{"_id":"60aaa2f38ebc3e58613a6ad5","slug":"hospital-not-give-dead-body-family-member-protest-hisar-news-rtk6097651175","type":"story","status":"publish","title_hn":"इलाज के रुपये जमा न करवाने पर अस्पताल ने शव देने से किया मना, परिजन धरने बैठे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इलाज के रुपये जमा न करवाने पर अस्पताल ने शव देने से किया मना, परिजन धरने बैठे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिसार। शहर के निजी अस्पताल में कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत इलाजरत मरीज की शनिवार रात करीब 10 बजे मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने इलाज के बाकी रुपये जमा करवाए बिना परिजनों को शव देने से मना कर दिया। इस पर परिजनों ने आपत्ति जताई और अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए। रविवार दोपहर को जिला प्रशासन व अस्पताल के बीच बनी सहमति के बाद बिना रुपये लिए परिजनों को कोरोना प्रॉटोकॉल के तहत शव सौंप दिया गया।
शहर के सैनियान मोहल्ला निवासी सन्नी ने बताया कि उसके मामा फतेहाबाद जिले के गांव बड़ोपल निवासी कृष्ण कुमार को खांसी की शिकायत हुई थी। 21 अप्रैल को वह मामा को जांच करवाने हिसार के एचएयू गेट 4 नंबर के नजदीक स्थित निजी अस्पताल में लेकर आए थे। यहां आने पर चिकित्सकों ने उन्हें अस्पताल में दाखिल कर लिया। चार दिन बाद चिकित्सकों ने निजी लैब में कोरोना टेस्ट करवाया तो उसकी रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। उसके दो दिन बाद चिकित्सकों ने कहा कि मरीज की तबीयत गंभीर है और इन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ेगा। इस पर उन्हें अब तक वेंटिलेटर पर रखा गया था। इस बीच वह सही तरह से बातचीत कर रहे थे। शनिवार शाम को भी उन्होंने अपने मामा से बातचीत की थी। उस दौरान चिकित्सक ने दवा लाने को कहा था और दवा के लिए पैसे भी कम थे। जब वह दवा लेने मेडिकल स्टोर गए तो बिना पैसों के संचालक ने दवा देने से मना कर दिया। हालांकि उनका पहले से दवा स्टोर पर खाता चल रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि हम गांव से हैं और पैसे सुबह तक आ जाएंगे। फिर भी उन्होंने दवा देने से मना कर दिया। इसके बाद वह वापस मरीज के पास पहुंचे तो वहां पर डॉक्टर और दो स्टाफ नर्स मौजूद थे। उन्होंने कहा कि मरीज कृष्ण कुमार को सांस की अचानक तकलीफ हुई, जिस कारण उनकी मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने शव देने से मना कर दिया, जबकि अब तक वह अस्पताल को इलाज के लिए 4.20 लाख रुपये का भुगतान कर चुके हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अभी भी 2.83 लाख रुपये बाकी है। रविवार दोपहर करीब 2 बजे प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रशासन व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सहमति बनी। इसके बाद अस्पताल द्वारा मृतक के परिजनों को प्रोटोकॉल के तहत शव सौंप दिया गया।
खेती बड़ी का करता था काम
सन्नी ने बताया कि उसके मामा कृष्ण खेती बाड़ी करते थे और उनका एक बेटा व बेटी है। वे दोनों ही नाबालिग हैं। उनकी मौत हो जाने के बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। इससे पहले भी उन्होंने इलाज के लिए पैसे उधार लिए थे, जो अभी तक चुका नहीं पाए हैं।
विज्ञापन
समझाने पर मान गया अस्पताल प्रबंधन
मामले की जानकारी मिलते ही मैं निजी अस्पताल पहुंचा। वहां मरीज के परिजनों और डॉक्टरों से बात की। मेरे समझाने पर अस्पताल प्रबंधन मान गया और रुपये लिए बिना शव परिजनों को सौंप दिया। इसके लिए मैं अस्पताल प्रबंधन का भी धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने मेरी बात का मान रखा।
डॉ. रमेश पूनिया, जीव वैज्ञानिक, स्वास्थ्य विभाग हिसार।
विज्ञापन
शहर के सैनियान मोहल्ला निवासी सन्नी ने बताया कि उसके मामा फतेहाबाद जिले के गांव बड़ोपल निवासी कृष्ण कुमार को खांसी की शिकायत हुई थी। 21 अप्रैल को वह मामा को जांच करवाने हिसार के एचएयू गेट 4 नंबर के नजदीक स्थित निजी अस्पताल में लेकर आए थे। यहां आने पर चिकित्सकों ने उन्हें अस्पताल में दाखिल कर लिया। चार दिन बाद चिकित्सकों ने निजी लैब में कोरोना टेस्ट करवाया तो उसकी रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। उसके दो दिन बाद चिकित्सकों ने कहा कि मरीज की तबीयत गंभीर है और इन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ेगा। इस पर उन्हें अब तक वेंटिलेटर पर रखा गया था। इस बीच वह सही तरह से बातचीत कर रहे थे। शनिवार शाम को भी उन्होंने अपने मामा से बातचीत की थी। उस दौरान चिकित्सक ने दवा लाने को कहा था और दवा के लिए पैसे भी कम थे। जब वह दवा लेने मेडिकल स्टोर गए तो बिना पैसों के संचालक ने दवा देने से मना कर दिया। हालांकि उनका पहले से दवा स्टोर पर खाता चल रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि हम गांव से हैं और पैसे सुबह तक आ जाएंगे। फिर भी उन्होंने दवा देने से मना कर दिया। इसके बाद वह वापस मरीज के पास पहुंचे तो वहां पर डॉक्टर और दो स्टाफ नर्स मौजूद थे। उन्होंने कहा कि मरीज कृष्ण कुमार को सांस की अचानक तकलीफ हुई, जिस कारण उनकी मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने शव देने से मना कर दिया, जबकि अब तक वह अस्पताल को इलाज के लिए 4.20 लाख रुपये का भुगतान कर चुके हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अभी भी 2.83 लाख रुपये बाकी है। रविवार दोपहर करीब 2 बजे प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रशासन व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सहमति बनी। इसके बाद अस्पताल द्वारा मृतक के परिजनों को प्रोटोकॉल के तहत शव सौंप दिया गया।
विज्ञापन
खेती बड़ी का करता था काम
सन्नी ने बताया कि उसके मामा कृष्ण खेती बाड़ी करते थे और उनका एक बेटा व बेटी है। वे दोनों ही नाबालिग हैं। उनकी मौत हो जाने के बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। इससे पहले भी उन्होंने इलाज के लिए पैसे उधार लिए थे, जो अभी तक चुका नहीं पाए हैं।
विज्ञापन
समझाने पर मान गया अस्पताल प्रबंधन
मामले की जानकारी मिलते ही मैं निजी अस्पताल पहुंचा। वहां मरीज के परिजनों और डॉक्टरों से बात की। मेरे समझाने पर अस्पताल प्रबंधन मान गया और रुपये लिए बिना शव परिजनों को सौंप दिया। इसके लिए मैं अस्पताल प्रबंधन का भी धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने मेरी बात का मान रखा।
डॉ. रमेश पूनिया, जीव वैज्ञानिक, स्वास्थ्य विभाग हिसार।