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किसानों की आत्महत्या के मामलों को नहीं बनाया जाता इश्यू
ब्यूरो / अमर उजाला, हिसार
Updated Sat, 09 Apr 2016 01:10 AM IST
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धनखड़
- फोटो : Bureau
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किसानों की आत्महत्या को इश्यू नहीं बनाया जाता, जबकि दिल्ली एनसीआर में कोई घटना हो जाती है तो उसे काफी दिनों तक घसीटा जाता है। यह बात कृषिमंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने शुक्रवार को बतौर मुख्यातिथि एचएयू के इंदिरा गांधी सभागार में कही। वे एलुमिनी कन्वेंशन के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ न्याय नहीं किया जाता। किसानों को फसलों के सही दाम भी नहीं मिल पाते हैं। किसान मेलों में आउटपुट कंपनियां किसानों के साथ कनेक्टिड नहीं हैं। इसका सीधा नुकसान किसानों को होता है। किसानों की दशा सुधारने के लिए किसानों को आउटपुट कंपनियों से जोड़ा जाना चाहिए। एसवाईएल के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में चल रहा है। इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं हो पाया है। किसानों को कम रेट पर गेहूं बेचने की बात पर उन्होंने कहा कि सरकार हर बार गेहूं के रेट निर्धारित करती है। इस बार भी किसानों के लिए गेहूं के रेट निर्धारित किए गए हैं। हरियाणा को सूखाग्रस्त इलाका बताते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा में 6000 क्यूसिक पानी की आवश्यकता है।
फसली बीमे की प्रक्रिया सही
कृषिमंत्री धनखड़ ने प्रधानमंत्री बीमा योजना के बारे में कहा कि किसानों के लिए यह एक अच्छी सुविधा है, जो फसलों का नुकसान होने पर जोखिम प्रबंधन के रूप में किसानों को मिल जाती है। इससे किसानों को काफी सुविधा रहेगी।
एग्रो-मार्केटिंग की ओर देना होगा ध्यान
उन्होंने कहा कि किसानों को आगे बढ़ने के लिए एग्रो-मार्केटिंग में आगे आना होगा। किसान फसलों का उत्पादन तो कर लेता है, लेकिन उसकी सही रूप से मार्केटिंग नहीं कर पा रहा है। इसलिए एग्रो-मार्केटिंग आज किसानों की आवश्यकता है।
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एलुमिनी को लीडर बन सुधारनी होगी किसानों की दशा
उन्होंने कहा देश में इस विश्वविद्यालय को हरित क्रांति का जनक माना गया है। इससे प्रदेश का नाम भी रोशन हुआ है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए जितना सोचा गया था, उतना क्रियान्वित नहीं हो पाया है और सरकार इस ओर भरसक प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की देश में ही नहीं, बल्कि एशिया में अपनी पहचान है। इसलिए इस विश्वविद्यालय के एलुमिनी का भी दायित्व बनता है कि वह लीडर बनकर किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अपना विशेष योगदान दें।
एलुमिनी भवन के लिए दी 11 लाख की राशि
कृषिमंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने एलुमिनी भवन की आधारशिला रखी और इसके निर्माण के लिए 11 लाख की धनराशि देने की भी घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने स्मारिका का विमोचन भी किया।
एचएयू के 19 छात्र बने कुलपति
कुलपति डॉ. केएस खोखर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रत्येक दो वर्ष के बाद पुराने छात्रों के साथ यादों को भी ताजा किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1970 में की गई थी। मैं पिछले 51 वर्षों से इसी विश्वविद्यालय में रह रहा हूं। इस विश्वविद्यालय के 19 पूर्व छात्र देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति पद पर आसीन हुए हैं।
4 करोड़ 15 हजार में तैयार होगा एलुमिनी भवन
वीसी खोखर ने कहा कि एलुमिनी भवन को आधुनिक तकनीकी साज-सज्जा के साथ डेढ़ वर्ष में तैयार करवाया जाएगा। अगले एलुमिनी कार्यक्रम से पहले ही इसे तैयार कर लिया जाएगा। इसे बनाने मेें 4 करोड़ 15 हजार रुपये खर्च आएगा।
ढाई घंटे लेट पहुंचे कृषिमंत्री
एलुमिनी कार्यक्रम में कृषिमंत्री ढाई घंटे लेट पहुंचे। कार्यक्रम के अनुसार उन्हें सुबह 10.15 बजे एलुमिनी भवन का शिलान्यास करना था, लेकिन वे 12.30 बजे कार्यक्रम में उपस्थित हुए। नारनौल के विधायक और इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र ओमप्रकाश यादव इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
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फसली बीमे की प्रक्रिया सही
कृषिमंत्री धनखड़ ने प्रधानमंत्री बीमा योजना के बारे में कहा कि किसानों के लिए यह एक अच्छी सुविधा है, जो फसलों का नुकसान होने पर जोखिम प्रबंधन के रूप में किसानों को मिल जाती है। इससे किसानों को काफी सुविधा रहेगी।
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एग्रो-मार्केटिंग की ओर देना होगा ध्यान
उन्होंने कहा कि किसानों को आगे बढ़ने के लिए एग्रो-मार्केटिंग में आगे आना होगा। किसान फसलों का उत्पादन तो कर लेता है, लेकिन उसकी सही रूप से मार्केटिंग नहीं कर पा रहा है। इसलिए एग्रो-मार्केटिंग आज किसानों की आवश्यकता है।
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एलुमिनी को लीडर बन सुधारनी होगी किसानों की दशा
उन्होंने कहा देश में इस विश्वविद्यालय को हरित क्रांति का जनक माना गया है। इससे प्रदेश का नाम भी रोशन हुआ है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए जितना सोचा गया था, उतना क्रियान्वित नहीं हो पाया है और सरकार इस ओर भरसक प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की देश में ही नहीं, बल्कि एशिया में अपनी पहचान है। इसलिए इस विश्वविद्यालय के एलुमिनी का भी दायित्व बनता है कि वह लीडर बनकर किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अपना विशेष योगदान दें।
एलुमिनी भवन के लिए दी 11 लाख की राशि
कृषिमंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने एलुमिनी भवन की आधारशिला रखी और इसके निर्माण के लिए 11 लाख की धनराशि देने की भी घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने स्मारिका का विमोचन भी किया।
एचएयू के 19 छात्र बने कुलपति
कुलपति डॉ. केएस खोखर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रत्येक दो वर्ष के बाद पुराने छात्रों के साथ यादों को भी ताजा किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1970 में की गई थी। मैं पिछले 51 वर्षों से इसी विश्वविद्यालय में रह रहा हूं। इस विश्वविद्यालय के 19 पूर्व छात्र देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति पद पर आसीन हुए हैं।
4 करोड़ 15 हजार में तैयार होगा एलुमिनी भवन
वीसी खोखर ने कहा कि एलुमिनी भवन को आधुनिक तकनीकी साज-सज्जा के साथ डेढ़ वर्ष में तैयार करवाया जाएगा। अगले एलुमिनी कार्यक्रम से पहले ही इसे तैयार कर लिया जाएगा। इसे बनाने मेें 4 करोड़ 15 हजार रुपये खर्च आएगा।
ढाई घंटे लेट पहुंचे कृषिमंत्री
एलुमिनी कार्यक्रम में कृषिमंत्री ढाई घंटे लेट पहुंचे। कार्यक्रम के अनुसार उन्हें सुबह 10.15 बजे एलुमिनी भवन का शिलान्यास करना था, लेकिन वे 12.30 बजे कार्यक्रम में उपस्थित हुए। नारनौल के विधायक और इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र ओमप्रकाश यादव इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।