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मनरेगा मजदूरों की जगह दूसरे गांव के मजदूरों से कार्य करवाने पर जमकर काटा बवाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Feb 2022 11:24 PM IST
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In place of MNREGA workers, there was a fierce ruckus on getting the workers of other villages to work
मंडी आदमपुर। गांव मोहब्बतपुर में मनरेगा मजदूरों को पिछले करीब छह सालों से काम ना देने पर मजदूरों ने सोमवार को गांव के रामदेव मंदिर में बैठक कर सरपंच व अधिकारियों के खिलाफ जमकर रोष व्यक्त किया। रोष प्रदर्शन कर रहे दानाराम, सुमित्रा, नागरमल, रामनिवास, सुभाष, रणसिंह, छोटूराम, ललित, इंद्रो, पृथ्वी, राजेंद्र, अदरिश, संतोष, बिरमा, गिन्ना, महाबीर, बलवान आदि मजदूरों ने बताया कि पिछले छह सालों में उन्हें मनरेगा में केवल 11 दिन ही काम दिया है, जबकि सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है।
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मजदूरों ने बताया कि उन्होंने जब इस बारे में गांव के सरपंच से बात की तो उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा गांव में मनरेगा के लिए कोई काम नहीं दिया जा रहा है। यह बात कहकर उन्हें गुमराह करते रहे। गांव में मनरेगा के तहत किए गए कार्यों की ऑडिट करने के लिए सोशल ऑडिट टीम में शामिल सीमा व रीतू आई तो उन्हें पता चला कि गत वर्ष मनरेगा के तहत गांव में करीब सात लाख रुपये के काम करवाए गए हैं। गांव में ये कार्य गांव की मनरेगा द्वारा नहीं, बल्कि दूसरे गांव की मनरेगा के द्वारा करवाया गया था। अधिकारियों ने जब मजदूरों से दूसरी पंचायत के मनरेगा मजदूरों द्वारा कार्य करवाने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वे तो काम करने के इच्छुक हैं, लेकिन सरपंच द्वारा उन्हें हर बार काम ना आने की बात कहकर टाल दिया जाता। बाद में गांव मोहब्बतपुर के ग्राम सचिव प्रवीण कुमार भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने मजदूरों से कहा कि वे अपने मैट का चयन करके उन्हें बता दें। उन्हें रोजगार मिलता रहेगा। वहीं, इस बारे में जब गांव के सरपंच रामप्रसाद पूनिया से बात की गई तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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गांव में मनरेगा के तहत कभी नहीं हुए कार्य -
गांव के मनरेगा मजदूरों ने बताया कि गांव में 300 से ज्यादा मजदूरों के जॉब कार्ड बने हुए हैं। उनके गांव में पिछले करीब छह सालों से मनरेगा के तहत कोई कार्य नहीं करवाया गया। ऑडिट की टीम आने पर उन्हें पता चला कि गांव में वर्ष 2020-21 में करीब सात लाख रुपयों से कार्य करवाए गए, जबकि उनके गांव में मनरेगा के तहत कोई भी कार्य नहीं हुआ है।
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पिछले 6 सालों में हुए करीब 66 लाख रुपयों से ज्यादा के काम -
रोजगार सहायक पवन कुमार ने बताया कि मनरेगा के तहत गांव मोहब्बतपुर में वर्ष 2016-17 में 11 लाख 21 हजार, 2017-18 में 23 लाख 18 हजार, 2018-19 में 7 लाख 34 हजार, 2019-20 में 6 लाख 66 हजार, 2020-21 में 6 लाख 64 हजार के कार्य हो चुके है। वर्ष 2021-22 में भी अभी तक मनरेगा के तहत 11 लाख 21 हजार रुपयों से कार्य हो चुके हैं।

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एक महीने पहले की संभाला है चार्ज : ग्राम सचिव
गांव मोहब्बतपुर के ग्राम सचिव प्रवीण कुमार से इस बात की गई तो उन्होंने बताया कि पिछले करीब एक माह से ही उन्होंने गांव का चार्ज संभाला है। जहां तक गांव के मजदूरों को काम ना मिलने की बात है तो गांव के मजदूरों द्वारा कभी भी काम ना मिलने के बारे में कार्यालय को अवगत नहीं करवाया गया। काम ना मिलने के बारे में अगर वे कार्यालय को अवगत करवाते तो उन्हें काम अवश्य मिलता।
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