवार को धरने पर बैठे।

उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के अंदर कमेटी बनाकर या विजिलेंस से मामले की सही जांच नहीं करवाई गई तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

धरने पर बैठे पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर मुकुल बिश्नोई का आरोप है कि हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से जीजेयू के पर्यावरण विभाग को प्रदेश में हवा और पानी के सैंपल की जांच करने और कंसलटेंसी (परामर्श कार्य) करने के लिए जोड़ा था।
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सन 2005 से विभाग को प्रदेश सरकार की ओर से यह काम सौंपा गया था, जो अभी तक चल रहा है। बोर्ड की ओर से केमिकल और अन्य चीजों के लिए पैसा दिया जाता है।

इनके बिलों में भी हेराफेरी का आरोप पर्यावरण विभाग के प्रोफेसरों ने अपने सहकर्मियों पर लगाया है। मुकुल बिश्नोई ने कहा कि जब उन्हें इस काम में हो रहे घपले का पता चला तो उन्होंने आरटीआई से जानकारी मांगी।
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उसमें स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर बृहस्पतिवार को वह अपने साथियों के साथ धरने पर बैठ गए। इस धरने पर विभागाध्यक्ष प्रवीण शर्मा और गजुटा अध्यक्ष प्रो. एनके मलिक भी बैठे। बिश्नोई ने कहा कि  विभाग में कंसलटेंसी के बिलों को लेकर करीब 5 करोड़ रुपये का घपला हुआ है।

इस घपले में पर्यावरण विभाग के शिक्षक शामिल हैं। वहीं, विभागाध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने बताया कि जब आरटीआई में विभाग के शिक्षकों से जानकारी मांगी गई तो उसमें प्रो. सीपी कौशिक, अनुभा कौशिक और प्रो. नरसिंह बिश्नोई ने रिकार्ड और अन्य जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन को इस मामले में विजिलेंस जांच करवाते हुए उचित कार्रवाई करवानी चाहिए।

धरने पर बैठे पर्यावरण विभाग के विभागाध्यक्ष प्रवीण शर्मा भी कंसलटेंसी के काम में पिछले आठ महीनों से ज्यादा समय से जुडे़ हुए हैं।

प्रोफेसर मुकुल बिश्नोई ने आरटीआई में 2005 से 2014 की जानकारी मांगी। ऐसे में विभागाध्यक्ष ने केवल 2013 तक की ही जानकारी आरटीआई के तहत मुहैया करवाई।

इसके अलावा प्रो. वीके गर्ग और प्रो. जितेंद्रपाल सहित अन्य धरने पर बैठे प्रोफेसर भी कंसलटेंसी से पिछले कुछ सालों से जुडे़ हुए हैं।
 
घपले के आरोप झेल रहे पर्यावरण विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. नरसिंह बिश्नोई ने कहा कि वर्ष 2005 में कंसलटेंसी को लेकर विवि की ओर से नियम बनाए गए थे।

इन्हीं नियमों के आधार पर प्रदेश सरकार ने कंसलटेंसी और जांच का काम पर्यावरण विभाग को सौंपा था। इस काम में पर्यावरण विभाग के प्रो. मुकुल बिश्नोई, आर. भास्कर और आशा गुप्ता ने भाग नहीं लिया था।

उन्होंने कहा कि मुकुल बिश्नोई को मोहरा बनाकर कोई अन्य प्रोफेसर अपना हित साधना चाहते हैं। कई ऐसे शिक्षक हैं, जिनके व्यक्तिगत काम अटके पडे़ हैं इसलिए विवि प्रशासन पर दबाव बनाना चाहते हैं।

यदि उन्हें लगता है कि कोई लीगल कार्रवाई करवानी चाहिए तो मैं करवा सकते हैं। कंसलटेंसी में विभिन्न कंपनियों के रिकार्ड गोपनीय रखने होते हैं तो उनकी आरटीआई में जानकारी नहीं दी जा सकती है।

गुरु जंभेश्वर टीचर एसोसिएशन (गजुटा) के सचिव प्रो. संजीव ने गजुटा प्रधान प्रो. नरेंद्र मलिक पर ही सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिना कार्यकारिणी को बताए गजुटा प्रधान के रूप में कैसे किसी धरने में वे शामिल हो सकते हैं। आज तक कार्यकारिणी के धरने में वह शामिल नहीं हुए।

इसके पीछे उनका क्या लाभ है, जो उन्होंने एक बार भी कार्यकारिणी की बैठक नहीं बुलाई। गजुटा के हर धरने से वह खुद को अलग करते आए हैं, अब ऐसा क्या हो गया जो वह धरने पर बैठ गए।

वहीं अध्यक्ष प्रो. एनके मलिक ने कहा कि यदि विवि ने जांच नहीं करवाई तो शिक्षक कोर्ट में जाएंगे।

जीजेयू और पर्यावरण विभाग के प्रोफेसरों को कंसलटेंसी से लाखों रुपये का लाभ होता है। प्रदेश सरकार की ओर से एक निश्चित राशि हवा और पानी के सैंपल जांच को लेकर विभाग को दी जाती है।

ऐसे में रिपोर्ट आदि तैयार करने के एवज में सरकार पैसा देती है जिसका 40 प्रतिशत विवि को और 60 प्रतिशत प्रोफेसरों को मिलता है।

विश्वविद्यालय के लगभग सभी विभागों की ओर से कंसलटेंसी की जाती है। इससे करोड़ों रुपये की आमदनी विवि को होती है। यहां तक की नेक के ग्रेड सिस्टम में भी विवि को इसका फायदा मिलता है।


हमारे पास आई आरटीआई को सभी संबंधित प्रोफेसरों को भेजा गया था, जिसमें से तीन ने जवाब नहीं दिया। इसके खिलाफ जांच करवाई जानी चाहिए। - प्रवीण शर्मा, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विभाग, जीजेयू
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