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संक्रमित परिवार के ठीक होने की कहानी सुनाकर दूसरों का हौसला बढ़ रहे जयवीर
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हिसार। कोरोना से परिवार संक्रमित हो गया तो हौसला खोने की बजाए तीनों को स्वस्थ किया। अब उसी हौसले के साथ अपने माता-पिता, भाई के ठीक होने की कहानी सुनाकर गांव के लोगों की सेवा में जुटे हैं बालसमंद गांव निवासी जयवीर झाझड़िया। वह गांव के लोगों को काढ़ा, सैनिटाइजर, मास्क और ऑक्सीजन सिलिंडर तक उपलब्ध कराने में सहयोग कर रहे हैं।
25 वर्षीय जयवीर झाझड़िया ने बताया कि 29 अप्रैल को उनके पिता कृष्ण कुमार कोरोना पॉजिटिव मिले थे। उसके बाद उनकी माता कृष्णा और बड़े भाई प्रदीप भी संक्रमित मिले। परिवार के तीन लोग एक साथ संक्रमित मिलने से एक बार तो मन टूट गया। फिर हौसला नहीं हारे। अस्पतालों में भी कहीं बेड नहीं मिल पा रहा था। पिता का ऑक्सीजन लेवल 55 पर आ गया था। ऐसे में मैंने घर पर ही पिता को 5 से 6 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। माता, पिता और भाई तीनों को होम आइसोलेट किया। तीनों को हर रोज सुबह व्यायाम और योगा करवाया। दिन में घर पर ही लौंग, इलायची, तुलसी का काढ़ा तैयार किया। हर रोज उनको नियमित समय पर देता रहा। दिन में कई बार गर्म पानी की भांप, हल्का भोजन, फल खिलाए। अब तीनों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है।
जयवीर का कहना है कि कोरोना को हराने के लिए पहले भय को दूर करना जरूरी है। इसके बाद नियमित योग एवं व्यायाम करते रहें। जब मुझ पर यह बीती है तो मुझे भी कुछ सीखने को मिला। अभी भी मैं गांव में संक्रमित मिलने वाले मरीजों के पास जाता हूं। मास्क, सैनिटाइजर, गलव्स, सोशल डिस्टेंस की पालना करते हुए उनसे मिलता हूं। संक्रमितों को अपने परिवार के लोगों की कहानी सुनाकर हौसला देता हूं। करीब 30 मरीजों को निशुल्क ऑक्सीजन सिलिंडर पहुंचा चुका हूं। अभी भी हर रोज 2 से 3 सिलिंडर उपलब्ध करा रहा हूं।
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25 वर्षीय जयवीर झाझड़िया ने बताया कि 29 अप्रैल को उनके पिता कृष्ण कुमार कोरोना पॉजिटिव मिले थे। उसके बाद उनकी माता कृष्णा और बड़े भाई प्रदीप भी संक्रमित मिले। परिवार के तीन लोग एक साथ संक्रमित मिलने से एक बार तो मन टूट गया। फिर हौसला नहीं हारे। अस्पतालों में भी कहीं बेड नहीं मिल पा रहा था। पिता का ऑक्सीजन लेवल 55 पर आ गया था। ऐसे में मैंने घर पर ही पिता को 5 से 6 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। माता, पिता और भाई तीनों को होम आइसोलेट किया। तीनों को हर रोज सुबह व्यायाम और योगा करवाया। दिन में घर पर ही लौंग, इलायची, तुलसी का काढ़ा तैयार किया। हर रोज उनको नियमित समय पर देता रहा। दिन में कई बार गर्म पानी की भांप, हल्का भोजन, फल खिलाए। अब तीनों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है।
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जयवीर का कहना है कि कोरोना को हराने के लिए पहले भय को दूर करना जरूरी है। इसके बाद नियमित योग एवं व्यायाम करते रहें। जब मुझ पर यह बीती है तो मुझे भी कुछ सीखने को मिला। अभी भी मैं गांव में संक्रमित मिलने वाले मरीजों के पास जाता हूं। मास्क, सैनिटाइजर, गलव्स, सोशल डिस्टेंस की पालना करते हुए उनसे मिलता हूं। संक्रमितों को अपने परिवार के लोगों की कहानी सुनाकर हौसला देता हूं। करीब 30 मरीजों को निशुल्क ऑक्सीजन सिलिंडर पहुंचा चुका हूं। अभी भी हर रोज 2 से 3 सिलिंडर उपलब्ध करा रहा हूं।
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