{"_id":"63c04f1bebde9a245b35a86d","slug":"inspired-by-someone-s-brother-and-someone-s-sister-they-held-the-stick-hisar-news-hsr652299014","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: किसी ने भाई तो किसी ने बहन से प्रेरित होकर थामी स्टिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: किसी ने भाई तो किसी ने बहन से प्रेरित होकर थामी स्टिक
विज्ञापन
हिसार। मंजू
- फोटो : Hisar
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिसार। एस्ट्रोटर्फ मैदान पर चल रही राज्यस्तरीय महिला हॉकी प्रतियोगिता में स्टिक का जादू दिखाने पहुंचीं बेटियों का सपना नेशनल, इंटरनेशनल से लेकर ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का है। इनमें शामिल कुछ खिलाड़ी ऐसी है जिन्हें अपने भाई-बहन से प्रेरित होकर हॉकी में कॅरिअर बनाने की ठागी।
हिसार के गांव उमरा की मंजू का जीवन काफी संघर्ष भरा रहा। वर्ष 2008 में मां राजबाला की हादसे में मौत हो गई। मंजू ने हिम्मत को टूटने नहीं दिया और हॉकी में नाम चमकाया। पिता कृष्ण कुमार किसान है। परिवार की स्थिति सामान्य ही है। पिता ने सहयोग किया तो हॉकी में कॅरिअर के लिए आगे बढ़ी। बड़ा भाई सुनील भी हॉकी खेलता है। भाई ने भी मुझे खेलने के लिए काफी मोटिवेट किया। सब जूनियर नेशनल में स्वर्ण पदक जीत चुकी हूं। हिसार में चल रही प्रतियोगिता के लिए कुछ दिन पहले ही मैंने तैयारी शुरू की थी। उम्मीद है कि हिसार की टीम गोल्ड मेडल हासिल करेगी। - मंजू, निवासी उमरा
छोटी बहन कंचन हॉकी खेलती थी, उसे देखकर मेरी भी रुचि बढ़ी। दो साल से मैं हॉकी खेल रही हूं। परिवार का साथ मिला तो यहां तक पहुंच पाई। आज भी माता-पिता मुझे खेल के प्रति प्रेरित करते हैं। उनका सपना है कि बेटी इंटरनेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर नाम रोशन करे। इस सपने को पूरा करने के लिए मैदान पर पसीना बहाती हूं। वर्ष 2022 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत चुकी हूं। - पलवी शर्मा, निवासी हिसार स्थित संजय नगर
विज्ञापन
वर्ष 2014 में बड़ी बहन प्रिया ने हॉकी खेलना शुरू किया। बहन के साथ रोजाना मैच देखने जाती थी। धीरे-धीरे मेरा रुझान हॉकी की ओर बढ़ने लगा। जब बहन हॉकी लेकर मैदान में उतरती थी तो मेरा मन भी हॉकी खेलने को करता था। परिवार के सदस्यों ने हॉकी खिलाने की हामी भरी तो मैं भी एक साल बाद मैदान में उतर गई। अब मेरा सपना नेशनल और इंटरनेशनल और ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का हूं। इसके लिए मैंने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। - सोनू, खिलाड़ी, निवासी फतेहाबाद के बैजलपुर
विज्ञापन
हिसार के गांव उमरा की मंजू का जीवन काफी संघर्ष भरा रहा। वर्ष 2008 में मां राजबाला की हादसे में मौत हो गई। मंजू ने हिम्मत को टूटने नहीं दिया और हॉकी में नाम चमकाया। पिता कृष्ण कुमार किसान है। परिवार की स्थिति सामान्य ही है। पिता ने सहयोग किया तो हॉकी में कॅरिअर के लिए आगे बढ़ी। बड़ा भाई सुनील भी हॉकी खेलता है। भाई ने भी मुझे खेलने के लिए काफी मोटिवेट किया। सब जूनियर नेशनल में स्वर्ण पदक जीत चुकी हूं। हिसार में चल रही प्रतियोगिता के लिए कुछ दिन पहले ही मैंने तैयारी शुरू की थी। उम्मीद है कि हिसार की टीम गोल्ड मेडल हासिल करेगी। - मंजू, निवासी उमरा
विज्ञापन
छोटी बहन कंचन हॉकी खेलती थी, उसे देखकर मेरी भी रुचि बढ़ी। दो साल से मैं हॉकी खेल रही हूं। परिवार का साथ मिला तो यहां तक पहुंच पाई। आज भी माता-पिता मुझे खेल के प्रति प्रेरित करते हैं। उनका सपना है कि बेटी इंटरनेशनल स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर नाम रोशन करे। इस सपने को पूरा करने के लिए मैदान पर पसीना बहाती हूं। वर्ष 2022 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत चुकी हूं। - पलवी शर्मा, निवासी हिसार स्थित संजय नगर
विज्ञापन
वर्ष 2014 में बड़ी बहन प्रिया ने हॉकी खेलना शुरू किया। बहन के साथ रोजाना मैच देखने जाती थी। धीरे-धीरे मेरा रुझान हॉकी की ओर बढ़ने लगा। जब बहन हॉकी लेकर मैदान में उतरती थी तो मेरा मन भी हॉकी खेलने को करता था। परिवार के सदस्यों ने हॉकी खिलाने की हामी भरी तो मैं भी एक साल बाद मैदान में उतर गई। अब मेरा सपना नेशनल और इंटरनेशनल और ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का हूं। इसके लिए मैंने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। - सोनू, खिलाड़ी, निवासी फतेहाबाद के बैजलपुर

हिसार। हॉकी खिलाड़ी पलवी शर्मा।- फोटो : Hisar

हिसार। हॉकी खिलाड़ी सोनू।- फोटो : Hisar