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Hisar News: लंपी की वैक्सीन खोजने वाले हिसार के वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार को मिलेगा अवाॅर्ड फॉर एक्सीलेंस
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हिसार। हजाराें गोवंश की जान लेने वाली खतरनाक बीमारी लंपी की रोकथाम के लिए देश को पहला स्वदेश व सुरक्षित वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार को आईसीएआर अवाॅर्ड फार एक्सीलेंस इन एग्रीकल्चरल रिसर्च एवं टेक्नालॉजी से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार 16 जुलाई को नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में दिया जाएगा। कार्यक्रम में डॉ. नवीन कुमार समेत डॉ. संजय बूरा, डॉ. यशपाल, डॉ. बीएन त्रिपाठी, डॉ. अमित कुमार, डॉ. सुकदेव नंदी, डॉ. करमपाल सिंह, डॉ. त्रिवेणी दत्त को सम्मान मिलेगा।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर व वर्तमान में शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जम्मू के कुलपति डॉ. बीएन त्रिपाठी ने बताया कि देशभर में स्किन डिजीज लंपी के चलते हर साल बड़ी संख्या में गोवंश की मौत होती है। पिछले साल इस बीमारी ने राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, यूपी समेत देश के विभिन्न हिस्सों में कहर बरपाया। सबसे अधिक नुकसान राजस्थान व हरियाणा के किसानों को हुआ। इस बीमारी से बचाव के लिए हिसार के राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार की अगुवाई में एक शोध किया गया। मुख्य शोधकर्ता डॉ. नवीन ने इस बीमारी से बचाव के लिए लंपी प्रोवैक आईएनडी नाम से वैक्सीन बनाई थी। इस वैक्सीन के सभी चरण के परीक्षण सफल रहे हैं।
दो लाख से अधिक जानवरों पर हो चुका है परीक्षण
डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि लंपी बीमारी प्रमुख रूप से मक्खी मच्छरों से फैलती है। इसका प्रकोप आमतौर पर बरसात के मौसम के तुरंत बाद बढ़ जाता है। स्वदेशी वैक्सीन लंपी प्रोवैक आईएनडी को देश के विभिन्न राज्यों में 2 लाख से अधिक जानवरों पर टेस्ट किया जा चुका है। इसका टीका लगने के 7 दिन बाद पशु में एंटीबॉडी बनने लगती है। अब तक जम्मू और कश्मीर में 75 हजार, राजस्थान में 65 हजार, मणिपुर में 50 हजार, यूपी में 6 हजार, पंजाब में 350 दिल्ली में 100, हरियाणा में 250 और अंडमान एवं निकोबार में 2 हजार डोज दिया जा चुका है। टीकाकृत पशुओं में इसका सकारात्मक असर दिखा है।
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर व वर्तमान में शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जम्मू के कुलपति डॉ. बीएन त्रिपाठी ने बताया कि देशभर में स्किन डिजीज लंपी के चलते हर साल बड़ी संख्या में गोवंश की मौत होती है। पिछले साल इस बीमारी ने राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, यूपी समेत देश के विभिन्न हिस्सों में कहर बरपाया। सबसे अधिक नुकसान राजस्थान व हरियाणा के किसानों को हुआ। इस बीमारी से बचाव के लिए हिसार के राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार की अगुवाई में एक शोध किया गया। मुख्य शोधकर्ता डॉ. नवीन ने इस बीमारी से बचाव के लिए लंपी प्रोवैक आईएनडी नाम से वैक्सीन बनाई थी। इस वैक्सीन के सभी चरण के परीक्षण सफल रहे हैं।
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दो लाख से अधिक जानवरों पर हो चुका है परीक्षण
डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि लंपी बीमारी प्रमुख रूप से मक्खी मच्छरों से फैलती है। इसका प्रकोप आमतौर पर बरसात के मौसम के तुरंत बाद बढ़ जाता है। स्वदेशी वैक्सीन लंपी प्रोवैक आईएनडी को देश के विभिन्न राज्यों में 2 लाख से अधिक जानवरों पर टेस्ट किया जा चुका है। इसका टीका लगने के 7 दिन बाद पशु में एंटीबॉडी बनने लगती है। अब तक जम्मू और कश्मीर में 75 हजार, राजस्थान में 65 हजार, मणिपुर में 50 हजार, यूपी में 6 हजार, पंजाब में 350 दिल्ली में 100, हरियाणा में 250 और अंडमान एवं निकोबार में 2 हजार डोज दिया जा चुका है। टीकाकृत पशुओं में इसका सकारात्मक असर दिखा है।
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