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89 फीसदी ज्यादा बरसे बदरा, ले डूबी गुलाबी सूंडी
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बारिश के चलते खराब हो चुकी नरमे की फसल। संवाद
- फोटो : Fatehabad
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प्रदीप जांगड़ा
फतेहाबाद। इस साल मानसून के सीजन में सामान्य से 89 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। बारिश के साथ ही नरमे व कपास की फसल में गुलाबी सूंडी आ गई। एक साथ आई दो आफताें ने किसानों की कमर तोड़ दी। बुआई व बिजाई से लेकर चुगाई तक नरमे की फसल पर करीब 15 हजार रुपये प्रति एकड़ लागत आती है। इसके अलावा खाद व कीटनाशकों का खर्चा भी रहता है। ऐसे में किसानों के लिए मुनाफा तो दूर, लागत खर्च पूरा करना मुश्किल हो गया है। प्रशासन ने माना है कि 60 फीसदी फसल प्रभावित है। मगर ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि नुकसान ज्यादा है। प्रशासन ने 60 फीसदी नुकसान का आकलन सिर्फ गुलाबी सूंडी के प्रकोप को लेकर किया है। बारिश से हुए नुकसान को शामिल किया जाए तो नुकसान बहुत ज्यादा है।
जमीनी हकीकत यह है कि लगातार बारिश में नरमे के टिंडे विकसित नहीं हो पाए। अविकसित टिंडे पानी के कारण गल गए। नरमे के पौधे जमीन पर बिछ गए। उनमें फल तैयार नहीं हो पाया। क्षेत्र में भोड़ियाखेड़ा, दरियापुर, धांगड़, झलनियां, भूथनकलां, जांडली व बरसीन आदि गांवों के आसपास नरमे व कपास की फसलें खड़ी हैं। इन फसलों की हालत बेहद खराब हो चुकी है।
क्या कहती है प्रशासन की रिपोर्ट
जिले में 63200 हेक्टेयर यानि 1.58 लाख एकड़ में कपास फसल की काश्त की गई है, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र में गुलाबी सूंडी का प्रकोप देखा गया है, यानि 94800 एकड़ में फसल खराब है। बीटी कपास में गुलाबी सूंडी के प्रति प्रतिरोधी क्षमता कम होने के कारण इसका प्रकोप देखा गया है। गुलाबी सूंडी कपास में मध्य एवं अंतिम अवस्था में नुकसान पहुंचाती है। सूंडी टिंडे के अंदर से अपना भोजन ग्रहण करती है जिससे कपास फसल की पैदावार व गुणवत्ता पर बहुत विपरीत प्रभाव पड़ता है।
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- राजेश सिहाग, कृषि उप निदेशक, फतेहाबाद
पांच एकड़ में नरमे की फसल बर्बाद
मैंने पांच एकड़ में नरमे की बिजाई की थी। नरमा पूरी तरह खराब हो चुका है। कुछ बारिश और कुछ गुलाबी सूंडी, दोनों के कारण भारी नुकसान हुआ है। पांच एकड़ में लगभग 75 हजार रुपये खर्चा आ जाएगा। इतने की फसल नहीं होगी। सोचा यही था कि अच्छी फसल हो जाए तो खेती के संसाधन की खरीद करूंगा, लेकिन नुकसान ही हुआ है।
- विकास, किसान, गांव भिरडाना
सामान्य से काफी ज्यादा बारिश हुई
फतेहाबाद जिले में सामान्य बारिश 277 एमएम होनी चाहिए थी। मगर इस बार 522 एमएम बारिश हुई है जो सामान्य से 89 प्रतिशत ज्यादा है। बहुत ज्यादा बारिश होने के कारण फसलों को नुकसान हुआ है। बारिश के कारण खेतों में जल भराव की समस्या रही है, जिससे फसलें खराब हो गईं।
- डॉ. मदन लाल खीचड़, विभागाध्यक्ष, मौसम विज्ञान विभाग, एचएयू, हिसार
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फतेहाबाद। इस साल मानसून के सीजन में सामान्य से 89 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। बारिश के साथ ही नरमे व कपास की फसल में गुलाबी सूंडी आ गई। एक साथ आई दो आफताें ने किसानों की कमर तोड़ दी। बुआई व बिजाई से लेकर चुगाई तक नरमे की फसल पर करीब 15 हजार रुपये प्रति एकड़ लागत आती है। इसके अलावा खाद व कीटनाशकों का खर्चा भी रहता है। ऐसे में किसानों के लिए मुनाफा तो दूर, लागत खर्च पूरा करना मुश्किल हो गया है। प्रशासन ने माना है कि 60 फीसदी फसल प्रभावित है। मगर ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि नुकसान ज्यादा है। प्रशासन ने 60 फीसदी नुकसान का आकलन सिर्फ गुलाबी सूंडी के प्रकोप को लेकर किया है। बारिश से हुए नुकसान को शामिल किया जाए तो नुकसान बहुत ज्यादा है।
जमीनी हकीकत यह है कि लगातार बारिश में नरमे के टिंडे विकसित नहीं हो पाए। अविकसित टिंडे पानी के कारण गल गए। नरमे के पौधे जमीन पर बिछ गए। उनमें फल तैयार नहीं हो पाया। क्षेत्र में भोड़ियाखेड़ा, दरियापुर, धांगड़, झलनियां, भूथनकलां, जांडली व बरसीन आदि गांवों के आसपास नरमे व कपास की फसलें खड़ी हैं। इन फसलों की हालत बेहद खराब हो चुकी है।
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क्या कहती है प्रशासन की रिपोर्ट
जिले में 63200 हेक्टेयर यानि 1.58 लाख एकड़ में कपास फसल की काश्त की गई है, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र में गुलाबी सूंडी का प्रकोप देखा गया है, यानि 94800 एकड़ में फसल खराब है। बीटी कपास में गुलाबी सूंडी के प्रति प्रतिरोधी क्षमता कम होने के कारण इसका प्रकोप देखा गया है। गुलाबी सूंडी कपास में मध्य एवं अंतिम अवस्था में नुकसान पहुंचाती है। सूंडी टिंडे के अंदर से अपना भोजन ग्रहण करती है जिससे कपास फसल की पैदावार व गुणवत्ता पर बहुत विपरीत प्रभाव पड़ता है।
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- राजेश सिहाग, कृषि उप निदेशक, फतेहाबाद
पांच एकड़ में नरमे की फसल बर्बाद
मैंने पांच एकड़ में नरमे की बिजाई की थी। नरमा पूरी तरह खराब हो चुका है। कुछ बारिश और कुछ गुलाबी सूंडी, दोनों के कारण भारी नुकसान हुआ है। पांच एकड़ में लगभग 75 हजार रुपये खर्चा आ जाएगा। इतने की फसल नहीं होगी। सोचा यही था कि अच्छी फसल हो जाए तो खेती के संसाधन की खरीद करूंगा, लेकिन नुकसान ही हुआ है।
- विकास, किसान, गांव भिरडाना
सामान्य से काफी ज्यादा बारिश हुई
फतेहाबाद जिले में सामान्य बारिश 277 एमएम होनी चाहिए थी। मगर इस बार 522 एमएम बारिश हुई है जो सामान्य से 89 प्रतिशत ज्यादा है। बहुत ज्यादा बारिश होने के कारण फसलों को नुकसान हुआ है। बारिश के कारण खेतों में जल भराव की समस्या रही है, जिससे फसलें खराब हो गईं।
- डॉ. मदन लाल खीचड़, विभागाध्यक्ष, मौसम विज्ञान विभाग, एचएयू, हिसार