हमें कुछ हो जाए तो बच्चों को भेज देना, ट्रैक खाली नहीं होने देना
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आरक्षण की मांग को लेकर आए जाटों ने राजकुमार सैनी को चुनौती देते हुए मय्यड़ रेलवे ट्रैक के पास टेंट गाड़ दिया। जाटों ने कहा कि यह छह जातियों को आरक्षण दिलाने की मांग है। मांग पूरी होने तक यहां से नहीं जाएंगे। आरक्षण से पहले राजकुमार सैनी की ओबीसी ब्रिगेड से मुकाबला करने को तैयार हैं।
करीब साढे़ पांच साल बाद एक बार फिर से जाट समाज के लोगों ने मय्यड़ रेलवे ट्रैक पर कब्जा ले लिया। जाटों ने एलान किया कि आरक्षण उनका हक है। यह हक लेकर रहेंगे। चाहें फिर से कुर्बानियां क्यों न देनी पड़े। पीछे नहीं हटेंगे। जाटों के आंदोलन ने प्रशासन की सांसें फूला दी हैं। ट्रैक के साथ बैठे लोगों ने कहा कि सरकार का कोई जाट मंत्री यहां आकर एलान करे कि यूपी के जाटों की तरह हरियाणा के जाटों को आरक्षण मिलेगा।
उसके बाद हम अपना आंदोलन स्थगित कर देंगे। वक्ताओं ने कहा कि कई खापों के प्रधान ने भी आरक्षण को लेकर किए जा रहे आंदोलन का समर्थन करने का एलान किया हैं। रोहतक, झज्जर, सोनीपत की खापें भी आंदोलन का समर्थन करेंगी। 14 फरवरी को सांपला में जाटों की विशाल रैली होगी।
महिलाएं भी पहुंची ट्रैक पर आरक्षण की मांग को लेकर महिलाएं भी ट्रैक पर पहुंची थी। अंधेरा होने से पहले ही जाट समाज के लोगों ने महिलाओं को वापस भेज दिया। महिलाओं को भेजते हुए कहा कि आरक्षण लेकर ही जाएंगे। हमारा इंतजार मत करना। अगर हमें कुछ हो जाए तो घर से बच्चों को भेज देना। ट्रैक को खाली नहीं होने देना। अब बात हमारे हक की है। छह जातियों के लोगों को उनका हक दिलाने के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं।
ट्रैक पर रागनी आरक्षण की मांग को लेकर ट्रैक पर बैठे जाट समुदाय के लोगों के मनोरंजन के लिए पूरा प्रबंध किया गया था। लोक गायक छातर सिंह ने जाट आरक्षण से जुड़ी रागनी सुनाई। रैली स्थल के बाद गायक रेलवे ट्रैक पर भी पहुंचे। यहां भी काफी देर तक घड़वा, बैंजू सहित के साथ रागनी गाई। शाम होने पर गायक यहां से विदा हो गए। लाउड स्पीकर के जरिए कैसेट से रागनी सुनाई।
देरी से मिली चाय तो बेर खाकर गुजारा जाट आरक्षण की मांग को लेकर दोपहर से ही दूर दराज से लोग यहां पहुंचे थे। रैली गांव मय्यड़ भगाना के बीच खेतों में थी। यहां लोगों के खाने पीने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। काफी देर बाद यहां चाय का जुगाड़ किया गया। कुछ देर बाद यहां बेर की रेहड़ी वाले पहुंचे। देखते ही देखते चार रेहड़ी बेर बिक गए। बेर खाने वाले किसान गुठली फेंकते हुए सरकार को कोसते नजर आए।
ट्रैक के बीच में हुक्के की आग सुलगाई रैली में कुछ लोग अपने साथ हुक्का लेकर पहुंचे। हुक्का गुड़गुड़ाते हुए अपने नेताओं को सुना। इसके बाद यहां से सीधे ट्रैक पर पहुंच गए। ट्रैक के बीच जाकर आग सुलगा दी। यहां भी रात तक हुक्का पीते नजर आए। हुक्का भरने की जिम्मेदारी युवाओं को दी गई थी।
ताश खेलते हुए बिताया समय अपने मनोरंजन के लिए जाट समाज के लोग ताश भी साथ लाए थे। यहां भाषण समाप्त होते ही ताश की बाजी खेलना शुरू कर दिया। आरक्षण मांगने वाले ताश खेलकर समय बिताते नजर आए। एक दूसरे के साथ हंसी मजाक करने से भी नहीं चूक रहे थे। रात को ट्रैक के पास बैठे हुए भी एक दूसरे के साथ देश दुनिया की बाते करते हुए घर वालों को अपना हालचाल भी बताते रहे।
व्हाटस एप, फेसबुक में बिजी रहे युवा युवाओं के पास अच्छे कैमरे वाले मोबाइल थे। आरक्षण के लिए रैली और ट्रैक जाम के फोटो लेते रहे। इसके बाद इन्हें व्हाटस एप, फेसबुक के जरिए अपने साथियों को भेजते रहे। कुछ युवा रेलवे ट्रैक जाम की खबरों को मोबाइल पर ही लाइव टीवी पर देखते नजर आए।
26 के कैथल आंदोलन के लिए दिया न्योता रैली में पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों ने 26 फरवरी को कैथल में होने वाली करो या मरो आंदोलन के लिए पंपलेट वितरित किए। भाकियू के सदस्यों ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू कराने तथा किसानों का सारा कर्जा माफ करने की मांग को लेकर यह आंदोलन होगा। साथ ही यह भी कहा कि किसान भाई दो कंबल तथा कपडे़ साथ लेकर आएं। यह करो या मरो आंदोलन होगा।