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Hisar News: नेपाल पहुंचे हिसार के झोटों का फूल मालाओं से हुआ स्वागत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Nov 2023 11:36 PM IST
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Hisar's Jhotas reached Nepal welcomed with flower garlands
-सीआईआरबी के पशु वैज्ञानिकों का स्वागत करते नेपाल के वैज्ञानिक व अ​​धिकारी। स्रोत संस्थान
हिसार। केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी) ने नेपाल को भैंस की नस्ल सुधार के लिए मुर्राह नस्ल के 15 झोटे प्रदान किए हैं। भारत-नेपाल के बीच सहयोग के लिए बने इंडो-नेपाल एग्रीकल्चर वर्किंग ग्रुप में हुए फैसले के तहत सौंपे गए हैं। यह झोटे 23 नवंबर को नेपाल पहुंच गए थे। सीआईआरबी के वैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार गंगवा एवं टीम ने ये झोटे नेपाल सरकार के संयुक्त सचिव डॉ. माधव प्रसाद आर्यल को सौंपे। फूलों की माला पहनाकर झोटों का स्वागत किया गया।
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अब इन झोटों को नेपालगंज स्थित फनंतंदजपद नदपज में रखा जाएगा। जहां करीब 40 से 45 दिन तक इन झोंटों की कुछ जांच की जाएंगी। इसके बाद नेपाल के तीन सीमन स्टेशन नेपालगंज, दूसरा लाहन और तीसरा पोखरा में भेजे जाएंगे। जहां इनके सीमन के टीके तैयार किए जाएंगे। इस मौके पर नेपाल के डाॅ. विनय कुमार, डाॅ. शिवा नाथ, डाॅ. भाजुराम, डाॅ. मिलन कुमार सहित अन्य उपस्थित रहे। बता दें कि नेपाल में उपलब्ध भैंसों की प्रजातियों में दूध की उपलब्धता 1500 किलोग्राम प्रति वर्ष है। वहीं सीआईआरबी की ओर से दिए गए झोटों की मां का न्यूनतम दूध उत्पादन सालाना 3000 लीटर है। नवंबर माह के पहले सप्ताह में केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. टीके दत्ता ने नेपाली प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. समझान को यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद सहमति पत्र की प्रति सौंपी थी।
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मुर्राह नस्ल के झोटे प्रदान करने के लिए नेपाल ने करीब 4 साल पहले अनुरोध किया था। इस आदान-प्रदान का मुख्य उद्देश्य नेपाल के साथ मुर्राह नस्ल की भैंस को साझा करने की सुविधा प्रदान करना है, ताकि उनके प्रजनन कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि इन सभी झोटों के कई तरह के टेस्ट किए गए थे। इन सभी टेस्ट की रिपोर्ट नेपाल के वैज्ञानिकों को उपलब्ध कराई गई। जिसके बाद नेपाल के प्रतिनिधिमंडल ने इन्हें मंजूर किया।
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